डायनों का निवास जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह स्थित कैलाश पर्वत का वासुकी कुण्ड एक ऐसा रहस्यमय और आध्यात्मिक स्थल है, जहाँ हर वर्ष सितंबर में विशाल मेला लगता है। मान्यता है कि इस पवित्र कुण्ड में स्नान और विशेष अनुष्ठान करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। कहते हैं कि लाखों वर्ष पूर्व गरुड़ से बचने के लिए नागराज वासुकी ने इसी स्थान पर शरण ली थी। बर्फ से ढकी पर्वतीय घाटियों, गहरे नीले जल और दुर्गम कैलाश पर्वत के कारण यह क्षेत्र सदियों से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, सितंबर माह के आसपास देश की रहस्यमयी डायनें अपने अदृश्य वाहनों पर यहाँ गुप्त सम्मेलन करती हैं और अपनी वर्षभर की साधनाओं का लेखा-जोखा रखती हैं। तंत्र-मंत्र, जादू-टोना और प्राचीन लोकविश्वासों से जुड़ी ये कथाएँ इस स्थान के रहस्य को और गहरा बना देती हैं। क्या वासुकी कुण्ड वास्तव में रहस्यमयी शक्तियों का केंद्र है, या यह लोकमान्यताओं और किंवदंतियों की दुनिया है? प्रस्तुत कथा आपको रोमांच, रहस्य और अज्ञात की एक अनोखी यात्रा पर ले जाएगी।
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