श्री जे के डागर एक स्वाभाविक कवि और विख्यात लेखक हैं। इनका जन्म शरद् पूर्णिमा शक् संवत 2009 के पवित्र रोज हरियाणा राज्य के एक गांव थाना कलां से एक निम्न मध्य वर्गीय परिवार में हुआ। पिता श्री सूबे सिंह डागर का अपना कुटीर उद्योग का व्यवसाय था और मां शान्ति देवी एक सामान्य ग्रामीण महिला हैं। सामान्य ग्रामीण अभावग्रस्त परिस्थितियों से गुजरते हुए माध्यमिक शिक्षा ग्रामीण पाठशाला से प्राप्त की। उच्चतर माध्यमिक परीक्षा बहादुरगढ़ जिला रोहतक से एवं विज्ञान स्नातक की उपाधि पंजाब विश्वविद्यालय के राजकीय महाविद्यालय रोहतक से प्राप्त की। शिक्षा स्नातक दिल्ली के केन्द्रीय शिक्षण संस्थान से और विज्ञान निष्णांत (स्नातकोत्तर) की उपाधि मेरठ विश्वविद्यालय से सन् 1976 में प्राप्त की। अपनी शिक्षा के क्षेत्र में सदा ही प्रखर और अग्रणी रहने का श्रेय अपने पिता माननीय श्री सूबे सिंह जी को ही देते हैं जिनकी मेहनत, लगन एवं ईमानदारी भरे जीवन से ये सदा ही प्रेरणा लेते रहे हैं। शिक्षा समाप्त कर कुछ समय तक इन्होंने शिक्षण क्षेत्र में सेवा की। बाद में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क विभाग में कार्यरत रहे और सन् 1992 से श्रम मंत्रालय में उप-निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। जीवन के विभिन्न रूप इनके कवि हृदय को सदा उद्वेलित करते रहे हैं और कविता लेखन तथा साहित्य सृजन कालेज जीवन से ही करते रहे हैं। ये प्रेम और त्याग को ही अपने जीवन का मूलमन्त्र मानते रहे हैं। इनके द्वारा रचित अन्य पुस्तकें बूढ़ा रूपया, दिल के मोती, अंकुरित सपने सभी प्रकाशित काव्य-संग्रह व उपन्यास 'ठहरे आंसू', 'बंसी का मोह' कहानी-संग्रह। प्रकाशनाधीन 'ज्ञान गठरी दोहावली हिन्दी में और अंग्रेजी में "YOU CAN FLY BEYOND THE SKY'
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