पुस्तक परिचय
मेरी जेल डायरी लाहौर (पंजाब) सेण्ट्रल जेल में आखिरी बार कैदी रहने के दौरान (1929-1931) भगत सिंह ने आजादी, इंसाफ, खुद्दारी और सम्मान के सम्बन्ध में महान् दार्शनिकों, विचारकों, लेखकों तथा नेताओं के विचारों को बहुत पढ़ा और आत्मसात् किया। इसी के आधार पर उन्होंने जेल में टिप्पणियां लिखीं, जिनका संकलन प्रस्तुत पुस्तक मेरी जेल डायरी में किया गया है। यह जेल डायरी भगत सिंह के अपूर्व साहस, राष्ट्रभक्ति तथा पराक्रम की झलक प्रस्तुत करती है।
लेखक परिचय
भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 को लायरपुर जिले के बंगा (जो अब पाकिस्तान में स्थित है) के एक सिख परिवार में हुआ था। देशभक्त परिवार में जन्म लेने के कारण भगत सिंह को बचपन से ही देशभक्ति और स्वतन्त्रता का पाठ पढ़ने को मिला। उन्होंने जेल में अंग्रेजी में एक लेख भी लिखा, जिसका शीर्षक था-मैं नास्तिक क्यों हूं? जिसका प्रथम प्रकाशन लाहौर से ही छपने वाले अखबार 'दि पीपल' में 27 सितम्बर, 1931 को प्रकाशित हुआ। यह लेख भगत सिंह के द्वारा लिखित साहित्य के सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली हिस्सों में गिना जाता है और बाद में इसका कई बार प्रकाशन हुआ। इस लेख के माध्यम से भगत सिंह ने तार्किक रूप से यह बताने का प्रयत्न किया कि वे किसी ईश्वरीय सत्ता में क्यों यकीन नहीं करते हैं।
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