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अदम्य साहस का दस्तावेज़: A Testament to Indomitable Courage

HK$182
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: Akash Book Distributors, Delhi
Author Dhan Singh Mehta (Anjan)
Language: Hindi
Pages: 147
Cover: HARDCOVER
9.0x5.5 Inch
Weight 320 gm
Edition: 2023
ISBN: 9788192413327
HCK506
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Book Description
भूमिका

"अदम्य साहस का दस्तावेज़, कोरोना काल की विभीषिका का मार्मिक अभिलेख है।" काव्य और कहानी के हस्ताक्षर, उत्तराखण्ड की संस्कृति के संवेदनशील चिंतक, और रचनाकार श्री धन सिंह मेहता 'अनजान' की अनेक साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके द्वारा रचित कविताओं की विशेषता और विविधता से मैं प्रभावित रहा हूँ। इसीलिए मैंने उनके काव्य-संग्रह 'संवाद' की कुछ कविताओं का सन् 2015 में नाट्य मंचन किया। अभी हाल ही मैंने 8 मई, 2023 को अनजान जी द्वारा रचित एकल काव्य पुस्तिका 'मैं चिनार बोल रहा हूँ का नाट्य-निर्देशन और मंचन किया है। इस दीर्घ एकल-कविता में अनजान जी ने चिनार वृक्ष का मानवीकरण कर कश्मीर समस्या का व्यापक, मार्मिक अनुभव कराया है। इससे पूर्व में मैंने सन् 2005 में अनजान जी द्वारा रचित कुमाउँनी लोक नाटक 'जूँ हो' का निर्देशन और प्रस्तुतीकरण भी किया। अनजान जी हिन्दी और कुमाउँनी भाषा में सामाजिक मानवीय सरोकारों की चिन्ता और आवाहन करने वाली अनेक पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। ये पुस्तकें लोक सम्वेदना, राष्ट्रीय चेतना और नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए जन-जन को अपने कालखण्ड का दर्पण दिखाती हैं। यह सभी कृतियाँ विशेष और बेजोड़ हैं। अनजान जी ने लीक से हटकर एक और बेजोड़ पुस्तक की रचना की है। यह नवीनतम पुस्तक न कविता है, न कहानी, न नाटक है और न ही उनके द्वारा सम्पादित 'आ से आलेख' जैसा विमर्श है। भिन्न-भिन्न देश, काल व परिस्थितियों की वेदना तथा संघर्षों को अपनी सृजनशीलता और कल्पनाशीलता में समन्वित कर जन हृदय को उद्वेलित कर देने वाली कविता, कहानी के सुघड़ रचनाकार अनजान जी की इस पुस्तक का नाम है 'अदम्य साहस का दस्तावेज़' जो कोरोना काल लेखक ने पुस्तक में जो हार्दिक उद्‌गार व्यक्त किये हैं उनको पढ़कर ही मन और मस्तिष्क विस्मित हो जाता है। मैं, अनजान जी के साहित्य कर्म से भली-भाँति परिचित रहा हूँ। इन्होंने अपनी लगभग हर कविता, कहानी में उसकी विषयवस्तु से सम्बन्धित देश, काल और परिस्थितियों के बीच जी रहे समाज के संघर्षों और वृत्तियों का ऐसा जीवन्त चित्रण प्रस्तुत किया है मानो रचनाकार स्वयं उस समाज की अभिन्न इकाई हो तथा उसने समाज के संघर्षों में कन्धे से कन्धा मिलाया हो। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने अपने पिछले रचनाकर्म से बहुत आगे बढ़कर काम किया है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी के जन्म, प्रसार, संघर्ष और परिणाम का एक शोध अध्येता के रूप में अध्ययन किया है। ऐसा भी प्रतीत होता है कि पुस्तक का लेखक पूरे कोरोना काल में सतत, सजग, सम्वेदनशील, सरोकारधर्मी, मीडियाकर्मी के रूप में ग्राउण्ड जीरो पर उपस्थित है। कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझते प्रदेशवासियों की वेदना लेखक के हृदय की धड़कन के रूप में सुनाई पड़ती है। इस पुस्तक में लेखक ने अलग-अलग आयामों से कोरोना काल का ऐसा मार्मिक अभिलेख निर्मित किया है जो भविष्य के मानव समाज की जिजीविषा को शक्ति प्रदान करता करेगा और आपातकाल में सेवा-कर्म के लिए सम्वेदना के द्वार खटखटाता रहेगा। उल्लेखनीय बात है कि लेखक कोरोना वायरस की विभीषिका के प्रति एक संवेदनशील रचनाकार मात्र नहीं बना रहा, एक संवेदनशील जागरूक मीडियाकर्मी जैसा नहीं बना रहा, उसने कोरोना के दौर में अपनी भौतिक सामर्थ्य से कहीं आगे जाकर मनसा वाचा-कर्मणा बेजोड़ कोरोना वीर जैसा कार्य किया है।

लेखक परिचय

धन सिंह मेहता 'अनजान' जन्मतिथि पाँच जून उन्नीस सौ साठ (05-06-1960) शिक्षा : एम०ए० (इतिहास), कुमायूँ विश्वविद्यालय, नैनीताल। प्रकाशित कृतियाँ कविता-संग्रह-महकी माटी भारत की (राष्ट्रीय बाल काव्य संग्रह), संवाद (राष्ट्रीय काव्य संग्रह), कविता जानी अनजानी (राष्ट्रीय कविता संग्रह), "धात" (कुमाउँनी कविता संग्रह), "मैं चिनार बोल रहा हूँ (एकल कविता), कहानी-संग्रहः भरोसे के लोग सम्पादन-'आ से आलेख (हिन्दी बाल साहित्य आलेख), उत्तराखण्ड के गांधी 'इन्द्रमणि बडोनी एक' 'आयाम अनेक' पत्रिका का सम्पादन पुरस्कार एवं सम्मानः- विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, साहित्यिक मंचों, अकादमियों द्वारा समय समय पर सम्मानित परस्कृत

पुस्तक परिचय

उल्लेखनीय बात है कि लेखक कोरोना वायरस की विभीषिका के प्रति एक संवेदनशील रचनाकार मात्र नहीं बना रहा, एक संवेदनशील जागरूक मीडियाकर्मी जैसा नहीं बना रहा, उसने कोरोना के दौर में अपनी भौतिक सामर्थ्य से कहीं आगे जाकर मनसा-वाचा-कर्मणा बेजोड़ कोरोना वीर जैसा कार्य किया है। किये गये इस कार्य के महत्व का मापन सरकारी या व्यवस्थागत पैरामीटर के अन्तर्गत नहीं समा पाया है। अलग-अलग प्रकार से कोरोना के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समाज की सेवा और रक्षा करने वाले 'कोरोना वीर' के रूप में चिन्हित हुए लोगों की सूची में लेखक का नाम भले ही न दिखाई पड़ा हो लेकिन लेखक ने जो कार्य किया है वह स्तुत्य योग्य है।

हिंदी के ख्यातिलब्ध रचनाकार श्री धन सिंह मेहता 'अनजान' द्वारा विरचित 'अदम्य साहस का दस्तावेज' सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं का स्तवक है। विवेच्य कृति में कोरोना पेंडेमिक के भयावह दृश्यों का जीता जागता चित्रांकन किया गया है। आलोचकों की मान्यता है कि किसी रचनाकार की विशिष्टता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने समय-संदर्भ को कितना-जीता है और उसे अपनी लेखनी के माध्यम से रूपाकार प्रदान करता है इस दृष्टि से मेहता जी की यह कृति अत्यंत सामयिक है। उत्तर प्रदेश सरकार और यहाँ की जनता ने किस प्रकार इस आपदा का सामना किया और उसे अपनी जिजीविषा से पराजित किया, इसके अनेक मार्मिक और प्रेरक संदर्भ दर्शाए गए हैं। श्री धन सिंह मेहता 'अनजान' श्रेष्ठ कवि के साथ-साथ अच्छे लेखक और संस्कृति कर्मी भी हैं, सामाजिक कार्यों में उनका संवेदनशील मानस हमेशा परिलक्षित होता है। कोरोना काल में उन्होंने जहां भौतिक रूप से लोगों की मदद करने का यथासंभव प्रयास किया वहीं मानसिक रूप से एक सचेत नागरिक के रूप में समाज की सारी पीड़ाओं और अंर्तद्वंद को अदम्य साहस का दस्तावेज़ में समेटने का प्रयास किया। इस दस्तावेज़ में कोरोना की विभीषिका और उससे लड़ाई में उत्तर प्रदेश सरकार व जनता की भूमिका का समग्र चित्रण हुआ है। दस्तावेज़, राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों के साथ-साथ प्रशासन की सक्रियता और सार्थक प्रयत्नों का उल्लेख विस्तार से करता है। यह कोरोना काल के हालातों और उनसे लड़ने वाली लड़ाई का एक प्रमाणिक दस्तावेज़ है जो हमें इंसान होने के नाते अपने दायित्वों की याद दिलाने वाली एक संग्रहणीय किताब भी है।

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