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रसमंजरी रामचरितमानस में रस निरूपण: Rasmanjari Ramcharitmanas Mein Ras Nirupan

$29
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: Anuradha Prakashan, Delhi
Author Aruna Pathak (Abha)
Language: Hindi
Pages: 264
Cover: PAPERBACK
8.5x5.5 Inch
Weight 350 gm
Edition: 2025
ISBN: 9789347254222
HCK772
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Book Description

भूमिका

 

रसमंजरी 'रामचरित मानस में रस निरूपण' शोध पत्र की भूमिका लिखने का अवसर लेखिका अरुणा आभा पाठक जी ने मुझे देकर एक महती ज़िम्मेदारी सौंपी है जिसका न्यायपूर्ण निर्वहन करने का पूर्ण प्रयास है। एक गंभीर और पौराणिक विषय पर आधारित इस शोधपत्र की प्रुफ रीडिंग के दौरान इसे अध्ययन करने का मुझे पूरा अवसर मिला। मैं अपने को सौभाग्यशाली समझती हूँ कि अरुणा आभा पाठक जी ने मुझ पर विश्वास किया और इस पुस्तक के संशोधन (वर्तनी और व्याकरण) के लिए मुझे चुना। तब मुझे हैरानी हुई कि एक स्कूल अध्यापिका क्या इतनी बड़ी जिम्मेदारी के योग्य हो सकती है? हालाँकि अब तक के जीवन का आधा हिस्सा पठन-पाठन में ही व्यतीत हुआ है। 36 वर्षों तक इंटरमीडिएट तक की हिंदी भाषा के अध्यापकीय काल में भाषा में वर्तनी और व्याकरण पर मेरा विशेष ध्यान रहा है। सेवानिवृत्ति के पश्चात परिणाम स्वरूप कई कवियों के काव्य संग्रहों का संशोधन और समीक्षा का अवसर मुझे अब तक प्राप्त हो चुका है। शायद यही कारण रहा होगा कि शोध पत्र जैसे गंभीर पांडुलिपि की भी जिम्मेदारी मुझ जैसे साधारण सी अध्यापिका को निर्वहन करने का अवसर प्राप्त हुआ। पांडुलिपि के संशोधन में मुझे लगभग दो से तीन महीना लग गया। लेकिन एक अच्छी बात ये रही कि इस गंभीर कार्य को करते हुए मैंने भली-भाँति इस शोध-पत्र में उद्धृत चौपाइयों का भी अध्ययन गहराई से किया है। अपनी क्षमता के अनुकूल मैंने बारीकी से अपने जिम्मेदारी को निभाने का प्रयास किया है। फिर भी त्रुटियाँ तो रह ही जाती हैं चाहे मिसप्रिंटिंग हो प्रकाशक की ओर से या अपनी भूल के कारण हो। इस शोध पत्र के अध्ययन में मैंने पाया कि रसमंजरी नाम का यह शोध पत्र अपने आप में मुकम्मल रसों का परिपाक है। ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि भाषा का प्रस्तुतीकरण बहुत ही सरल और सहज है। लेखिका ने भरपूर प्रयास किया है कि छोटे से छोटे प्रसंगों में भी रस और अलंकार का निर्वाह हो सके। चौपाई और दोहों की बहुत ही सहज व्याख्या और गद्य विधा में रस और अलंकारों की जानकारी दी गई है। आवश्यकतानुसार रस मर्मज्ञों का भी उदाहरण है। वस्तुतः हम कह सकते हैं कि भविष्य में यह पुस्तक लाभदायक सिद्ध होगी, शोधार्थी लाभान्वित होंगे। अगर इस पुस्तक का अध्ययन करेंगे तो पाएँगे कि ऐसे कई प्रसंगों का इसमें उल्लेख है जिसके बारे में आपको पहले कोई जानकारी नहीं थी और साथ उन सभी प्रसंगों में रसों का भी उल्लेख है। लेखिका का श्रम इस शोध पत्र के लेखन में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है। लेखिका (अरुणा आभा पाठक जी) को अंतस से आत्मीय बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि अब देर नहीं होनी चाहिए अतिशीघ्र छप कर हमारे और आप सबके बीच यह पुस्तक आनी चाहिए

 

लेखक परिचय

 

जन्म दिवस 10 जून (जबलपुर) पिता का नाम स्वर्गीय श्री बालमुकुन्द शुक्ला माता का नाम स्वर्गीय कृष्णा देवी शुक्ला पति का नाम श्री प्रदीप पाठक बच्चों के नाम वेद प्रकाश पाठक (ए आई डवलपर), शिवानी पाठक (ग्राफिक डिजाइनर) (डॉ. अरूणा पाठक आभा) शिक्षा एम ए. एल एल बी., मास्टर ऑफ सोशल वर्क, MSW. पीएचडी. हिन्दी रामचरितमानस में रस निरूपण । व्यवसाय पूर्व प्राचार्य महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज, संबद्ध अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा। साझा संकलन में सहभागिता - सुबह जरूर आएगी, कोरोना से जंग, राम गाथा, नारी तेरे कितने रूप, सोमालोब पुष्प, सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता, मोटिवेशनल स्पीकर, समाज सेवा, मंच संचालिका ऑफलाइन और ऑनलाइन कार्यक्रम में भी सहभागिता। रसमंजरी साहित्य सृजन एडमिन विधिक फाउंडेशन रीवा। आने वाली कृति - संस्मरण, जीवने के रंग, कविता संकलन - अनुभूति । साहित्यिक पुरस्कार अटल सम्मान लखनऊ, साहित्य गौरव सम्मान बंगलुरु, कलश कारवां सम्मान बंगलुरु, साहित्य गौरव सम्मान, वर्तिका राष्ट्रीय साहित्यिक मंच गोरखपुर, डॉ. सत्या होप टॉक द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अनुज्ञा सत्यनारी शक्ति सम्मान, बनारस हिन्दू उत्सव समिति धर्म परिवार का विशेष सम्मान, रीवा वास साहित्य सम्मान, रीवा शिंवाश सरल काव्य फाऊंडेशन भोपाल से सम्मानित साहित्य साधना मंच सीहोर सरस्वती सारथी सम्मान 2024, पोएट्री विद मोहिनी लखनऊ, अनुराधा प्रकाशन दिल्ली का साहित्य गौरव सम्मान। फिजी देश में साहित्यिक शोध संस्था मुंबई द्वारा रामलीलामंचन कौशल्या की भूमिका निभाने में मंच संचालन। मुंबई में सेंट जेवियर कॉलेज में सेमिनार अध्यक्ष और मुख्य अतिथि के रूप में सम्मान।

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