Cover Page: Baba Baidyanath Dham premises; from left: Smt. Nirmala Singh, Shri Anil Kumar Singh, Naina Panda Ji (two brothers), the author, and Smt. Usha Singh.
आमुख
जीवन को करीब से देखिए तो जीवन में 'प्रेम' जीवन का सार है। कबीर दास जी ने कहा है कि "प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय"। प्रेम बांटने से प्रेम मिलता है। भगवान भी प्रेम से ही मिलते हैं। इस पुस्तक में उल्लिखित पांच अष्टछाप कवियों का श्रीनाथ जी से सखाभाव प्रेम की पराकाष्ठा है। इनकी राग रागिनी के दीवाने थे श्रीनाथ जी। सन्त सूरदास जी भी अष्टछाप कवियों में एक थे और प्रभु का उन्हें भी दर्शन मिला। भक्त सन्त नामदेव जी को तो अनेकों बार भगवान के दर्शन हुए। भक्त कर्माबाई का जगन्नाथ जी से अद्भुत प्रेम था। रोज इन्हीं के हाथ की खिचड़ी खाते थे।
इसी तरह भक्त चरित्र श्री प्रेम निधि जी, भक्त बन्धु मोहंती, भक्त नाभा दास, भक्त हरिदास जी, स्वामी रामतीर्थ, काली कमली वाले बाबा और बाबा सन्त फरीद के साथ-साथ धर्म, यज्ञ कर्म, ज्ञान और अज्ञान, वाणी, तृष्णा, आत्मज्ञान, अवसाद, पुण्य और पाप, समता, स्वार्थ, सबसे बड़ा दुख, सहज जीवन, सुखी का कुर्ता, सुख-चैन, काशी का मुमुक्षु भवन, श्रीनगर का शंकराचार्य मन्दिर के अलावा और भी कई लेख पढ़ने को मिलेंगे।
अपनी संस्कृति, आनन्द और अनमोल प्रेम की अनुभूति कराती यह पुस्तक युग-युगान्तर तक पढ़ी जाती रहेगी। हमें अपने बच्चों को अपनी संस्कृति का बोध कराने के लिए इस पुस्तक को पढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना चाहिए।
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