मेरे द्वारा पिछले वर्ष 2016 में भारत एवं राजस्थान के प्रायः सम्पूर्ण विश्वविद्यालयों के एम.ए हिंदी-पाठ्यक्रम पर आधारित 'भाषाविज्ञान एवं साहित्यशास्त्र (राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी, जयपुर से प्रकाशित) शीर्षक से दो पुस्तकें लिखी गई थीं, जो छात्रों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों को बेहद पसंद आई। कई छात्रों ने मुझे 'हिंदी साहित्य का इतिहास पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया। छात्र वर्ग का यह कहना था कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल, डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी, सं० डॉ० नगेन्द्र, डॉ० रामकुमार वर्मा, लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय, डॉ० बच्चन सिंह, डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी इत्यादि अनेक साहित्येतिहासकारों के हिंदी साहित्य के इतिहास पर अच्छी व श्रेष्ठ पुस्तकें हैं किन्तु इनमें से किसी भी एक-दो किताबों को पढ़कर बी. ए. एम.ए. हिन्दी-साहित्येतिहास पत्र की परीक्षा नहीं दी जा सकती है क्योंकि इन पुस्तकों में हिंदी साहित्येतिहास प्रश्नपत्रानुसार प्रवृत्तिमूलक सामग्री कम मिलती हैं। सभी किताबें हम क्रय भी नहीं कर सकते हैं। छात्रों की वाजिब माँग एवं वास्तविक समस्या को शिद्धत से महसूस करते हुए हम लेखक द्वय इस किताब के लेखन की ओर प्रवृत्त हुए। इस किताब को अधिकाधिक उपयोगी बनाने हेतु हमने राजस्थान के सम्पूर्ण विश्वविद्यालयों के बी.ए. एवं एम. ए. हिंदी-पाठ्यक्रम को ध्यान में रखा है। हिंदी साहित्य के प्रवृत्तिमूलक अभिनव इतिहास में आवश्यकतानुसार रामचंद्र शुक्ल, डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ० नगेन्द्र, डॉ० रामकुमार वर्मा, डॉ० बच्चन सिंह, डॉ० लक्ष्मीसागर वाष्र्णेय इत्यादि प्रसिद्ध साहित्येतिहासकारों के कथनों, उद्धरणों को पर्याप्त स्थान दिया गया है। साथ ही साथ, उत्तर को अधिकाधिक प्रभावशाली बनाने हेतु अनेक उदाहरणों को सम्मिलित किया गया है, जिनका अभाव प्रायः हर छात्रों की परीक्षा कॉपियों में मिलता है। यह पुस्तक छात्रों की उपयोगिता के अनुकूल बन पड़ी है अथवा नहीं इसका निर्णय छात्र, परीक्षार्थी, सुधि विद्वान् एवं आलोचक ही करेंगे।
'हिंदी-साहित्य का प्रवृत्तिमूलक अभिनव इतिहास' शीर्षक इस कृति की पूर्णता पर सर्वप्रथम मैं हार्दिक आभार पिता श्री विनय कुमार (सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव, झारखंड सचिवालय, राँची) एवं माता (स्वर्गीया (श्रीमती) वीणा देवी) के प्रति प्रकट करता हूँ। डॉ० चंद्रकिशोर पाण्डेय, डॉ० गोपाल राय, डॉ० जे० एन० चौबे, डॉ० रामवचन राय, डॉ० बलराम तिवारी, डॉ० तरुण कुमार, डॉ० विभा कुमार, डॉ० बीना शर्मा, डॉ० एच.पी. गौड इत्यादि गुरुओं के निर्देशन, समुचित सहयोग, आशीर्वाद के प्रति मैं हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ। इस किताब के लेखन में जिन महान् लेखकों की किताबें सहायक सिद्ध हुई हैं, उनके प्रति हार्दिक आभार।
पत्नी श्रीमती रीना कुमारी, पुत्र शशांक शंकर के सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद। अग्रज भ्राता निर्माण शंकर, भाभी श्रीमती अर्पणा, श्री पशुपतिनाथ सिन्हा, श्रीमती दीप्ति, श्री हृषिकेश कुमार, श्रीमती रश्मि, श्री रवि शंकर, श्रीमती काजल सिन्हा एवं घर के अन्य आत्मीय जनों श्री राजीव, श्रीमती नूपुर, निशांत, अस्मिता, नमन, खुशी, अप्रतिम, अभी, अलभ्या, अनन्या, तनिशा के क्रमशः आशीर्वचनों, शुभाकांक्षाओं के लिए धन्यवाद।
डॉ० लीला मोदी, डॉ० शिवकुमार मिश्रा, डॉ० विवेक कुमार मिश्र, श्रीमती अर्चना अखौरी, श्रीमती रश्मि वर्मा, श्रीमती गीता, डॉ० शिवचंद्र, डॉ. सुनीता गुप्ता ने हमें सदैव प्रोत्साहित किया। इनके प्रति हार्दिक धन्यवाद।
डॉ. सूरज 'जिद्दी' (ससुर), श्रीमती रेणु शर्मा (सास), श्री रितुराज शर्मा (पति), निहार राज (पुत्र), श्री महेश कुमार (पिता), श्रीमती इंद्रा देवी (माता), श्री सुमित साध (भ्राता), त्रिलोक चंद बैरागी (मामी ससुर) एवं श्री बिहारीलाल बैरागी (सुनेल) जी के महनीय सहयोग के लिए हम आभारी तथा इनके आशीर्वचन, आत्मिक सम्बल एवं प्रेरणा के प्रति कृतज्ञ एवं श्रद्धावनत हैं।
कम्प्यूटर-टंकण के लिए मनीष पारीक, दीपक सिंह राजावत को धन्यवाद। अंत में, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ अनिता नायर एवं अकादमी-परिवार के डॉ० पूनम गुप्ता, श्री सुनील दत्त माथुर, श्री तेजसिंह राठौड, श्री सत्यनारायण जी एवं अन्य के प्रति हार्दिक आभार जिनके सौजन्य से यह पुस्तक प्रकाशित हो रही है।
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