पुस्तक परिचय
इतिहास इसका साक्षी है कि अहिल्याबाई होलकर ने भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में एक अलग अध्याय जोड़ा। अपनी अदम्य साहसिकता से उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध विद्रोह का जो विगुल बजाया, उसका शंखनाद ने भारत के कोने-कोने में सुप्त जन को प्राणवन्त कर दिया। स्वतंत्रता की जो क्रान्ति-भावना देशवासियों के मन-मस्तिष्क में सदियों से सुलग रही थी, उसको उघारने का पुन्य काम अहिल्याबाई ने किया। रानी अहिल्याबाई एक दूरदर्शी महिला और कुशल शासिका थीं। उनकी वीरता और बहादुरी की प्रशंसा के साथ-साथ लोग उनकी गहरी सूझबूझ और निर्भीकता की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते थे। वह राजकाज में गहरी रुचि लेती थीं और शासन-व्यवस्था को बड़े सुचारु ढंग से संचालित करती थीं। प्रशासनिक सुधार और निपुणता की ख्याति राज्य में तो थी ही, राज्य के बाहर भी खूब चर्चा का विषय था। इस पुस्तक में उनके उन्हीं गुणों और धार्मिक दृष्टि और लोकहित के विभिन्न पक्षों को ध्यान में रखते हुए नौ अध्यायों के अन्तर्गत विभाजित किया गया है। महारानी ने सभी के मन में देशप्रेम की अद्भुत भावना का संचार किया- हर भारतीय के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। हममें शिव की-सी शक्ति है, अत्याचार के हलाहल को पीकर अमर बनने की। हमारा यह पुण्यदेश सदियों से आक्रान्त है इन आतताइयों से हमें मुक्त होकर अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करनी है। क्योंकि स्वतंत्रता हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है।
लेखक परिचय
सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. मनीषा गिरी ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में महत्वपूर्ण सृजन कार्य किया है। प्रमुख हैं कविता, कहानी, निबन्ध-लेखन और बाल-साहित्य। इनकी रचनाएँ देश की स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित हुई हैं जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा प्रबुद्ध साहित्यकारों ने की है। इनका जन्म 16 नवम्बर 1993 को दिल्ली में हुआ है। प्रारंभिक डॉ. मनीषा गिरी शिक्षा दिल्ली से। जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय से बी.ए. (हिंदी-आनर्स) एवं विवेकानंद महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) शिक्षा ग्रहण कर, जीवाजी विश्वविद्यालय से एम.फिल. की उपाधि प्राप्त, एक वर्षीय वाकसेतु स्नातकोत्तर अनुवाद (हिन्दी-अंग्रेजी-हिन्दी) डिप्लोमा भारतीय अनुवाद परिषद् दिल्ली से प्राप्त किया। जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर मध्य प्रदेश से 'स्त्री अस्मिता के सरोकार एवं 21वीं सदी का हिन्दी सिनेमा' शीर्षक से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त । प्रकाशित पुस्तकें : 1. आधुनिक हिन्दी साहित्य में स्त्री विमर्श 2. ख्वाबों में तुम (काव्य संग्रह)3. नयी सदी का सिनेमा और स्त्री-अस्मिता 4. उठो, हुआ सबेरा (बाल कविता संग्रह) 5. भारतेन्दु के श्रेष्ठ निबंध 6. भारतीय राष्ट्रवाद का स्वरूप 7. हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श 8. राष्ट्र-निर्माता नानाजी देशमुख (शीघ्र प्रकाश्य)। राष्ट्रवादी लेखिका डॉ. मनीषा गिरी की रचनाओं में राष्ट्रीय-सांस्कृतिक चेतना का प्रबल स्वर प्रधानतः मुखरित हुआ है। देश की अनेकानेक राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सरकारी-गैरसरकारी संस्थानों से सम्मानित पुरस्कारों से अभिनन्दन विदुषी लेखिका ने जीवाजी विश्वविद्यालय में भाषा विभाग में 2017-18 तक अतिथि विद्वान के रूप में अध्यापन एवं माधव विधि महाविद्यालय, ग्वालियर में 2019 से अद्यावधि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत। आकाश-वाणी एवं दूरदर्शन, डी.डी. भोपाल, चैनल से साक्षात्कार व मध्य प्रदेश द्वारा काव्य-पाठ और रचनाओं का प्रसारण।
आत्मगत
इतिहास इसका साक्षी है कि अहिल्याबाई होलकर ने भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में एक अलग अध्याय जोड़ा। अपनी अदम्य साहसिकता से उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध विद्रोह का जो बिगुल बाजाया, उसका शंखनाद ने भारत को कोने-कोने में सुप्त जन को प्राणवन्त कर दिया। स्वतंत्रता की जो क्रान्ति-भावना देशवासियों के मन-मस्तिष्क में सदियों से सुलग रही थी, उसको उघारने का पुण्य काम अहिल्याबाई ने किया। सार्वजनिक उद्देश्य का व्यापक आन्दोलन किस प्रकार खड़ा किया जाये और चलाया जाये? इसकी गहरी समझ और मजबूत नेतृत्व निहायत जरूरी है। जब तक यह जानकारी सही ढंग से जनमानस में नहीं होती-कोई भी आन्दोलन सफल नहीं हो सकता। क्योंकि आन्दोलन में अनेक रंगतों वाली राजनीति और कई तरह की विचारधाराएँ साथ-साथ चलती हैं। साथ ही, ये विचारधाराएँ राजनीतिक नेतृत्व पर वर्चस्व कायम करने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा भी करती हैं। आन्दोलन में जहाँ सभी आधारहीन मुद्दों पर जोरदार बहस की इजाजत थी, वहीं इसकी विविधता और इसके भीतर आपसी तनावों के कारण इसकी एकता और प्रहार शक्ति का मजबूत होना भी आवश्यक था।
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