BooksHindiशक...

शक्ति कुन्ज: Shakti Kunj

शक्ति कुन्ज: Shakti Kunj
Description Read Full Description
ग्रन्थ परिचय   शक्ति कुञ्ज भक्ति भावना का त्रिभुज मोहन, भव्य भुवन है जो परमेश्वरी पराम्बा, जगतजननी, जगदम्बा के परम पदपंकज के प्रसादामृत से परिपूरित प्रेरणा प्रदायक प्रभूर्त पथ एव...

ग्रन्थ परिचय

 

शक्ति कुञ्ज भक्ति भावना का त्रिभुज मोहन, भव्य भुवन है जो परमेश्वरी पराम्बा, जगतजननी, जगदम्बा के परम पदपंकज के प्रसादामृत से परिपूरित प्रेरणा प्रदायक प्रभूर्त पथ एवं प्राञ्जल प्राशीष है। शक्ति कुञ्ज भाव और भक्ति साधना और शक्ति, प्लावित प्रथम, मध्यम और उत्त्तर चरित्र से सुभोभित भव्य त्रिभुज मोहन दिव्य सौन्दर्य से प्रार्थना से सुसज्जित सुगठित संगठित सुनियोजित, सुरुचिपूर्ण, सारस्वत, शाश्वत साधना का स्वर्णिम शक्ति सेतु है जो तेरह मणिमण्डित स्तम्भों पर आधारित सात सौ रत्नजटिल स्वर्ण सोपानों से निर्मित है, जिसमें आदिशक्ति, महाशक्ति, पराम्बा, परमेश्वरी, जगदीश्वरी, जगतजननी, के परम पावन पुनीत पवित्र प्राञ्जल चरित्र का सघन संज्ञान तथा विपुल अनुक्रम्पा प्राप्ति के निमित्त संपादित सुनियोजित किये जाने वाले अनुपम प्रायोगिक व्यावहारिक नैमित्तिक अनुष्ठान के सविधि आयोजन के विशिष्ट प्रावधान का सम्यक् विश्लेषण विवेचन का आख्यान व्याख्यान विधि विधान सहित व्यवस्थित आविष्ठित है।

शक्ति कुञ्ज 16 अध्यायों में विवेचन एवं व्याख्यायित है जिसे मोक्ष प्रदायिनी श्री दुर्गासप्तशती के प्रसाद प्रबन्ध की विस्तृत विवेचना के साथ साथ नैमित्तिक साधनाओं के विभिन्न पक्षों पर केन्द्रित किया गया है। श्री दुर्गासप्तशती भू लोकवासियों की मनोकामनाओं एवं सम्यक् अभिलाषाओं की सम्पूर्ति एवं संसिद्धि हेतु माता जगदम्बा का अनुपम वरदान है, जो मानव समाज को प्रसादमृत रूप में उपलब्ध है।

 

लेखक परिचय

 

श्रीमती मृदुला त्रिवेदी तथा श्री टी.पी. त्रिवेदी देश के प्रथम पंक्ति के ज्योतिर्विद हैं । इन्होंने ज्योतिषशास्त्र पर केन्द्रित, हिन्दी एवं अंग्रेजी में 45 वृहद् शोध प्रबंधों की संरचना की है, जिनकी विश्वव्यापी लोकप्रियता, सारगर्भिता, सार्वभौमिकता बार बार, हर बार प्रतिष्ठित, प्रशंसित और चाचेत हुइ है । लेखकद्वय के देश की यशस्वी पत्र पत्रिकाओं में 450 से अधिक शोधपरक लेख प्रकाशित हो चुके हैं । आप द्वारा लिखित सभी ग्रंथ देश के शिखरस्थ, यशस्वी और गरिमायुक्त संस्थाओं द्वारा प्रकाशित हैं और सम्बन्धित विश्वविद्यालयों में ज्योतिष शास्त्र के पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित किये गये हैं । आप ज्योतिष ज्ञान के अथाह सागर के जटिल गर्भ में प्रतिष्ठित अनेक अनमोल रत्न अन्वेषित कर, उन्हें वर्तमान मानवीय संदर्भो के अनुरूप संस्कारित करने के पश्चात् जिज्ञासु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करते रहते हैं।

वर्ष 1987 में वर्ल्ड डेवलपमेन्ट पार्लियामेन्ट द्वारा इन्हें डॉक्टर ऑफ एस्ट्रोलॉजी की उपाधि से अलंकृत किया गया । इसी वर्ष इन्हें सर्वश्रेष्ठ लेखक का भी पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 2008 में प्लेनेट्स एण्ड फोरकास्ट द्वारा देश के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्विद तथा सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरस्कार एवं ज्योतिष महर्षि की उपाधि के साथ साथ कान्ति बनर्जी सम्मान आदि भी प्राप्त हुए हैं।

वर्ष 2009 में इन्हें महाकवि गोपालदास नीरज फाउण्डेशन ट्रस्ट द्वारा देश के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी पुरस्कार से अलंकृत किया गया ।

विभिन्न ज्योतिष संस्थानों द्वारा इन्हें ज्योतिष ब्रह्मर्षि , ज्योतिष पाराशर , ज्योतिष मार्तण्ड , ज्योतिष वेदव्यास आदि मानक उपाधियों से अलंकृत किया गया है । हिन्दुस्तान टाइम्स में नियमित रूप से 2 वर्ष तक ज्योतिष विज्ञान के विभिन्न पक्षों पर लेख लिखने वाले श्री त्रिवेदी वस्तुत विज्ञान स्नातक होने के साथ साथ सिविल इंजीनियर हैं, जो ज्योतिष सम्मेलनों में अपने प्रखर, ज्ञानवर्धक एवं स्पष्ट व्याख्यान हेतु प्रसिद्ध हैं।

 

पुरोवाक्

 

शक्ति कुञ्ज का प्रकाशन मेसर्स अल्फा पब्लिकेशन्स, दिल्ली द्वारा सन् 2006 में किया गया था । लगभग डेढ़ वर्ष के भीतर प्रथम संस्करण के समय प्रकाशित सभी प्रतियाँ समाप्त हो गई । शक्ति कुञ्ज में अप्रत्याशित त्रुटियां और कमियां एवं अनेक स्थलों पर विषय की पुनरावृत्ति देखकर हमारा हृदय विलाप कर उठा । प्रकाशन और प्रूफरीडिंग की कमियां उजागर होने के उपरान्त शक्ति कुञ्ज के आन्तरिक स्वरूप और सामग्री ने हमें इतना क्षुब्ध किया कि हम इस लोकप्रिय कृति के द्वितीय संस्करण को और अधिक परिमार्जित स्वरूप में प्रकाशित करने के लिए अत्यन्त व्यग्र हो गये । पिछले दो वर्षो में शक्ति से सम्बन्धित कतिपय अति महत्वपूर्ण उपयोगी, सारगर्भित, सारभौमिक, सर्वजनहितार्थ सामग्री, श्रेष्ठ आचार्यो एवं कतिपय विद्वत्जनों द्वारा हमें जिस प्रकार से उपलब्ध हुई, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है । इतनी सामग्री शक्ति कुञ्ज में समायोजित करना सम्भव एवं समुचित नहीं प्रतीत हुआ, इसलिए शक्ति कुञ्ज को दो पृथक् पृथक् कृतियों में विभाजित करना ही हमारी विवशता बन गयी । इन दोनों कृतियों को शक्ति कुञ्ज तथा सप्तशती संहिता शीर्षक से नामांकित किया गया है । इन दोनों ही रचनाओं में शक्ति तत्त्व से सम्बन्धित सारभूत तत्त्व तथा नैमित्तिक साधनाओं के अतिरिक्त श्री दुर्गासप्तशती में निहितार्थ रहस्यादि को उद्घाटित करने का सार्थक, सहज और सुरुचिपूर्ण प्रयास किया गया है । शक्ति कुञ्ज और सप्तशती संहिता एक दूसरे से सम्बद्ध न होकर पूर्णत पृथक् कृतियाँ हैं । शक्ति कुञ्ज के सभी अध्याओं को पूर्णत संशोधित, परिमार्जित एवं परिवर्द्धित करने के पश्चात् कृति को आद्योपान्त रूपान्तरित करके पूर्व की अपेक्षा कहीं अधिक उपयोगी, अनुकरणीय तथा सुरुचिपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

शक्ति कुञ्ज के द्वितीय परिमार्जित एवं परिवर्धित संस्करण के प्रकाशन हेतु श्री अमृत लाल जैन, जो मेसर्स अल्फा पब्लिकेशन्स के सर्वस्व हैं तथा कुशल प्रकाशन के लिए देशव्यापी ख्याति, प्रचुर प्रशंसा एवं अभिशंसा प्राप्त कर चुके हैं, का प्रोत्साहन हमारे संकल्प की प्राण शक्ति है । मेसर्स अल्फा पब्लिकेशन्स के अन्तर्गत श्री अमृत लाल जैन द्वारा शक्ति कुञ्जनायोग से वाक्य विन्यास, शब्दावली एवं वर्तनी के प्रति जैसी सजग दृष्टि रखी गयी है, उससे मात्रिक अशुद्धियों की किंचित् भी संभावना नहीं है । इन्हीं सब तथ्यों का होना मन्त्र से सम्बन्धित स्तरीय कृति के लिये अपरिहार्य है ।

श्री अमृतलाल जैन के प्रकाशकीय कौशल का ही प्रतिफल है कि इतने कम समय में उन्हें शक्ति कुञ्ज का द्वितीय परिमार्जित संस्करण प्रकाशित करना पड़ा । प्रकाशन के क्षेत्र में हम श्री जैन की निरंतर प्रगति हेतु कामना करते हैं।

साधुवाद के क्रम में श्री सदाशिव तिवारी, जिन्होंने शक्ति कुञ्ज की त्रुटिरहित सी.आर.सी. के निर्माण का दायित्व निर्वहन किया, प्रमुख हैं । श्री राजेश त्यागी एवं श्री हिमाँशु सक्सेना भी साधुवाद के अधिकारी हैं, जिन्होंने अनवरत कम्प्यूटरीकृत टंकण करके शक्ति कुञ्ज की समस्त सामग्री को सुन्दर और त्रुटिरहित रूप प्रदान किया तथा संस्कृत के श्लोकों की वर्तनी की त्रुटियों को संशोधित किया ।

हमारी स्नेह स्निग्धा, स्नेहाषिक्त, स्नेहिल पुत्री दीक्षा तथा उसके जीवन सहचर श्री राहुल बाजपेई के साथ उनके दोनों पुत्रों अंश एवं नवांश को भी धन्यवाद देना हमारा नैतिक दायित्व है, जिन्होंने सदा हमारे लेखन को उपयुक्त दिशा और शक्ति के साथ साथ तीव्रगति प्रदान की । हमारे पुत्र श्री विशाल तथा पुत्रवधू सुश्री शिल्पी त्रिवेदी के साथ साथ पौत्र युग और पौत्री युति का भी आभार, जिन्होंने क्रमश अपने हास्य विनोद तथा आमोदिनी प्रमोदिनी बाल सुलभ लीलाओं से लेखन के वातावरण को सरस एवं सहज बनाया ।

आदि शक्ति, महाशक्ति, त्रिपुरसुन्दरी के पदपंकज एवं पदरज के प्रति हमारे सहस्रों जन सहज ही समर्पित हैं, जिनकी अपार अनुकम्पा और आशीष का ही प्रतिफल है शक्ति कुञ्ज का सम्पुष्ट एवं सारगर्भित लेखन । प्रेरणा और प्रोत्साहन के अभाव में शक्ति कुञ्ज समतुल्य ग्रंथ का लेखन सम्भव नहीं हो सकता । हमें तो जगदम्बा त्रिपुरसुन्दरी ने सदा ही परम पुनीत, पावन एवं प्रभूत सारगर्भित शास्त्रोक्त, पुराणोक्त तथा वेदगर्भित ज्ञानगंगा की सौरभ सुधा को निरन्तर प्रवाहित करने हेतु प्रेरित, प्रोत्साहित और उत्साहित किया । जिसे हमने उनका आदेश स्वीकार करके अलंध्य अवरोधों एवं व्यवधानों की चिंता किये बिना अंतरंग आनन्द, अपार आह्लाद, अप्रतिम उत्साह, अद्भुत उल्लास असीम उमंग और अशेष ऊर्जा के साथ सदा सर्वदा अभिसिंचित करने की चेष्टा की । अत उस महाशक्ति त्रिपुरसुन्दरी के प्रति हम अपने जीवन की समस्त अभिलाषाओं, आकांक्षाओं, अपेक्षाओं को सादर समर्पित करते हैं जिन्होंने हमें कृतकृत्य करके बार बार धन्य किया है ।

शक्ति कुञ्ज की सघन शोध साधना एवं पराम्बा जगदम्बा की शक्ति के संज्ञान के समर और संग्राम की संघर्षपूर्ण यात्रा में प्रबुद्ध पाठकों, आकुल जिज्ञासुओं, सात्त्विक उपासकों, समर्पित आराधकों तथा आस्थावान भक्तों का सम्मिलित होना अत्यन्त उल्लास, उत्साह एवं उमंग का विषय है । हमारी निर्मल आकांक्षा तथा सारस्वत, शाश्वत, सशक्त सदास्था है कि शोध पल्लवित अनुसंधानपरक ज्योतिष ज्ञान विज्ञान अभिज्ञान और अनुराग का परम पवित्र पावन प्रगतिपथ सदा सर्वदा अभिषिक्त, अभिसिंचित, आनन्दित और आह्लादित होता रहेगा।

 

अनुक्रमणिका

अध्याय 1

भक्ति पुञ्ज शक्ति कुञ्ज श्री दुर्गासप्तशती

1

1.1

श्री दुर्गा माहात्म्य

8

1.2

माता दुर्गा की स्तुत्य नाम शृंखला

23

1.3

दुर्गा 108 नाम की माला

25

1.4

नवदुर्गा सूची

26

अध्याय 2

शक्ति रहस्य

27

2.1

शक्ति के रूप में ब्रह्म की उपासना

29

अध्याय 3

शक्ति साधना संस्कार संज्ञान

36

3.1

श्री दुर्गासप्तशती

38

3.2

ग्रहण काल एवं मंत्रजप तथा हवन प्रतिपादन

40

अध्याय 4

दुर्गा भुवन

47

अध्याय 5

कामनापरक श्री दुर्गासप्तशती का अनुष्ठान विधान

52

5.1

पूजा रहस्य

52

5.2

सुगम नवरात्र साधना

53

5.3

पूजन विधि

54

5.4

प्रथम स्तुति (महाकाली)

66

5.5

द्वितीय स्तुति (महालक्ष्मी)

69

5.6

तृतीय स्तुति (महासरस्वती)

75

5.7

चतुर्थ स्तुति (त्रिगुणात्मिका वैष्णवी देवी)

79

5.8

आपदुद्धारक बटुक भैरव स्तोत्र पाठ विधे

84

अध्याय 6

नवरात्र और नवार्णमंत्र एक चिंतन

88

6.1

नवार्ण मंत्र रहस्य

92

6.2

नवार्ण मंत्र शक्ति संज्ञान

93

6.3

नवार्ण मंत्र का जप और विधान

94

6.4

नवार्ण यन्त्र निर्माण एवम् अनुष्ठान प्रविधि

100

6.5

अथ नवार्ण महामंत्र प्रयोग

111

6.6

नवार्ण मन्त्र एवं नैमित्तक परिहार प्रावधान

113

6.7

नवार्ण मंत्र में प्रणव का संयोग

148

अध्याय 7

शतचण्डी एवं दुर्गापाठ विधान

159

7.1

श्री दुर्गासप्तशती के पारायण का अभिनव अभिज्ञान

160

7.2

सप्तशती पाठ की दो महत्त्व पूर्ण विधियाँ

162

7.3

दुर्गासप्तशती समुट पाठ विधि

163

7.4

पाठांग दशांश हवनादि का विधान

164

7.5

श्रीमद्देवी भागवत में शारदीय नवरात्र

165

7.6

विशेष कड़ाही पूजा

171

अध्याय 8

श्री दुर्गासप्तशती अनुष्ठान अभीष्ट सिद्धि विधान

173

8.1

सप्त श्लोकी दुर्गा साधना

173

8.2

साधना विधि

174

8.3

सप्तश्लोकी चण्डीपाठ

177

8.4

श्री बटुक उपासना

180

8.5

त्रयोदश श्लोकी दुर्गा सप्तशती

183

अध्याय 9

श्री दुर्गासप्तशती विस्तृत हवन प्रावधान

189

9.1

यज्ञ और होम में भेद

197

9.2

कुण्ड अथवा वेदी के संस्कार

199

9.3

दुर्गोपनिषत्कल्पहुम सम्मतम् (देव्या विशेषहवनविधानम्)

208

9.4

श्रीदुर्गा हवन में सात आहुतियों का निषेध

216

अध्याय 10

सप्तशतीस्थित सिद्ध सन्दुटित मन्त्र

218

10.1

कात्यायनी तन्त्रोक्त अनुभूत समुट विधान

218

10.2

कुछ अन्य समुट

221

10.3

श्रीदुर्गासप्तशती कथासार

229

10.4

श्री दुर्गासप्तशती

230

अध्याय 11

अन्यान्य प्रयोजनों की संसिद्धि हेतु श्री दुर्गासप्तशती का

मंत्र जप विधान (विस्तृत)

245

11.1

अनुभूत मन्त्रों की तालिका

248

11.2

समस्त मनोकामनाओं की संपूर्ति हेतु

260

अध्याय 12

 साधना के सामान्य सूत्र

375

12.1

श्री दुर्गा पूजा प्राविधान एवं अनुष्ठान

377

12.2

महत्त्वपूर्ण ज्ञातव्य तथ्य (संकल्प तथा उपासना क्रम)

380

12.3

पुस्तकपूजा का मन्त्र

382

12.4

सामान्य पूजा पद्धति

383

अध्याय 13

श्रीदेव्यथर्वशीर्ष और महत्व

392

13.1

श्रीदेव्यथर्वशीर्षम्

393

13.2

दुर्गास्मृता मंत्र प्रयोग

399

अध्याय 14

चण्डिका मालामन्त्र प्रयोग

403

अध्याय 15

समस्त प्रयोजनों की संसिद्धि हेतु सिद्ध कुब्जिका स्तोत्र एवं वीसा यन्त्र प्रयोग

407

15.1

प्राण प्रतिष्ठा करने के पर्व

407

15.2

यन्त्र निर्माण रीति

408

15.3

प्राण प्रतिष्ठा विधि

409

15.4

यन्त्र का पूजन

409

अध्याय 16

शक्ति साधना कतिपय चमत्कृत कर देने वाले

अंतरंग आभास

414

 

 

Item Code: HAA169 Author: मृदुला त्रिवेदी और टी. पी. त्रिवेदी: (Mridula Trivedi and T. P. Trivedi) Cover: Paperback Edition: 2010 Publisher: Alpha Publications ISBN: 8179480348 Language: Sanskrit Text to Hindi Translation Size: 8.5 inch X 5.5 inch Pages: 462 Other Details: Weight of the Book: 600 gms
Price: $30.00
Viewed 6704 times since 17th Jan, 2018
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to शक्ति कुन्ज: Shakti Kunj (Hindi | Books)

व्यवसाय रत्नाकर: Vyavasaya (Business ) Ratnakar
मन्त्र मञ्जरी: Mantra Manjari
मृत्युंजय मंत्र संकलन: Collection of Mrityunjaya Mantras
मंत्र मंदाकिनी: Mantra Mandakini
Saptshati Sanhita (Hindi)
व्यावसायिका: Profession
व्यवसाय विमर्श: Business Consultations
व्याधि वीथिका (निरोग एवं स्वस्थ जीवन) - A Diseaseless and Healthy Life
उद्यम और उन्नति: Enterprises and Progress
साधना सरोवर: Sadhana Sarovar
मंगल दशा फलदीपिका: Mangal Dasha Phaladipika
चंद्र दशा फलदीपिका: Chandra Dasha Phaladipika
राहु केतु दशा फलदीपिका: Rahu Ketu Dasha Phaladipika
Astrology for Overcoming Cancer
Testimonials
Dear friends, I just placed my order for one Radhe-Shyam copper bangle and I am looking forward to seeing the quality of your products. I have been searching for years for this price range of bangle with 'Radhe Radhe' or 'Radhe-Shyam'. I may add more items as I was not through shopping when I clicked on PayPal. Thanks sooo much for providing such hard-to-find and fair-priced items! Sincerely, David Briscoe
David, USA
I got my two dupattas today and I'm SO HAPPY! Thank you so much. Such amazing quality and the pictures totally do it justice They are beautiful!!! Thank you
Nony, USA
I received my Ganesha Purana order today Books received in good condition and delivery was very fast. Thank you very much..:)) Very good customer service.
Lukesh sithambaram
I'm happy to order from you and not the global monopoly that is Amazon. ;)
Tom, USA
A great 'Dorje' has arrived. Thank you for your sincerity.
Hideo, Japan
Thank you for your amazing customer service! I ordered Liberating Isolation Sunday, March 24 and received it Friday, March 29! Much sooner than expected:) The book was packaged nicely and is in great shape! Thank you again!
James, USA
Om Shanti Shanti Shanti !!! Exotic India Thank You Thank You Thank You !!!
Fotis Kosmidis
Hi, I would like to thankyou for your excellent service. Postage was quick. Books were packaged well and all in good condition.
Pauline, Australia
Thank you very much. Your sale prices are wonderful.
Michael, USA
Kailash Raj’s art, as always, is marvelous. We are so grateful to you for allowing your team to do these special canvases for us. Rarely do we see this caliber of art in modern times. Kailash Ji has taken the Swaminaryan monks’ suggestions to heart and executed each one with accuracy and a spiritual touch.
Sadasivanathaswami, Hawaii