नवरंग जायसवाल बहुचर्चित कहानी 'तुम अपना बयान जारी रखो' के साथ रचनात्मक साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश करनेवाले श्री नवरंग जायसवाल का कथा-जगत बहुआयामी, बहुरूप है, जो अनेक रंगों, विभिन्न स्वादों और विविध गंधों से भरपूर है। विषय-क्षेत्र की व्यापकता के साथ भाव-भूमि का भी विस्तार है। वादों के विवादों से बाहर सार्थक विचारों की सशक्त, पर अव्यक्त, अभिव्यक्ति है। एक ओर पुरुषों द्वारा सतत् प्रताड़ित नारी का विह्नल आक्रोश है, तो दूसरी ओर गांव की खिलंदरी किशोरियों की कमनीय क्रीड़ा। इधर 'व्यक्तिनिष्ठ भोगपरायण संस्कृति का विस्फोट' है, तो उधर 'प्रेमकलश' से निसृत स्नेह की धारा। कहीं कामुकता का समारोह है, तो कहीं मातृत्व के 'अजस्र पयोधर' का महोत्सव । अनेक अविस्मरणीय घटनाओं, मार्मिक प्रसंगों आदि से भरा है यह कथा-जगत । कहानीकार का यथार्थ का चित्रण अत्यन्त प्रभावशाली और कलात्मक है, जो पारंपरिक सोच पर प्रहार कर पाठक को नई दिशा में सोचने को विवश करता है और वैचारिक बदलाव का बीजारोपण करता है। अनेक सामयिक विषयों का विवेचन अनायास ही हुआ है इनकी कहानियों में। शिल्प और शैली में नवीनता है। भाषा प्रांजल, प्रवहमान और विषयानुकूल है। सूक्ष्म व्यंग की एक धारा भी सतत् प्रवाहित है।
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