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ज्योतिष के सटीक फलित सूत्र- Jyotish Ke Satik Phalit Sutra

$26
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: SAGAR PUBLICATIONS
Author Meenu Singh
Language: Hindi
Pages: 223
Cover: PAPERBACK
8.5x5.5 inch
Weight 250 gm
Edition: 2026
ISBN: 9788198113573
HCK611
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Book Description

परिचय

पुस्तक में ज्योतिष की आधारभूत जानकारी का वर्णन नहीं किया जाएगा और न ही विशेष बल यहां दशा और गोचर पर दिया जाएगा। यहां कुंडली को कैसे समझें और जातक के प्रश्नों को हल करने के लिए किस प्रकार से जन्म कुंडली को देखें इसपर विशेष बल दिया जाएगा। विषय सूचि में दिये गए 27 बिन्दुओं का संक्षिप्त में वर्णन यहां किया जा रहा है। इसका विस्तार ही आपको पुस्तक में प्राप्त होगा।

सर्वप्रथम हम जिन-जिन बिन्दुओं के ऊपर अपना विशेष बल देंगे उसके ऊपर क्यों विशेष बल देना आवश्यक है उसके विषय में संक्षेप में जानकारी देने का प्रयास करेंगे।

लग्नानुसार पत्रिका की विवेचना में प्रत्येक लग्न को समझना है। सभी लग्नों में सिर्फ ग्रहों को स्वामित्व के आधार पर समझाने का प्रयास किया गया है कि कौन से ग्रह किन लग्नों में शुभ, योगकारी, पूर्णयोगकारी एवं मारक है। कुंडली को सर्व प्रथम लग्न से ही देखना प्रारंभ करें।

कुंडली में दूसरे नंबर पर इसके लिए लग्न, लग्नेश, एवं कारक के रूप में सूर्य का अवलोकन कर लेना चाहिए ताकि जातक के स्वास्थ्य का पता चल जाए। लग्न बलवान होने पर जातक अपने जीवन में आने वाले अन्य समस्याओं का हल ढूंढ सकता है। इसकी पूर्ण जानकारी के लिए लग्न, लग्नेश एवं कारक की स्थिति पर विचार करें।

चन्द्रमा की स्थिति एवं उसके ऊपर प्रभाव डालने वाले ग्रह का अध्ययन भी सूक्ष्मता से करना चाहिए ताकि जातक के मानसिक बल एवं जातक कितना संवेदनशील है इन सब बातों की जानकारी प्राप्त की जा सके।

तीसरे नंबर पर जातक का उम्र देखना चाहिए जिस' समय हमारे पास कुंडली विवेचन हेतु प्रस्तुत किया गया है। क्योंकि एक ही ग्रह की स्थिति एवं दशा अलग-अलंग उम्र पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालती है तथा एक उम्र विशेष पर प्रश्न भी अलग-अलग होते हैं।

चौथे नंबर पर जातक के स्वभाव को लग्न, लग्नेश एवं चन्द्रमा की कुंडली में स्थिति एवं उस पर पड़ने वाले शुभाशुभ प्रभाव से पता चल जाएगा इसको समझना अनिवार्य है।

पांचवें नंबर पर देश, काल एवं परिस्थिति को समझना अनिवार्य है यह जातक के स्वभाव के साथ-साथ अन्य सभी विषयों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। बिना देश, काल और परिस्थिति को समझे आप सिर्फ ज्योतिष सिद्धान्त का प्रयोग करके निर्णय तक पहुंचना कठिन होगा।

छठे नंबर पर हमें सफलता निर्धारित करने वाले तथ्य के ऊपर ध्यान देना है ताकि कुंडली के माध्यम से यह समझा जा सके कि जातक अपने जीवन में कितना सफल हो सकेगा। इन विषयों को समझने के लिए इनके प्रकार का विश्लेषण आगे प्राप्त होगा।

सातवें नंबर पर जन्मकालीन दशा जो जातक के जन्म के समय किसी ग्रह की शेष दशा के रूप में प्राप्त है उसको देखना अनिवार्य है क्योंकि इसी के आधार पर जीवन पर्यन्त दशा क्रम प्राप्त होता है और इसी के आधार पर शुभाशुभ फल जीवन में किस समय प्राप्त होगा यह निर्धारित होगा।

आठवें नंबर पर कुंडली में कमजोर कड़ी को ढूंढना है जो जीवन में बाधा एवं परेशानियों को देने वाला है। यह ग्रह की स्थिति एवं उसपर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव से पता चलेगा। कमजोर कड़ी हमारे जीवन के किस हिस्से में हमारे लिए परेशानी लेकर आएगा इसको दशा से स्पष्ट करना है।

नौवें नंबर पर कुंडली में 12 के 12 भावों का अपना महत्त्व होता है। इसकी विशेषता तब समझ में आती है जब हम किसी विशेष प्रश्नों के उत्तर हेतु संबंधित भावों को लग्न बनाकर कुंडली का आंकलन करते हैं।

दसवें नंबर पर हम दशाओं पर विशेष बल देंगे। अन्तर एवं प्रत्यंतर दशा किस प्रकार महादशा को प्रभावित करती है तथा महादशा नाथ हमारे प्रकृति को किस प्रकार बदलती है इसको समझने का प्रयास करेंगे।

ग्यारहवें नंबर पर दशा के क्रम पर ध्यान देना है कि आपके जन्म के समय पर किस प्रकार की दशा मिली एवं बचपन में किस प्रकार की दशा मिली और युवा एवं वृद्धावस्था में किस प्रकार की दशा मिली इससे आपके जीवन पर किस प्रकार का प्रभाव होगा इस बात को समझना है।

बारहवें नंबर पर अनुकुल एवं प्रतिकूल दशाओं के प्रभाव को समझेंगे और अनुकूल एवं प्रतिकूल स्थिति के आधार पर इसकी विवेचना करेंगे। दो तरह अर्थात साधारण और विशिष्ट फल एक ही ग्रह किस प्रकार देते हैं इसपर विशेष चर्चा करेंगे।

तेरहवें नंबर पर षड्बल को समझना जरूरी है यह छः प्रकार के बलों के योग से बना है। ग्रहों के बलों को समझने के लिए इससे अच्छा तरीका और कोई नहीं है। षड्बल में बलवान ग्रह भी यदि कुंडली में अशुभ प्रभाव में हो तो ग्रह अपने पूर्ण फल को देने में सक्षम नहीं होते।

चौदहवें नंबर पर फलकथन में लग्न पत्रिका का महत्त्व को समझेंगे। वैसे तो षोड्स वर्गचार्ट का भी वर्णन वैदिक ज्योतिष में प्राप्त है लेकिन लग्न पत्रिका का ही विशेष महत्त्व है। शुभाशुभ फल क्या प्राप्त होगा इस विषय को लग्न पत्रिका ही बताने में सक्षम है। अन्य वर्गचार्ट इन फलों को यथारूप में प्राप्त होगा या कुछ परिवर्तन के साथ प्राप्त होगा इसके विषय में बताता है।

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