"अश्वघोष की दार्शनिक मीमांसा"-इस ग्रन्थ का मुख्य विषय अश्वघोष के महाकाव्यों में यत्र-तत्र सांकेतिक तथा विस्तृतरूपेण उपलब्ध भारतीय दर्शन तथा बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धान्तों का समीक्षण है। अश्वघोष के काल, व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय प्रस्तुत करते हुए भारतीय दर्शन, वैदिक दर्शन, बौद्धदर्शन में सन्निहित विभिन्न तत्त्वों का शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। अश्वघोष के ब्राह्मण धर्म तथा बौद्ध धर्म के प्रति निष्ठा का सम्यक् विवेचन करते हुए उन्हें एक प्रकाण्ड एवं प्रसिद्ध विद्वान् तथा महाकवि के रूप में प्रतिष्ठित कर यह भी सिद्ध करने का प्रयास किया है कि दर्शन जैसे नीरस एवं शुष्क विषय को काव्यशैली में नितान्त सरल एवं सरस रूप में प्रस्तुत करने में अश्वघोष जैसे महाकवि, महावादी, पण्डित, विद्वान् ही सक्षम हैं।
डॉ. राजकुमार महाजन (प्राचार्य) मोहन लाल उप्पल डी.ए.वी. कॉलेज फगवाड़ा जिला (कपूरथला) पंजाब Residential Address-BL/57 New Jwala Nagar, Maqsoodan, Jalandhar (PB) शैक्षणिक योग्यता :- बी. ए. (आनर्ज) संस्कृत-स्वर्णपदक विजेता। एम. ए. (संस्कृत) स्वंणपदक विजेता। एम. ए. (अंग्रेजी), एम. फिल् (संस्कृत) साहित्यरत्न (ज्योतिष), पी.एच.डी. (संस्कृत) अध्यापन-1980 से लेकर 2004 तक प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। 1980-81-एस. एल. बाबा, डी.ए.वी. कॉलेज बटाला, (अस्थायी) 1981-82 डी.ए.वी. कॉलेज अमृतसर (अस्थायी) 1983-84 डी.ए.वी. कॉलेज जालन्धर (अस्थायी) 1985 से स्थायी रूप में डी.ए.वी. कॉलेज फिल्लौर। पदोन्नत्ति :- 16 जुलाई 2004 को प्रचार्य पद के लिए डी.आर. वी. डी.ए.वी. कॉलेज फिल्लौर में चयनित तथा 25 जुलाई 2005 को मोहन लाल उप्प्ल डी.ए.वी. कॉलेज में स्थानान्तरित। सम्प्रति इसी कॉलेज में प्राचार्य पद पर कार्यरत। अनेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रकाशित शोध पत्र। गुरुनानक देव युनिर्वसिटी की विभिन्न समितियों के सदस्य तथा खेल समिति के उप-प्रधान पद पर चयनित रहे। सांस्कृतिक गतिविधियों में कविता उच्चारण, नाटक तथा संगीत की प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। सम्प्रति महामंत्री, प्रिंसीपल एसोसिऐशन गुरुनानक देव विश्वविद्यालय से सम्बन्धित कॉलेजज्। उपप्रधान (उत्तरक्षेत्र) एसोसिऐशन ऑफ इण्डियन कॉलेज प्रिंसीपलज। दूरदर्शन केन्द्र जालन्धर से प्रचारित नाटकों में अभिनय तथा अनेक नाटकों तथा धारावाहिकों के रचयिता जिनमें धारावाहिक जिन्दगी (13 भाग) तथा उडीकां (32 भाग) पंजाबी भाषा में लिखित तथा दूरदर्शन केन्द्र जालन्धर द्वारा प्रसारित। हिन्दी भाषा में लिखित तथा दूरदर्शन से प्रसारित 'रिश्ते' तथा 'पहचान' नाटक। पंजाबी भाषा में लिखिडॉ. राजकुमार महाजन (प्राचार्य) मोहन लाल उप्पल डी.ए.वी. कॉलेज फगवाड़ा जिला (कपूरथला) पंजाब Residential Address-BL/57 New Jwala Nagar, Maqsoodan, Jalandhar (PB) शैक्षणिक योग्यता :- बी. ए. (आनर्ज) संस्कृत-स्वर्णपदक विजेता। एम. ए. (संस्कृत) स्वंणपदक विजेता। एम. ए. (अंग्रेजी), एम. फिल् (संस्कृत) साहित्यरत्न (ज्योतिष), पी.एच.डी. (संस्कृत) अध्यापन-1980 से लेकर 2004 तक प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। 1980-81-एस. एल. बाबा, डी.ए.वी. कॉलेज बटाला, (अस्थायी) 1981-82 डी.ए.वी. कॉलेज अमृतसर (अस्थायी) 1983-84 डी.ए.वी. कॉलेज जालन्धर (अस्थायी) 1985 से स्थायी रूप में डी.ए.वी. कॉलेज फिल्लौर। पदोन्नत्ति :- 16 जुलाई 2004 को प्रचार्य पद के लिए डी.आर. वी. डी.ए.वी. कॉलेज फिल्लौर में चयनित तथा 25 जुलाई 2005 को मोहन लाल उप्प्ल डी.ए.वी. कॉलेज में स्थानान्तरित। सम्प्रति इसी कॉलेज में प्राचार्य पद पर कार्यरत। अनेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रकाशित शोध पत्र। गुरुनानक देव युनिर्वसिटी की विभिन्न समितियों के सदस्य तथा खेल समिति के उप-प्रधान पद पर चयनित रहे। सांस्कृतिक गतिविधियों में कविता उच्चारण, नाटक तथा संगीत की प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। सम्प्रति महामंत्री, प्रिंसीपल एसोसिऐशन गुरुनानक देव विश्वविद्यालय से सम्बन्धित कॉलेजज्। उपप्रधान (उत्तरक्षेत्र) एसोसिऐशन ऑफ इण्डियन कॉलेज प्रिंसीपलज। दूरदर्शन केन्द्र जालन्धर से प्रचारित नाटकों में अभिनय तथा अनेक नाटकों तथा धारावाहिकों के रचयिता जिनमें धारावाहिक जिन्दगी (13 भाग) तथा उडीकां (32 भाग) पंजाबी भाषा में लिखित तथा दूरदर्शन केन्द्र जालन्धर द्वारा प्रसारित। हिन्दी भाषा में लिखित तथा दूरदर्शन से प्रसारित 'रिश्ते' तथा 'पहचान' नाटक। पंजाबी भाषा में लिखित दूरदर्शन जालन्धर से प्रसारित-तबादला, वारिस (2 भाग) गुंजाइश, फैसला, सुन ता सई, सच, विश्वास। लेखनकार्य :- 1. अश्वघोष की दर्शनिक मीमांसा 2. बौद्धकवित्रयी का पौराणिक विश्लेषण (अश्वघोष, बुद्धघोष तथा शान्तिभिक्षु शास्त्री 2011) 3. शान्तिभिक्षुशास्त्री की दार्शनिक मीमांसा 4. कालिदासस्य अलंकारसौन्दर्यम्। (संस्कृत भाषा में) 5. कविताओं का एक संग्रह
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