निगम चिन्वन: अथर्ववेद, ऋग्वेद, यदुर्वेदमें अनेक ऐसे सूक्त एवं स्वस्त्ययन हैं जिनसे जीवोंका जीतेजी कल्याण निश्चित है। उनमेंसे कुछ चुने हुए सूक्तों एवं स्वस्त्ययनोंका रहस्य सरल भाषामें परन्तु विभिन्न (न्याय, वैशेषिक, जैन, बौद्ध, चार्वाक, वेदान्त आदि) मतोंके अनुसार परमपूज्य महाराजश्री स्वामीश्री अखण्डानन्द सरस्वतीजीने लिखवा दिया उव्वट, वेंकटनाथ, महीधर, सायण, उद्गीथ स्कन्द स्वामी, मुद्गल आदिके वैदिक अर्थोंको भी महाराजश्रीने इसमें उद्धृत किया है आपके कर कमलोंमें 'निगम-चिन्तन 'के रूपमें वह संकलन प्रस्तुत है। वैदिकार्थी, विद्यार्थी, धर्मार्थी, अर्थार्थी, कामार्थी, मोक्षार्थी-सभीके लिए यह ग्रन्थ समान रूपसे फलदायी है।
Hindu (हिंदू धर्म) (14018)
Tantra (तन्त्र) (1038)
Vedas (वेद) (731)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2132)
Chaukhamba | चौखंबा (3474)
Jyotish (ज्योतिष) (1630)
Yoga (योग) (1209)
Ramayana (रामायण) (1315)
Gita Press (गीता प्रेस) (717)
Sahitya (साहित्य) (25162)
History (इतिहास) (9335)
Philosophy (दर्शन) (3705)
Santvani (सन्त वाणी) (2602)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist