पुस्तक के विषय में
योगवासिष्ठ अथवा वासिष्ठ महारामायण संस्कृत भाषा में वेदान्त पर लिखा गया सर्वोत्कृष्ट कोटि का ग्रन्थ है | यह विशाल ग्रन्थ संस्कृत साहित्य का अद्वितीय ग्रन्थ है | महान सन्त वसिष्ट ने अपने शिष्य श्री राम जो रावणजयी है और रामायण महाकाव्य के नायक है को वेदान्त के सिद्धांतो कि शिक्षा दी | उन्होंने उन सिद्धांतो के स्पष्टीकरण के लिया सुन्दर एवं रोचक कथाये कहीं | यह ग्रन्थ सन्त वाल्मीकि द्वारा भाषाबद्ध किया गया है | यह वेदान्त पर लिखे गए सभी ग्रन्थों का चूड़ामणि है | यह सर्वश्रेष्ठ कृति है | इसका अध्ययन मनुष्य को दिव्य वैभव एवं आनन्द कि उच्चावस्था तक पहुँचा देता है | यह ज्ञान का भण्डार है | जो आत्म चिंतन अथवा ब्रह्म अभ्यास अथवा वेदान्तिक ध्यान का अभ्यास करते है वे इस अदभुत ग्रन्थ में अमूल्य निधि पायेंगे | जो मनुष्य एकाग्र चित्त हो कर एवं अत्यधिक रुचिपूर्वक इसका अध्ययन करता है वह निश्चित ही आत्मज्ञान प्राप्त करेगा | साधना से सम्बंधित व्यवहारिक निर्देश अद्वितीय है | अत्यधिक सांसारिक मनुष्य भी वैराग्यवान बनेगा और मन की शान्ति, उपशम और सान्त्वना प्राप्त करेगा |
योगवासिष्ठ के अनुसार मोक्ष आत्मज्ञान द्वारा ब्रह्मानन्द की प्राप्ति है | यह जन्म व् मृत्यु से मुक्ति है | यह वह निर्मल और अविनाशी ब्रह्म पद है जहाँ न तो संकल्प है और न वासनाएँ | मन यह शान्ति प्राप्त कर लेता है | मोक्ष के अनन्त आनन्द के समक्ष संसार के समस्त सुख मात्र एक बूँद है |
आप सभी योगवासिष्ठमृत का पण करे | आप सभी आत्मज्ञान रूपी मधु का आस्वादन करे | आप सभी इसी जन्म में जीवन्मुक्त बन जाये | आपको सन्त वाल्मीकि एवं अन्य ब्रह्मविद्या गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त हो | आप सभी ब्रह्मानन्द रास का आनन्द प्राप्त करे |
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