इस पुस्तक के लेखक डॉ. भारतेन्दु मिश्र है। डॉ. मिश्र को शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापन कार्य करते कुल 24 वर्ष हो गए। आप बर्तमान में श्री मुरली मनोहर टाउन पी जी कॉलेज बलिया में सह आचार्य के पद पर कार्यरत हैं। आपके दो दर्जन से अधिक शोधपत्त्र विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित है। तीन दर्जन से अधिक राष्ट्रीय सेमिनार में आपने शोध पत्त्र प्रस्तुत किया है। आपको शोध एवं पाठ्यक्रम निर्माण की समिति में सदस्य के रूप में कार्य करने का अनुभव है
समकालीन भारतीय शिक्षा का परिदृश्य स्वतंत्र भारत के शैक्षिक विकास, नीति-निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक प्रभावों के अंतर्सबंध को प्रदर्शित करता है। यह विषय न केवल शिक्षा प्रणाली की समझ के लिए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, परिवर्तनों, चुनौतियों व वर्तमान शैक्षिक प्रवृत्तियों को समझने में सहायक है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने में भी मदद करता है। स्वतंत्रता के बाद भारतीय शिक्षा प्रणाली पर विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कारकों का प्रभाव पड़ा है। शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षरता प्रदान करना नहीं, बल्कि नागरिकों में लोकतांत्रिक मूल्यों, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना भी है। वर्तमान समय में भारतीय शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता सुधार, समावेशी शिक्षा, तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इस परिदृश्य में शिक्षा को समाज के समग्र विकास का माध्यम माना जा रहा है।
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