लेखक परिचय
आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री प्रतिभा एवं मानवता के अनुपम संगम हैं। अल्पायु में ही आपने " अष्टाध्यायी सूत्र एवं धातुपाठ को कंठस्थ कर लिया। तदनन्तर व्याकरण की एम.ए. परीक्षा में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त कर एक कीर्तिमान स्थापित किया। मनहरण कथा वाचक एवं ओजस्वी वक्ता के साथ-साथ आप मौलिक रचनाकार भी है। "सरस भजन" भजनांजली के बाद भजनों की आपकी द्वितीय पुस्तक है। गुवाहटी में "पुरोहित-प्रशिक्षण शिविर" को सफलता पूर्वक सम्पन्न करके आपने एक माह में पच्चास विद्यार्थियां को पुरोहित बनाया। "शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, रायपुर" में सहायक प्राध्यापक के रूप में अध्यापन कार्य करके आपने अनेक विद्यार्थियों को संस्कृत-व्याकरण सिखाया। आचार्य श्री की वाणी में माधुर्य, प्रसाद एवं ओज तीनों ही गुणों का समावेश है। देश विदेश में आपकी विद्वत्ता की चर्चा हो रही है। अनेकों लोग आचार्य जी के प्रवचनों से अपना जीवन सफल एवं धन्य बना रहे हैं। आइये आप भी आचार्य प्रवर के अनुभवों, प्रवचनों एवं गहन ज्ञान से लाभ उठाइये।
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