लेखक परिचय
शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला भाषा के एक बड़े साहित्यकार थे। उनका जन्म बंगाल के हुगली जिले के छोटे से गाँव देवानन्दपुर में 15 सितम्बर सन् 1876 ई० में हुआ था। शरत्चन्द्र जमीन से जुड़े कथाकार थे। उनकी मृत्यु सन् 1936 ई० में हुई थी। शरत्चन्द्र के निधन को आज 60 से भी अधिक वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद उनकी रचनाओं के अनुवाद अधिकांश भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय की चर्चित रचनाएँ - चरित्रहीन, विराजबहू, दत्ता, शुभदा, देना पावना, पथ के दावेदार, श्रीकांत, देवदास, देहाती समाज, गृहदाह. शेष प्रश्न, बड़ी दीदी, शती, चन्द्रनाथ तशी परिणीता आदि।
पुस्तक परिचय
बांग्ला के विख्यात कथाकार शरत्चन्द चट्टोपाध्याय की गणना भारत के ही नहीं अपितु विश्व के महान साहित्यकारों में की जाती है। वे एक ऐसे अद्वितीय कथा शिल्पी हैं, जिनका साहित्य भाषाओं की सीमाएँ लाँघकर उनके अपने ही जीवनकाल में अखिल भारत की हदों को छू गया। उन्हें जितनी ख्याति बांग्ला में मिली, उतनी ही हिन्दी, गुजराती, मराठी, तथा अन्य भाषाओं में भी मिली। शरत् की रचनाओं और पात्रों की विशिष्ठता के कारण ही उनके साहित्य में करोडों पाठकों की अपार रुचि उत्पन्न हो सकी । शरत् ने अपने साहित्य में तात्कालीन सामाजिक मूल्यों के आगे प्रश्न चिह्नन लगाया। उन्होंने तथाकथित सदाचार के प्रचलित मानदंडों, विधि-विधानों तथा अन्य विसंगतियों पर भरपूर चोट की। शरत् मूलतः नारी संवेदना के लेखक हैं। दलित, अपमानित, पतित भारतीय नारी के साथ शरत् ने व्यावहारिक हमदर्दी का परिचय दिया है। उनके उपन्यासों पर आधारित सीरियल भी चुके हैं।
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