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प्रश्न चन्द्रप्रकाश: Prashna Chandra Prakash

प्रश्न चन्द्रप्रकाश: Prashna Chandra Prakash

प्रश्न चन्द्रप्रकाश: Prashna Chandra Prakash

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Item Code: HAA003
Author: चन्द्र दत्त पंत (Chandradatt Pant)
Publisher: Motilal Banarsidass Publishers Pvt. Ltd.
Language: Hindi
Edition: 2011
ISBN: 9788120821408
Pages: 273
Cover: Paperback
Other Details: 7.0 inch x 5.0 inch
weight of the book: 180 gms

दो शब्द

 

यह वर्तमान युग निस्सन्देह एक वैज्ञानिक युग है जिसमें विज्ञान ने बहुर्मुखी प्रगति की है जिसकी चतुर्दिश उन्नति के कारण स्वयं विज्ञान आधुनिक समय में प्रत्येक असम्भव समस्या का भी सुलझाव बन गया है ओर मानव ने चन्द्रलोक की चट्टान के टुकड़ों को लाकर पृथ्वी के सभी बड़े शहरों को जगमगा दिया है देहली के लाखों व्यक्तियों ने उसका अवलोकन कर अपने को धन्य माना और विज्ञान तथा मानव मस्तिष्क की सराहना की, कि जिसके कारण उनको यह सौभाग्य प्राप्त हुआ । यद्यपि यह कार्य कुछ वर्ष पूर्व असम्भव हो माना जाता था फिर भी इसकी सम्भवता प्रत्यक्ष देखकर कुछ देर अवाक् रहकर भी मानव सदा सदा के लिये चुप नहीं रह सका । और तुरन्त मन मस्तिष्क को सकल विकल के बीच लगाकर, अनेक प्रश्नोत्तरों से मन को उद्विग्न बना लिया और अपनी समस्त समस्याओं का यथेष्ट उत्तर प्राप्त न कर सकने के कारण किसी अच्छे विवेकी त्रिका- लज्ञ ज्योतिषी का आश्रय लिया और सुपसिद्ध ज्योतिषी के सम्मुख अपने प्रश्नों को रखकर यथेष्ट उत्तर प्राप्त करता रहा किन्तु प्रष्टा को कभी तो उसके प्रश्नों के उत्तर यथेष्ट रूप से मिल जाते हैं और कभी यत्न करते रहने पर भी निराश ही लौटना पड़ता है फिर भी उसके मन में अपने प्रश्नों के यथेष्ट उत्तर पाने के लिए बड़ी ही लालसा उत्सुकता तथा गुदगुदी लगी ही रहती है क्योकि प्रत्येक मनुष्य अपना उज्ज्वल भविष्य देखना चाहता है और अपनी सन्तान का भविष्य अपने से भी कहीं अधिक देदीप्यमान देखना चाहता है जिसके लिए वह बड़ा ही प्रगतिशील रहता है और खूब दौड़ धूप करता है। जब इतने पर भी उसको शान्ति नहीं मिलती तो यथेष्ट साधनों, अनुष्ठानों, देवाचनों, देवाराधनों, अखण्डपाठों, कीर्तनों आदिसे अपने इष्ट की सिद्धिको प्राप्त करना चाहता है । ज्योतिषीलोग जन्मपत्र देखकर जिसको जैसा बता देते हैं उसको वह मान्य ही होता है किन्तु जिन मनुष्यों के पास न तो जन्नपत्र हो है ओर न जन्म का समप तथा तिथि ही स्मृत है उन मनुष्यों की जानकारी तथा सुविधा के लिए ज्वोतिष शास्त्र में प्रश्न या प्रश्नकुण्डली खींचकर उनका फलादेश कहने का विधान रक्खा है ।जिसके द्वारा मनुष्य अपना भूत-भविष्य तथा वर्तमान काल का सम्पूर्ण विवरण जानकर अपने आगामी समय का सदुपयोग कर सकता है एक निर्धन, धनवान बन सकता है अनपढ़ एक विद्वान हो सकता है और स्वेच्छानुसार कार्य कर भले बुरे परिणाम द्वारा अपना जीवन सफल या विफल बना सकता है, इसमें जाति, वंश और देश काल का भेद निहित नहीं रहता ।

यद्यपि यह बात किसी से छिपी नहीं है कि प्राचीन भारतीय संस्कृत ग्रंथों में प्रश्नोत्तर को बहुत ही महत्व पूर्ण विषय समझकर सहस्रों ग्रन्थ लिखे गये हैं जिनके द्वारा मानव को भूत भविष्य और वर्तमान का यथेष्ट उत्तर भी प्राप्त हो जाता है किन्तु ये सभी प्रश्नोत्तर जहां तहां बन्धों में विश्रंखल अवस्था में टूटी हुई मोतियों की माला के समान बिखरे पड़े हैं यह बात किसी भी अच्छे ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता से छिपी नहीं है । बड़े कठिन परिश्रम के बाद अनेक पुस्तकों का आद्योपन्त अध्ययन करने के पश्चात ही कोई किसी प्रश्न कर्ता के प्रश्नों के उत्तर यथेष्ट रूप से देने के समर्थ हो सकता है । इस पर भी हम देखते हैं कि हिन्दी में अभी तक इस विषय में कोई भी पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है कि जो सम्पूर्ण सर्वांग प्रश्नों के उत्तर एक ही पुस्तक में यथेष्ट रूप से देखकर प्रश्न कर्ता को प्रसन्न कर सके । इन सब बातों को ध्यान में रखते हुये मैंने अनेक संस्कृत ग्रन्यों का अध्ययन करने के पश्चात् प्रश्न चन्द्र प्रकाश नामक पुस्तक लिखने का विचार किया जो कि आपके सामने प्रस्तुत है इस पुस्तक में विषय सूची के अनुसार सभी प्रकार के प्रश्नोत्तर यथेष्ट रूप से देने की प्रत्येक विधि सरल-सरस, शुद्ध तथा परिमार्जित हिन्दी में लिखने का सफल प्रयत्न किया है पाठक स्वयं एक बार इसको पढ़कर और यथेष्ट ज्ञान का अनुभव कर इस पुस्तक की भूरि-भूरि प्रशंसा किये बिना न रहेंगे कि वास्तव में अभी तक हिन्दी जगत में प्रश्नोत्तर देने क्ष लिये कोई दूसरी पुस्तक लिखी ही नही गई है और वास्तविक रूप से इस पुस्तक ने प्रश्नोत्तर सम्बन्धी एक बड़ी कमी की पूति करके मानव जाति का बड़ा शे उपकार किया है जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाय उतनी ही थोड़ी है ।

प्रश्न चन्द्र प्रकाश,प्रत्येक मनुष्य को केबल वार्षिक ही नही र्बास्क मासिक साप्ता- हिक,दैनिक दिनचर्या के साथ-साथ घन्टों, मिन्टों का भी भूत-भविष्य तथा वर्तमानका हाल बताने वाली हिन्दी में एक ही पुस्तक है । इसके द्वारा नौकरी, सट्टा, व्यापार लाट्री, जुआ, रेस, चोरी गई वस्तु आदि का सभी हाल प्रश्न द्वारा पाने का यथो- चित साधन है । किसी भी प्रश्न कर्ता को आता देखकर उसी समय प्रश्न कुण्डली तैयार करके विषय सूची के अनुसार पृष्ठ निकालो और तुरन्त प्रश्न बनाकर सही उत्तर देने में समर्थ हो जाओ और उसके मार्ग का विवरण बताकर उसे आवाक् कर दो । ताकि वह स्तब्ध ही खड़ा रह जाय । अपने प्रश्न का यथेष्ट उत्तर पाकर वह आपकी प्रशंसा करता हुआ आपके घर से चला जायेगा और आपकी कार्य कुशलता का गुण गान कर अपनी कृतज्ञता को प्रकट करता रहेगा जिससे आपको अर्य कोष को प्राप्ति के साथ-साथ आदर मान सरकार और प्रतिष्ठा के साथ-साथ अचल कीर्ति भी प्राप्त होगी ।

मैं आभारी हूं पब्लिशर्स लाला सुन्दरलाल जी जैन का कि जिन्होंने इस पुस्तक को हाथों हाथ प्रकाशित करके पाठकों की सेवा में इतनी जल्दी उपस्थित कर दिया कि मैं जिसका अनुमान भो नहीं लगा सकता था जिसके लिये उन्हें शत-शत धन्यवाद हैं और आशा करता हूँ कि शायद पाठकगण अभी तक नहीं भूले होंगे कि चन्द्र हस्त विज्ञान, वर्ष चन्द्र प्रकाश आदि पुस्तकें भी इन्हीं की कृपा से आप लोगों के हाथों तक पहुँची है और मुझे दृढ़ विश्वास है कि इनके ही करकमलों द्वारा शीघ्र ही जन्म लग्न प्रकाश नामक पुस्तक जो कि प्रेस में है आपके कर कमलों तक इस ही वर्ष में पहुँच जायेगी जिसकी वाट पाठकों को बहुत समय से है । लग्न चन्द्र प्रकाश वही पुस्तक हैजिसमें भृगुसंहिता की विषय सूची के अनुसार अपने जन्मपत्र खोलकर तथा अपने इष्ट-मित्रों, भाई-बन्धुओं बच्चों आदि का भूत भविष्य वर्तमान का हाल पढ़कर जातक के अनुरूप ही उसका जीवन सफल बनाया जा सकता है। जिसके लिये भी पाठक लाला सुन्दर लाल जी को धन्यवाद दिये बिना नहीं रह सकेंगे । कि जिन्होंने अपना हार्दिक सहयोग देकर हमें नई नई पुस्तकों के लिये प्रेरित किया है । आशा है कि भविष्य में भी उनका ऐसा ही सहयोग प्राप्त होता रहेगा । साथ ही मैं उन पाठकों का भी धन्यवाद करना चाहता हूँ जो कि मुझे अंक चन्द्र प्रकाश के प्रकाशित होने के बारे में समय-समय पर प्रश्न पत्र लिखते रहे हैं । उनसे प्रार्थना है कि वे सभी सज्जन पाठक कष्ट सहन कर उपर्युक्त पुस्तक के बारे में श्री मोतीलाल बनारसीदास पब्लिशर्स, बंगलो रोड, जवाहर नगर देहली से हो अनुरोध करें कि जिनकी कृपा से वह पुस्तक आपको शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त हो जाय क्योंकि इस पुस्तरक के द्वारा केवल जन्म-तिथि (Date of Birth) के द्वारा ही अपना शुभाशुम फल तथा समय प्राप्त कर सकते हैं और उसके द्वारा अपना शुभ वर्ष महीना दिन (Date) आदि प्राप्तकर अपना जीवन सफल बना सकतेहैं ।पाठक अवश्य उस से लाभ उठाकर धन्यवाद का पात्र बनें क्योंकि हिन्दी भाषा में अभी तक अंक-चन्द्रप्रकाश जैसी पुस्तक जीवन का समस्त हाल जानने के लिये नहीं लिखी गई है । इस पुस्तक ने अंक विद्या की सभी कमियों को पूरा करके एक नवीन स्थान प्राप्त कर लिया है ।

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