पुस्तक परिचय
आधुनिक युग के खंडकाव्य की सबसे उल्लेखनीय विशेषता उनमें अंतर्निहित सामाजिक मूल्य हैं। खंडकाव्य सामान्य तथा पौराणिक संदर्भों को लेकर लिखे जाते हैं। प्राचीन काल के खंडकाव्य में यह पौराणिकता एक विशिष्ट लीक पर चलती रही है, परंतु आधुनिक काल के खंडकाव्यों में यह सहज ही कथानक और चरित्र के धरातल पर आधुनिक संदभों से जुड़ गई है। खंडकाव्यों में कम शब्दों में व्यापक विषय की पुष्टि होती है। इसीलिए इसे कम समय में ज्यादा-से-ज्यादा लोग पढ़कर आनंद और जीवन अनुभव प्राप्त करते हैं। मानव में उदात्त विचारों का परिष्कार होता है, जो जीवन को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होता है और सामाजिक मूल्यों को निरंतर विकसित करता है। आज के आधुनिक युग में समाज के अनेक क्षेत्रों में निरंतर और तेज्ज गति से परिवर्तन हो रहा है। विज्ञान के कारण उन्नति के कवाड़ खुलते जा रहे हैं, जिससे मानव प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है, लेकिन इसके अत्यधिक प्रभाव के कारण मानव इन यांत्रिक सुविधाओं के इतने अधीन होता जा रहा है, जिसके कारण उसकी अधोगति हो रही है। मानव का शारीरिक, मानसिक, नैतिक स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है। वह एकाकी, अकेला तथा संवेदनहीन बन रहा है। इसके परिणामस्वरूप आज वह अपने देश, राष्ट्र, समाज, परिवार यहाँ तक की अपने-आपसे भी टूटता जा रहा है। आज वह हांड़-माँस का जीवंत मनुष्य नहीं बल्कि यांत्रिक बन चुका है। इसके कारण समाज में अनेक विकृतियाँ पनपती जा रही हैं जैसे- कन्याभ्रूण हत्या, किसानों की आत्महत्या, छात्रों की आत्महत्या, नशाखोरी, खून-खराबा, आतंकवाद, आपसी मतभेद, भ्रष्टाचार, नारी शोषण आदि समस्याओं के समाधान के लिए समाज में सामाजिक मूल्यों की नितांत आवश्यकता महसूस हो रही है, जिसमें दया, माया, प्रेम, सहानुभूति, भ्रातृत्त्व-भाव, परोपकार की वृत्ति आदि बातें आती है। मानव को इन सामाजिक मूल्यों के पोषण से संवेदनशील बनाकर ही स्वस्थ समाज की निर्मिति संभव हो सकती है। इस दृष्टि से आधुनिक खंडकाव्य उपाद्येय सिद्ध हो सकते हैं। ऐसे सामाजिक मूल्य जो समाज को एकसूत्र में बांध सके तथा स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। जिससे मानव को शाश्वत आनंद की अनुभूति हो सकती है। ऐसे सामाजिक मूल्य जो समाज को विकसित तथा स्वस्थ बनाने के लिए सहायक हो सकते हैं। इसके लिए आधुनिक खंडकाव्य उपाद्येय सिद्ध हो सकते हैं।
प्राक्कथन
आधुनिक खंडकाव्यों का अलग-सा महत्त्व है। गागर में सागर भरने की क्षमता खंडकाव्य में होती है। आधुनिक युग के खंडकाव्य की सबसे उल्लेखनीय विशेषता उनमें अंतर्निहित सामाजिक मूल्य हैं। खंडकाव्य सामान्य तथा पौराणिक संदर्भों को लेकर लिखे जाते हैं। प्राचीन काल के खंडकाव्य में यह पौराणिकता एक विशिष्ट लीक पर चलती रही है, परंतु आधुनिक काल के खंडकाव्यों में यह सहज ही कथानक और चरित्र के धरातल पर आधुनिक संदभों से जुड़ गई है। खंडकाव्यों में कम शब्दों में व्यापक विषय की पुष्टि होती है। इसीलिए इसे कम समय में ज्यादा-से-ज्यादा लोग पढ़कर आनंद और जीवन अनुभव प्राप्त करते हैं। मानव में उदात्त विचारों का परिष्कार होता है। जो जीवन को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होता है और सामाजिक मूल्यों को निरंतर विकसित करता है। आज के आधुनिक युग में समाज के अनेक क्षेत्रों में निरंतर और तेज गति से परिवर्तन हो रहा है। विज्ञान के कारण उन्नति के कवाड़ खुलते जा रहे हैं जिससे मानव प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है, लेकिन इसके अत्यधिक प्रभाव के कारण मानव इन यांत्रिक सुविधाओं के इतने अधीन होता जा रहा है जिसके कारण उसकी अधोगति हो रही है। मानव का शारीरिक, मानसिक, नैतिक स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है। वह एकाकी, अकेला तथा संवेदनहीन बन रहा है, इसके परिणामस्वरूप आज वह अपने देश, राष्ट्र, समाज, परिवार यहाँ तक की अपने-आपसे भी टूटता जा रहा है। आज वह हांड़-मांस का जीवंत मनुष्य नहीं बल्कि यांत्रिक बन चुका है।
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