| Specifications |
| Publisher: Vani Prakashan | |
| Author Mahadevi Verma | |
| Language: Hindi | |
| Pages: 212 | |
| Cover: PAPERBACK | |
| 8.5x5.5 Inch | |
| Weight 290 gm | |
| Edition: 2024 | |
| ISBN: 9789362877918 | |
| HBR028 |
| Delivery and Return Policies |
| Usually ships in 1 days | |
| Returns and Exchanges accepted within 7 days | |
| Free Delivery |
महादेवी वर्मा
जन्म : सन्
1907, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश।
शिक्षा : इलाहाबाद
विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए.।
प्रयाग महिला
विद्यापीठ के प्रारम्भ से ही वहाँ की प्राधानाचार्य के रूप में नियुक्त हुई और जीवनपर्यन्त
कुलाधिपति के रूप में उससे सम्बद्ध रहीं। इलाहाबाद महादेवी जी की कार्य-स्थली रही,
जहाँ हिन्दी की प्रसिद्ध पत्रिका 'चाँद' का सम्पादन भी उन्होंने किया। 'ज्ञानपीठ पुरस्कार',
'सेक्सरिया पुरस्कार', 'मंगला प्रसाद पारितोषिक' आदि राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कारों
से सम्मानित हुई।
महादेवी जी
को भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' अलंकरण से भी विभूषित किया गया। उत्तर प्रदेश विधान
परिषद् की सदस्या के रूप में भी उनका मनोनयन किया गया।
प्रमुख प्रकाशन
नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, महादेवी प्रतिनिधि कविताएँ, (काव्य-कृतियाँ);
श्रृंखला की कड़ियाँ, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, मेरा परिवार,
साहित्यकार की आस्था, महादेवी प्रतिनिधि गद्य-रचनाएँ (गद्य-लेखन) आदि। सन् 1987 में
इलाहावाद में निधन।
"अप्रतिहत
आराधना की वेदी पर प्रत्येक साँस न्यौछावर कर देने के लिए आतुर महिमामयी महादेवी (विस्तृत
परिचय पुस्तक के आरम्भ में) का समस्त जीवन मन्दिर की आरती के समान इष्टदेव के प्रति
समर्पित रहा है। वे स्नेह, मैत्री और करुणा की कवि हैं, मधुर-मधुर जलने वाले दीपक के
समान, युग-युग प्रतिक्षण अपने उसी प्रियतम का पथ आलोकित करने के लिए आकुल। उन्होंने
अपने समस्त जीवन को दीपशिखा के समान प्रज्वलित कर युग की देहरी पर ऐसे रख दिया है कि
भीतर और बाहर दोनों ओर उजियारा हो रहा है।"
Send as free online greeting card
Visual Search