हमारे जीवन की महान साहसिक बाधा दौड़ का अंतिम लक्ष्य वह ऊनी धागा है, जो कि, हमारे स्वामी पूर्ण अवतार भगवान श्री सत्य साई बाबा हैं। वस्तुतः मेरे जैसे अनेकों लोगों के लिये भगवद् प्राप्ति के प्रयत्न एक बाधा दौड़ ही हैं। इस प्रेम के ऊनी धागे के पार महान शून्य, चिदाकाश, "मैं" (Capital I) विद्यमान है। वहाँ हमारे दैवी कृपा के महा सागर में प्रवेश के लिये, हल्के से झटके से तोड़ा जाने वाला धागा विद्यमान है जो, और कुछ नहीं केवल 'वह' (HIM) है। 'उसके' उस पार शून्य के अतिरिक्त कुछ नहीं, समुद्र के समान पूर्णता एवं आकाश के समान शून्यता है, जहाँ बाई ओर से (H) तथा दायीं ओर से (M) मध्य में "मैं" (1) में विलीन हो जाता है (सोऽहम्)। ईश्वर तक की यह बाधा दौड़ मेरे जैसे अनेक लोगों के लिये, अमेजन तथा ब्रह्मपुत्र नदियों के समान, बड़ी ही उत्तेजनापूर्ण होती है क्योंकि हमारे जोशीले वर्तमान जीवन में बीते हुए कल की विचारधाराएँ हमारे सामने आकर अनेकों उलझनें पैदा कर देती हैं जिससे कभी-कभी तो यह दौड़ केवल परिश्रम मात्र ही दृष्टिगोचर होती है। कभी-कभी यह खड़ी चट्टान की चोटी पर से गिरते हुए झरने के पानी के समान जोखिम भरी और कभी-कभी चारों ओर मित्रों से घिरी हुई एक आनन्ददायक, शान्त सवारी के समान, सबके लिये समान रूप से प्रेम के पंख फैलाये हुए मैदानों में बहती गंगा के समान प्रतीत होती है। इस बाधा दौड़ के मध्य में व्यग्रता एवं ऊब, तनाव एवं आराम, हर्षोन्माद तथा उदासीनता बारी-बारी से आते-जाते हैं। मुझ जैसे अनेकों भक्तजनों के लिए जो बीते हुए कल के भौतिकवादी नकारात्मक जीवन के बाद स्वामी के पास आते हैं, यह एक सच्चाई है। क्षाओं पर सेवा ही बन हैं। तीक है। बन्ध-तंत्र अवतरित सम्बन्ध भारत का दक्षिणी छोर केरल, दो बातों के लिये प्रसिद्ध है। एक तो यह कि आदि शंकराचार्यजी ने यहीं से अपना दार्शनिक विजय अभियान प्रारम्भ करते हुए वेदान्त को, अपने मौलिक प्राचीन रूप में, बिना किसी कर्मकाण्डी मिलावट के पुनः स्थापित किया। इससे पहले अनेकों धार्मिक गुरुओं ने, जिनमें से अधिकांश दक्षिण भारत की उस समृद्ध शैव परम्परा से जुड़े हुए थे जो आध्यात्मिकता एवं धार्मिकता में तार्किक अथवा अतितार्किक दृष्टिकोण पर बल देते थे, भारत के इस छोटे से प्रान्त को अत्यंत संशययुक्त परन्तु वास्तविकता में धार्मिक बना दिया
Hindu (हिंदू धर्म) (14079)
Tantra (तन्त्र) (1053)
Vedas (वेद) (732)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2142)
Chaukhamba | चौखंबा (3458)
Jyotish (ज्योतिष) (1637)
Yoga (योग) (1212)
Ramayana (रामायण) (1310)
Gita Press (गीता प्रेस) (714)
Sahitya (साहित्य) (25495)
History (इतिहास) (9407)
Philosophy (दर्शन) (3729)
Santvani (सन्त वाणी) (2599)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist