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पतंजलि योगसूत्र (तनाव मुक्त, तेज दिमाग): Patanjali Yogsutra (Tanav Mukt, Tej Dimag)

$25
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: JANAKI PRAKASHAN, PATNA
Author Vidya Bhushan Singh
Language: Sanskrit Text with Hindi Explanation
Pages: 114
Cover: Paperback
8.5x5.5 Inch
Weight 150 gm
Edition: 2019
ISBN: 9789386955487
BA3813
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Book Description
प्रस्तावना

मानसिक क्षमता का विकास योग का मुख्य उद्देश्य है। पतंजलि योगसूत्र अत्यन्त ही व्यवस्थित क्रम में है। योगसूत्र पर अनेकों भाष्य उपलब्ध हैं परन्तु अधिकांश पुस्तकों में अत्यन्त ही विस्तार पूर्वक एवं दर्शन के तकनीकी शब्दों का प्रयोग किया गया है जिसके कारण योग के विद्यार्थी भी 'पतंजलि योगसूत्र' से अपने आपको दूर रखा। आम आदमी की पहुँच से यह योगसूत्र दूर रहा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की भाषा अत्यन्त ही सरल एवं संक्षिप्त रखने का प्रयास किया गया है ताकि योग के विद्यार्थी के साथ-साथ आम लोग भी इसे पढ़ एवं समझ सकें। समझ में कमी के कारण ही समस्त समस्याओं की उत्पत्ति होती है। यह फॉर्मूला के समान है जिसके प्रयोग से जीवन के उलझनों को सुलझाया जा सकता है। विद्यार्थी इसका प्रयोग अपने दिमाग को तीव्र एवं गृहस्थ अपने प्रतिदिन के समस्याओं के समाधान के लिए कर सकते हैं। वर्षों से योग कराने एवं आम लोगों की समस्याओं को सुनने के बाद जो अनुभव प्राप्त हुआ उसको आधार बनाते हुए इस पुस्तक को लिखा गया। आज हर चीज को व्यक्ति विज्ञान की कसौटी पर देखना चाहता है इसलिए इसमें योग से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन को वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझाया गया है तथा वैज्ञानिक शोधों का वर्णन किया गया है। अनेक वैज्ञानिक शोधों ने योग से स्वास्थ्य एवं रोगों पर होने वाले लाभ को सत्यापित किया है। क्वानटम थ्योरी, तरंग कण द्वैत (Wave Particle Duality) तथा जुड़ने की घटना (Phenomenon of entanglement) का योग के दर्शन को वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। रपर्ट शेलड्राक का मार्फिक रेजोनेन्स (एक व्यक्ति का विचार अन्य व्यक्तियों में भी उभरने लगता है), कार्ल जुंग का सामूहिक अचेतन, नूस्फेयर (विचारों का क्षेत्र) इत्यादि यह दर्शाते हैं कि समस्त ज्ञान ब्रह्माण्ड में फैला हुआ है और व्यक्ति के सोच को प्रभावित करता रहता है। योग के द्वारा मन को विकसित करके उस क्षेत्र के ज्ञान को पाया जा सकता है जैसा कि गीता के 15वें अध्याय के पहले सूत्र (ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ।।15.1।।) में कहा गया है कि समस्त ज्ञान उल्टा वृक्ष की तरह है जिसकी जड़ें ऊपर हैं। योग शरीर और मन दोनों के स्वास्थ्य की बात करता है। योग के अनुसार मस्तिष्क शरीर का सूक्ष्म रूप है तो वहीं शरीर मस्तिष्क का विस्तारित रूप है। शरीर की प्रत्येक कोशिका अपने आप में एक स्वतंत्र इकाई है। प्रत्येक कोशिका अन्य कोशिकाओं से एक जटिल संवाद व्यवस्था के माध्यम से सम्पर्क में रहते हैं। हाल के अध्ययनों में यह पाया गया है कि फोटोन्स के माध्यम से कोशिकाएँ एक दूसरे से संवाद करते हैं। विद्युत चुम्बकीय सामंजस्य एवं लय में गड़बड़ी आने के कारण ही शारीरिक या मानसिक बीमारी उभरती है। यदि शरीर में उपस्थित जैव ऊर्जा केन्द्रों में सामंजस्य एवं लयबद्धता स्थापित किया जाये तो बीमारी के वास्तविक जड़ को समाप्त किया जा सकता है। पतंजलि द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त मस्तिष्क में उपस्थित तंत्र व्यवस्था से मेल खाता है। मस्तिष्क के अन्दर न्यूरान्स का लगातार फायरिंग होते रहता है। चंचल दिमागी अवस्था में ये न्यूरान्स अव्यवस्थित ढंग से फायरिंग करते हैं जिससे न्यूरान्स कमजोर हो जाते हैं

लेखक परिचय

विद्या भूषण सिंह वर्षों से योग को कैम्प, दूरदर्शन, व्याख्यान, कक्षा, प्रचार पुस्तिका इत्यादि के माध्यम से लोगों तक पहुँचा रहे हैं। इन्होंने इनर्जी योग हीलिंग सेन्टर की स्थापना की है। योग को गहराई से समझने के लिए विभिन्न धर्मो में छिपे हुए रहस्यों तथा इसके उपचारात्मक गुणों को जानने के लिए आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्युप्रेशर तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्त प्राचीन विद्याओं का बारिकी से अध्ययन किया है। वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य के लिए मनोविज्ञान से लेकर आधुनिक चिकित्सा शास्त्र तथा क्वांटम भौतिकी तक का विश्लेषन किया है। लोगों को योग कराने के क्रम में बहुत सारे सकारात्मक प्रतिपुष्टियों (फीडबैक) के मिलने के कारण योग के उपचारात्मक गुणों से संबंधित धारणा और पुष्ट हुई है। इन्होंने अपनी अंग्रेजी में लिखि पुस्तक Zero Minute Yoga में आधुनिक विज्ञान के सीमाओं का वर्णन किया है जिसके पहुँच से अभी भी शरीर का सूक्ष्म विश्लेषण परे है।

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