धर्म की सारी कठिनाई यही है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म खोजना पड़ता है। धर्म की सारी कठिनाई यही है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म खोजना पड़ता है! लेकिन हम तो जन्म से धर्म को उपलब्ध हो जाते हैं। कोई जैन घर में पैदा होता है, तो जैन हो जाता है; कोई हिंदू घर में पैदा होता है, तो हिंदू हो जाता है; कोई मुसलमान घर में पैदा होता है, तो मुसलमान हो जाता है। ये कोई धर्म नहीं हैं। ये केवल पैदाइशी संयोग हैं। जन्म से कोई धर्म नहीं मिलता। जीवन में खोजने से स्वधर्म खोजना पड़ता है। जीवन में निरंतर सजग होकर, निरीक्षण, परीक्षण, ऑब्जर्वेशन करने से खोजना पड़ता है कि मेरे लिए क्या धर्म है ?
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
आत्म-ज्ञान का मार्ग क्या है?
आनंद क्या है?
धर्म का क्या प्रयोजन है?
कौन सी सीढ़ियां होंगी आध्यात्मिक क्रांति को पा लेने के लिए?
साधना में आचार का क्या स्थान है ?
जीवन को सृजनात्मक दिशा देने के सूत्र
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