कवि परिचय
श्री धर्मसिंह आर्य (धर्मसिंह नादान) का जन्म दिनांक 01-10-1940 को श्री रामपत जी मिस्त्री पांचाल के घर गांव सुहरा पूर्व जिला रोहतक, वर्तमान जिला झज्जर में हुआ था। आपने माध् यमिक विद्यालय जहांगीरपुर (झज्जर) से मिडल परीक्षा उत्तीर्ण की थी। सन् 1959 में मैट्रिक की परीक्षा पंजाब यूनिवर्सटी से उत्तीर्ण की। दो वर्ष तक मजदूरी करते रहे। सन् 1961 में रोहतक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से "टर्नर" की ट्रेनिंग में प्रवेश लेकर सन् 1962 में ट्रेनिंग पूर्ण कर ली। श्री धर्मसिंह जी को युवा अवस्था से ही कविता निर्माण तथा काफ्ट में बड़ी रूचि है। अतः 1962 के भारत-चीन युद्ध में भजन मण्डली के द्वारा नवयुवकों को प्रोत्साहित किया। कविता में अधिक प्रेरणा आर्य समाज के प्रसिद्ध वयोवृद्ध भजनोपदेशक स्वामी भीष्म जी के सानिध्य से मिली। आज भी आपके पास स्वामी भीष्म जी की दर्जनों भजनों की पुस्तकें सुरक्षित हैं।
सन् 1964 में झज्जर क्षेत्र में भयंकर बाढ़ आयी। अतः आपने भी जी-जान से बाढ़ पीड़ितों की सहायता की। उसी दौरान दुलीना (झज्जर) में मोटरबोट चलाने की ट्रेनिंग ली तथा पर्याप्त समय तक बाढ़ पीड़ितों की सहायता की तथा उस समय के पंजाब के मुख्यमन्त्री श्री रामकिशन तथा उपायुक्त रोहतक, वित्त आयुक्त (पंजाब) द्वारा इनको प्रशंसा पत्र प्राप्त हुए। आर्य प्रतिनिधि सभा (हरियाणा) के उपदेशकों में भी आपका नाम शोभा पाता रहा है।
साहित्य अकादमी पटियाला (पंजाब) द्वारा नेहरू महाविद्यालय, झज्जर में आयोजित कवि सम्मेलन में 'वीर की ललकार' कविता सुनाने पर प्रथम पुरूस्कार प्राप्त हुआ। किन्तु बाद में निर्णायक मण्डल में विवाद होने पर पुरूस्कार वापिस लौटा दिया। आप सद्य कवि हैं अतः आपकी कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में समय-2 पर छपतीं रहती हैं।
दिनांक 06-02-1978 को स्वर्गीय श्री जयप्रकाश नारायण की कारागार से मुक्ति के बाद उनके स्वागत में एक जनसभा आयोजित की गई। जिसमें स्वर्गीय चौ. देवीलाल, बाबू जगजीवन राम, स्वामी इन्द्रवेश, स्वामी अग्निवेश, दिल्ली के पूर्व मुख्यमन्त्री मदनलाल खुराना आदि उपस्थित थे। इस जनसभा में श्री धर्मसिंह नादान ने वीर रस की कविता सुनाई। कविता के बीच में चार बार तालियाँ बजी तथा सभी ने आपको बार-2 साधुवाद दिया। सभा रामलीला मैदान दिल्ली में थी। कविता का शीर्षक भविष्यवाणी था। स्वामी इन्द्रवेश जी ने नादान द्वारा हरियाणा की लाज रखने की बात कही। चौ. देवीलाल जी ने कहा छोटो सै ज्ञान घणौ है।
उन्हीं दिनों चौ. देवीलाल के मुख्य मन्त्रितत्व काल में जिला रोहतक की 'सदाचार समिति' के अध्यक्ष भी रहे। मण्डल आयोग के हरियाणा के दौरे के समय उपायुक्त रोहतक द्वारा आपको मार्गदर्शक नियुक्त किया गया ।
Hindu (हिंदू धर्म) (14032)
Tantra (तन्त्र) (1042)
Vedas (वेद) (733)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2135)
Chaukhamba | चौखंबा (3462)
Jyotish (ज्योतिष) (1632)
Yoga (योग) (1209)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (715)
Sahitya (साहित्य) (25415)
History (इतिहास) (9382)
Philosophy (दर्शन) (3708)
Santvani (सन्त वाणी) (2600)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist