सुरेश चन्द्र शुक्ला 'शरद आलोक' दुनिया के दूसरे कोने में उत्तरोत्तर में स्थित, भारत से सात हजार किलोमीटर दूर नार्वे की राजधानी ओस्लो में रहकर हिन्दी की सतत सेवा कर रहे शरद आलोक यानी सुरेश चंद्र शुक्ला वास्तविकता में उस देश की तरह है। नार्वे को 'लैंड आफ द मिडनाइट सन' भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ उत्तरी भाग में सूरज नहीं डूबता। ठीक उसी तरह शरद आलोक जी ने हिंदी और भारत के सूर्य वहां कभी डूबने नहीं दिया। 10 फरवरी 1954, को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में जन्मे शरद आलोक उपन्यास, कहानी, नाटक, कविता आदि लिखते हैं। शरद आलोक का रचना संसार: कविता: वेदना, रजनी, नंगे पांवों का सुख, दीप जो बुझते नहीं, संभावनाओं की तलाश, नीड़ में फंसे पंख, गंगा से ग्लोमा तक, प्रवासी का अन्तर्द्वन्द्व, लॉकडाउन, मिट्टी के देवता, जन मन के गाँधी। उपन्यास : गंगा को वापसी। कहानी संग्रह: तारूफी खत, अर्धरात्रि का सूरज, सरहदों के पार। नाटक: अंतर्मन के रास्ते, अंततः, वापसी, डेथ ट्रैप, आधी रात का सूरजा अनुवाद : नार्वे की लोककथायें, एच सी अन्दर्सन (डेनमार्क) की कथायें, (हेनरिक इबसेन कृत नार्वेजीय नाटक का हिंदी में अनुवाद) गुड़िया का घर, मुर्गाबी, सागर कन्या, क्नुत हामसुन कृत 'भूख' उपन्यास का हिंदी में मूल से अनुवाद किया। संपादन : (संकलन): प्रतिनिधि प्रवासी कहानियां, नार्वे की उर्दू कहानियाँ, संपादन (पत्र- पत्रिकायें) श्रमांचल, परिचय, वैश्विका, स्पाइल Speil-दर्पण और www.speil.no संप्रति : पत्रकार, आकेर्स-आवीस ग्रूरुददालेन (नार्वेजीय भाषा का पत्र), ओस्लो, नार्वे। यूरोप संपादक, देशबन्धु राष्ट्रीय समाचार पत्र, दिल्ली।
Hindu (हिंदू धर्म) (14099)
Tantra (तन्त्र) (1050)
Vedas (वेद) (732)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2145)
Chaukhamba | चौखंबा (3461)
Jyotish (ज्योतिष) (1637)
Yoga (योग) (1213)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (715)
Sahitya (साहित्य) (25539)
History (इतिहास) (9438)
Philosophy (दर्शन) (3741)
Santvani (सन्त वाणी) (2599)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist