पाती चाचा संजीव कुमार गंगवार का पहला कहानी संग्रह है। उनकी यह किताब उनके लेखन के सिल्वर जुबली वर्ष में प्रकाशित हुई है। है। इस कहानी संग्रह में मात्र 11 कहानियों का संग्रह किया गया है। ये कहानियाँ जाने पहचाने विषयों पर होकर भी एक नवीन चेतना व नवीन संवेदना का संवहन करती हैं। लगभग सभी कहानियों में हमारे आज के आधुनिक समय के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है। साथ ही वे व्यक्ति के मानसिक दुख और उसके द्वारा भोगे यथार्थ की कथा कहती हैं। मुख्य कहानी पाती चाचा के नाम पर पुस्तक का नामकरण किया गया है। यह कहानी मन में करुणा उत्पन्न करती है तो मनोरोगी कहानी हमारे समाज की वर्तमान जीवन शैली को उधेड़ कर रख देती है।
मैं जानती थी और लाल चुनरिया प्रेम की पीर से भरी हुई कहानियाँ हैं। जबकि सेलिब्रिटी कहानी विज्ञापन और बाजार के सच को उजागर करती है। खास बात यह है कि सभी कहानियों बिल्कुल अलग- अलग और एक ताजा हवा के झोंके जैसी हैं। उनकी अन्तर्वस्तु सर्वथा नवीन और वर्तमान समस्याओं से सजी हुई है। इन कहानियों में समाहित करुणा पाठक को अंदर से झकझोर देने में सक्षम है।
वे हमें सोचने को विवश करती हैं और कई अवसरों पर तो अंदर से ही छटपटाता हुआ छोड़ देती हैं। कहानियों की भाषा सरल, सुबोध और स्तरीय है जिसमें गजब की रोचकता साथ साथ चलती है। उन्होंने अपनी कहानियों के पात्रों को उनका अपना व्यक्तित्व प्रदान किया है। बहुत से पात्र लम्बे समय तक याद रखे जाएंगे। संजीव की यह कहानियाँ लम्बे समय तक अपने पाठकों के मस्तिष्क में छायी रहने वाली हैं। यह पुस्तक वर्तमान हिंदी कहानी की मूल संवेदना का विस्तार करने में सजग और सक्षम साबित होगी।
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