पुस्तक परिचय
आधुनिक भारत का इतिहास जहाँ विदेशी आक्रमणों का साक्षी है, वही उनका प्रतिरोध भी आधुनिक काल की महत्वपूर्ण घटना है। समुद्री मार्ग से कई विदेशी शक्तियों का आगमन डच, डेन्स, फ्रेन्च और अंग्रेज। सभी भारतीय वैभव में अपनी हिस्सेदारी के लिये लालायित । अंग्रेज सर्वश्रेष्ठ निकले और सम्पूर्ण भारत को अपना उपनिवेश बनाया। देशी राजाओं की विलासिता और आपसी वैमन्यस्ता अंग्रेजों की कुटिल नीति का सामना न कर सकी। ईसाई धर्म का प्रवेश हुआ और हमारी व्यव्यस्था में अनेकों परिवर्तन हुए। पर इतिहास की पुनरावृति होती रहती है। सिपाही विद्रोह का बिगुल बजा राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन का प्रथम सोपान, असफल ही सही पर इसने राष्ट्रीय चेतना की अलख जगा दी। फिर ता आजादी की जो लहर चली उसे अंग्रेजो की महाशिक्त भी दवा न पायी हमें आजादी मिली पर खण्डित और रक्तरंजित । कुछ समय बाद से ही देश सेवा का ज्वार तिरोहित होने लगा। हमारा प्रजातंत्र वोटतत्र में परिणत हो गया और हम जातिवाद, वर्गवाद, समूहबाद, सम्प्रदायवाद और आतंकवाद के साथ धनबल, बाहुबल और अपराधबल की त्राशदी झेल रहे हैं। ऐसी स्थिति में सब-जन हिताय जैस आन्दोलन ही हमें उबार सकता है। हमने अपने संस्कारों से विश्व को सहअस्तित्व का ज्ञान दिया है हम पुनः इस प्रयास में जुटें और सर्वोपरि हो ।
लेखक परिचय
प्रोफेसर (डा०) अर्चना सिन्हा (जन्म 1939), एम० ए०, डी० लि० (पटना विश्वविद्यालय), 1960 में एम० ए० समाज शास्त्र बिहार विश्वविद्यालय, 1974 में डी० लिट्ठ की उपाधि पटना विश्वविद्यालय से प्राप्त । सन् 1962-1964 तक प्राध्यापिका, स्नातकोतर समाज शास्त्र विभाग, भागलपुर विश्वविद्यालय, 1964 में मगध महिला महाविद्यालय (पटना विश्वविद्यालय) में प्राध्यापिका नियुक्त एवं 1966-1995 तक विभागाध्यक्ष के रुप में कार्यरत । 1974 में उपाचार्या एवं 1984 में विश्वविद्यालय आचार्या एवं 1995 में मगध महिला कॉलेज की प्राचार्या नियुक्त। 1998 से 1999 तक स्नातकोतर समाज शास्त्र विभाग में अध्यक्ष के पद से सेवानिवृत हुई । पठन पाठन में विशेष अभिरुचि के कारण अनेक संगोष्ठी का निदेशन किया। इनके मार्गदर्शन में 23 शोधार्थी को पटना, भागलपुर एवं मगध विश्वविद्यालयों से पी-एच० डी० की उपाधि से सम्मानित किया गया। 33 शोधपत्र राष्ट्रीय स्तर के शोध पत्रिकाओं एवं पुस्तकों में प्रकाशित । 10 अखिल भारतीय संस्थाओं की आजीवन सदस्य। यह इनकी तीसरी पुस्तक है। डा० सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा (जन्म 16 मई 1920), 1944 में एम.ए., अंग्रेजी पटना वि. वि., 1967 में भागलपुर विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की उपाधि से सम्मानित । इनका शोध प्रबन्ध इंगलिश इन इण्डिया (ए टिस्टोरिकल स्टडी) बहुचर्चित रहा तथा दक्षिण पूर्वी एशिया के शोध ग्रन्थों में इनकी कृति को विशेष ख्याति प्राप्त हुई।
भूमिका
भारतीय इतिहास की पुनरावृति हुई सन् 1757 ई० में। पानीपत के युद्ध सन् 1526 ई० में और पलासी में युद्ध सन् 1757 ई0250 में इनसे हमने कुछ सीखा या नहीं? यह सोचने की बात है। दो सौ एकतीस वर्षों का अन्तराल किसी भी राष्ट्र के इतिहास में बड़ा मूल्यवान समय माना जाता है, परन्तु हमारे देश में ऐसा नहीं हुआ। हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे कब के हवा में उड़ चले अंग वस्त्रम् और केसरिया पगड़ी, आबैठी दो पल्ली टोपी, शेरवानी और पायजामा। अब यह भी उतर गये। सर पर हैट पाँव में पैन्ट बन गये अब हम जेन्टिलमैन । हम निष्प्राण खूँटे की तरह भिन्न-भिन्न प्रकार से सजते रहे, सेंवरते रहे, समाज के लोग हमारी उदार वृत्ति और मिश्रित संस्कृति की राग अलापते रहे। सच्ची बात यह है कि सारा कालखण्ड हमारी निष्क्रियता, नपुंसकता और अकर्मण्यता के दिन थे। लेकिन इतिहास कब चुप बैठता है? इसकी पुनरावृति होती रहती है। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में सन् 1587 ई० में सिपाही विद्रोह हो गया, राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन का प्रथम सोपान असफल ही सही, परन्तु राष्ट्रीय चेतना को झकझोर गया। भारतवासियों की धमनियों में नया रक्त प्रवाहित होने लगा। इसी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में एक नया झंझावात आया संदेश दे गया, चलो वेदों की ओर। ब्रह्म और राष्ट्र, दोनों का सम्मान करो। "सर्वे स्वे स्वे गृहे राजा" तुम अपने अपने घरों के, देश के राजा हो, गुलाम नहीं। बात गंगाधार तिलक ने नारा दिया। "स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।" फिर क्या था, हिन्दु और मुसलमान पारसो और सिक्खों ने हाथ मिलाया और जूझ पड़े स्वतंत्रता संग्राम में।
Hindu (हिंदू धर्म) (14033)
Tantra (तन्त्र) (1043)
Vedas (वेद) (733)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2138)
Chaukhamba | चौखंबा (3455)
Jyotish (ज्योतिष) (1633)
Yoga (योग) (1209)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (714)
Sahitya (साहित्य) (25416)
History (इतिहास) (9379)
Philosophy (दर्शन) (3706)
Santvani (सन्त वाणी) (2598)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist