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वैश्विक परिदृश्य में गांधी: Vaishvik Paridrishya Mein Gandhi

$38
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: Royal Publications, Jodhpur
Author Edited By Ummed Singh Inda
Language: HINDI AND ENGLISH
Pages: 400
Cover: HARDCOVER
9.0x6.0 Inch
Weight 650 gm
Edition: 2020
ISBN: 9788194477549
HCF114
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Book Description

प्राक्कथन

     

 

भारतीय तपोनिष्ठ पीढ़ी के पुरोधा, पृथ्वी पर पार्थिव और सच्चे और खरे अर्थों में लाठी और लंगोठी के किरदार, साबरमती के संत, स्वदेशी और स्वावलंबन के उपासक, सत्य और अहिंसा के पुजारी, विश्व-मानवता के मसीहा, राष्ट्रीय आंदोलन के सूत्रधार, सुकरात, ईसा मसीह और बुद्ध और विवेकानंद जैसी विभूतियों के समतुल्य विश्व में ज्ञात और ख्यात संतों में राजनीतिज्ञ (Stateman) और राजनीतिज्ञों (Stateman) में संत महात्मा गांधी ने जो कुछ कहा और किया उसकी सच्चाई यह उनकी मनसा, वाचा, कामना में कोई भेद नहीं। अपने जीवन को संदेश मानने वाले गांधी, वे लोकपुरुष थे, जिन्होंने 'कर्मविहीन विचार' को बौद्धिक विलास का घर कहा। गांधीजी की गारन्टी यह कि उन्होंने जो कहा वह किया भी। कथनी और करनी के बेजोड़ बादशाह। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ (2019) में महात्मा गांधी विषयक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का जन्म भारत में हुआ था, लेकिन वे केवल भारत के ही नहीं थे। गांधी वैश्विक विचारक थे, उनके विचार विश्व पर भारी प्रभाव रखते हैं। वैश्विक स्तर पर गांधी चिंतन की सबसे बड़ी स्वीकारोक्ति संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा '2 अक्टूबर गांधी जयंती को 'अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस' मनाया जाना है। दुनिया के दिग्गज नेतृत्वों ने गांधीजी को 'मानवीयता का मसीहा' के रूप में स्वीकारा है। विश्व वद्य महात्मा गांधी का उदात्त चिंतन मौजूदा वैश्विक समस्याओं का एकमात्र सुविचारित समाधान है। डी.आर.जे. कन्या महाविद्यालय, बालोतरा के प्राचार्य श्री अर्जुनराम पूनिया और महाविद्यालय-परिवार के अथक प्रयासों से दो दिवसीय सफल राष्ट्रीय संगोष्ठी 'वैश्विक परिदृश्य में गांधी चिंतन' 30-31 जनवरी 2020 को महाविद्यालय परिसर में आयोजित हुई। जिसमें में राजस्थान सहित बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब तथा झारखंड के विद्वानों तथा शोधार्थियों ने भाग लिया। संपादक, सहभागिता में सारथी रहे सभी सहभागियों का तहेदिल से आभार व्यक्त करता है। साथ ही उन सभी विद्वानों का आभार व्यक्त करता है जिन्होंन आलेख प्रेरित कर अनुग्रहित किया। प्राचार्य, संपादक तथा महाविद्यालय परिवार परम सम्मानीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री भारत सरकार श्री कैलाश जी चौधरी तथा स्थानीय ऊर्जावान विधायक (पचपदरा) श्री मदन जी प्रजापत का आभार व्यक्त करता है कि आपने शुभकामना संदेश भेजकर उत्साहवर्धन किया। प्रसिद्ध साहित्यकार और 'गांधीजी की आत्मकथा' का राजस्थानी में अनुवादकर्त्ता लब्धप्रतिष्ठित विद्वान परम सम्मानीय डॉ. आईदानसिंह भाटी (आईजी) ने 'वैश्विक परिदृश्य में गांधी एक सार्थक प्रयास' विषयक सारगर्भित एवं क्रांतिचेतनामूलक भूमिका लिखकर अपकृत किया है। डी.आर.जे. कन्या पी.जी. महाविद्यालय तहेदिल से आदरणीय 'आईजी' का आभार व्यक्त करता है। जैसाकि भाटी साहब ने लिखा है कि गांधीजी को नमक-आंदोलन के प्रेरणा इसी मारवाड़ की भूमि (पचपदरा) से मिली। किसान आंदोलन की प्रेरणा 'बिजौलिया' से मिली। गांधी-युग के आंदोलन के लिए घनश्यामदास बिड़ला से विपुल सहायता की। 30 जनवरी, 1948 को ब्रह्मलीन होने के बाद गांधीजी की अस्थियां तीर्थराज पुष्कर में प्रभावित की गई। हम 'नमः पुरस्त' कहते आये हैं, लेकिन गांधीजी के इस दुनिया से चले जाने के बाद भी 'नमः पुष्ठतः' कहते हुए नतमस्तक हैं।

 

लेखक परिचय

 

सम्प्रति : डॉ. उम्मेदसिंह इन्दा, सह-आचार्य राजनीति विज्ञान, डी.आर.जे. कन्या महाविद्यालय, बालोतरा, बाड़मेर (राज.) शिक्षा : एम.फिल., पीएच.डी., नेट, स्लेट शोध अनुभव : यूजी/पीजी-25 वर्ष प्रकाशित ग्रंथ : भारत में राज्यों की राजनीति राजस्थान का स्वाधीनता संघर्ष, राज्यशासन एवं राजनीति भारतीय लोकतंत्र : दशा एवं दिशा भारतीय राजनीति में आचार संहिता संसदीय व्यवस्था में परिवर्तन की दिशा इन्दा राजवंश का इतिहास भारत-चीन संबंध : एक मूल्यांकन जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति भारतीय दलीय व्यवस्था एवं विचारधारा • भारतीय परमाणु नीति : वर्तमान चुनौतियां • वैश्विक परिदृश्य में गांधी संगोष्ठी, कांफ्रेंस, कार्यशाला सहभागिता : 1. अन्तरराष्ट्रीय सेमीनार (03), 2. राष्ट्रीय सेमीनार (105), 3. कांफ्रेंस (05), 4. वर्कशॉप (35), 5. रिसोर्स पर्सन (10) शोध-पत्रिका सदस्यता: 1. लोकतंत्र समीक्षा, 2. विधानयनी, 3. विधानबोधनी, 4. विधानमाला, 5. शोध-संचयन, 6. डेमोक्रेसी एंड उपलपमेन्ट, 7. योजना, 8. भारतीय राजनीति विज्ञान शोध-पत्रिका

 

पुस्तक परिचय

 

प्रस्तुत पुस्तक 'वैश्विक परिदृश्य में गांधी', महात्मा गांधी के 150 वें जयन्ती वर्ष में उनके वैचारिक वैश्विक चिन्तन-मनन और स्वीकारोयुक्ति से संबंधित है। डी.आर.जे. कन्या महाविद्यालय, बालोतरा (बाड़मेर) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'वैश्विक परिदृश्य में गांधी चिन्तन' में विज्ञ-विद्वानों और शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए शोध-पत्रों का संपादित संकलन है। वैश्विक अक्ष पर गांधी चिन्तन मौजूदा दुनिया में एक सर्वाधिक लोकप्रिय चिन्तन है। जहां दुनिया में 'अकेलापन' बढ़ रहा है वहां गांधी चिन्तन समरसता, सहधर्मिता और समभाव का संदेश दे रहा है। भारतीय संस्कृति विश्व मानुष, विश्व कुटुम्बकम् और 'यंत्र विश्वं भावी एकनीड़म्' की हिमायती रही है, विश्ववंद्य गांधी इसी भावना के पुरोधा चिंतक और चितेरे हैं। कथनी और करनी में एकात्मकता, धर्म के प्रति भावनात्मकता और नैतिकता के प्रबल पक्षकार महात्मा गांधी का वैचारिक फलक बहुत व्यापक क्योंकि उनका दिल और दिल का दायरा दोनों ही बहुत विशाल थे। दुनिया के लगभग सभी देशों ने और यहां तक की संसार की सबसे बड़ी पंचायत संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने भी 'अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' 2 अक्टूबर को घोषित कर 'वैचारिक गांधी' को सम्मान दिया है। गांधी की राह ही दुनिया की बढ़ती रार (झगड़ों) को रोक पायेगी। संसार के लिए एक आदर्श शिक्षक हैं महात्मा गांधी। मैं अकेला ही चला था, जानिवे मंजिल मगर, लोग आते ही गये और कारवां बनता गया।

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