अनुवादक नागपुर विश्वविद्यालय का 1991 में एम.ए. का गोल्ड मेडलिस्ट रहा है। उन्होंने वहीं से अपना ए.फिल. किया और पीएच. डी. प्रबंध "धर्मों में असमानता और धर्मांतर की आवश्यकता" पर प्रस्तुत कर उन्हें 1994 में डाक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया था। वर्तमान में सी.डी. नाईक अपनी जन्मभूमि नागपुर और कार्यभूमि इंदौर में अपने अध्ययन और लेखन कार्य में अविरत रूप से लगे हुए हैं।
सन 1938 में नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा व्याख्याता श्री आहिताग्नि शंकर रामचंद्र राजवाडे, बी.ए. के छः व्याख्यान कै. रा. ब. बापूरावदादा किनखेडे, नागपुर की स्मृति के ख्याख्यानमाला के अंतर्गत "वैदिकधर्म और षड्दर्शन विषय पर कराए गए थे। इसका प्रकाशन नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा ही कराया गया था और उसका मुद्रण श. ब. सहस्त्रबुद्धे. बी.ए.. 689 सदाशिव पेठए बालोद्यान प्रेस, पुणे नं. 2 में हुआ था। अपने पास उपलब्ध प्रति को अनुवादक ने पढ़ा और उनके लगा कि ज्ञान के लिए इस विषय का और व्याख्याता के दृष्टिकोण का भी परिचय जरूर होना चाहिए। क्योंकि बहुसंख्यक हिन्दू भी इस ज्ञान से अवगत नहीं है। गैर हिन्दुओं की बात ही क्या? मूल में ये व्याख्यान और यह पुस्तक मराठी भाषा में होने से हिन्दीभाषियों के पहुँच के बाहर रही है। अतः उसका हिन्दीकरण करने से अब यह गैरमराठी वालों के लाभार्थ भी वह उपयुक्त होगी। इन्हीं मंतव्य से लेखक ने यह आपके सम्मुख प्रस्तुत करने का एक अल्प प्रयास किया है। आप सुधी पाठक ही यह प्रयास कितना आपके काम आया का निर्णय ले सकते हैं। आशा है. आप निराश नहीं होगे।
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