किसी देश की उन्नति के लिए आवश्यक है कि उस देश की जनता का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो। यदि किसी देश में रहने वाली जनता के स्वास्थ्य में विकार उत्पन्न हो जाये, तो वह देश विकास की दौड़ में पीछे रह जाता है। बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण उस देश में रहने वाली जनता अपंग हो जायेगी और समाज का विकास थम जायेगा। प्रत्येक देश चाहता है कि उसका विकास तीव्र गति से हो और उस देश में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहे। यदि स्वास्थ्य बेहतर होगा तो उस देश के निवासी विकास में सहयोगी के तौर पर अपना योगदान दे सकेंगे। मानव के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में योग बहुत महत्वपूर्ण है। योग व्यक्ति तथा समाज दोनों के लिए आवश्यक है। जब योग का अभ्यासों का पालन किया जाता है, तो उनके अनुरूप ही एक सुन्दर, संयमी समाज का निर्माण होता है, समाज की अनेक समस्याओं का निदान हो जाता है।
वर्तमान समय में व्यक्ति की असंयमित जीवन-शैली, अस्त-व्यस्त जीवन, अनियमित खान-पान के कारण कई गंभीर व्याधियों से ग्रस्त हो रहा है। उसे कई शारीरिक एवं मानसिक विकारों ने घेरा हुआ है। उसका स्वास्थ्य निरंतर गिर रहा है, यह गंभीर स्वास्थ्य संकट है। 'ग्लोबोलाइजेशन' के युग में खान-पान, रहन-सहन, तौर-तरीकों में निरंतर बदलाव हो रहा है। इस बदलाव के कारण व्यक्ति रोगों का घर बना हुआ है। उस व्यक्ति का सदैव स्वास्थ्य गिरा रहना भारत के लिए चिंतनीय है, क्योंकि गिरता हुआ स्वास्थ्य भारत के विकास में बाधक है। निरंतर गिरते हुए स्वास्थ्य के कारण हरेक व्यक्ति दवाईयों पर निर्भर है, जबकि भारत की प्राचीन परंपरा में आयुर्वेद, योग आदि चर्चित रहे हैं। उस समय योग, आयुर्वेद के प्रयोग से अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखते थे। किंतु अपनी प्राचीन परंपराओं को छोड़कर हमने अपनी धरोहरों का नाश किया है।
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