Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.

गणतंत्र की जननी वैशाली का इतिहास- An Early History of Vaishali

$43
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: JANAKI PRAKASHAN, PATNA
Author Yogendra Mishra
Language: Hindi Text
Pages: 336
Cover: Hardcover
9 Inches Height X 6 Inches Width X 0 Inches Depth
Weight 488 gm
Edition: 2018
ISBN: 9789386955005
BA0599
Delivery and Return Policies
Usually ships in 10 days
Returns and Exchanges accepted within 7 days
Free Delivery
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.
Book Description

 

पुस्तक परिचय


वैशाली गणतंत्र की जन्मस्थली मानी जाती है। विश्व का प्राचीनतम गणतंत्र वैशाली में ही था। यहाँ गणतंत्र की स्थापना (करीब 725 ई०पू०) यूनान में गणतंत्र के प्रादुर्भाव से पूर्व हो चुकी थी। ऐसे महत्त्वपूर्ण विषय पर लिखित यह सबसे प्रामाणिक पुस्तक है।
इस पुस्तक में वैशाली का इतिहास आदि काल से प्रस्तुत किया गया है। यहाँ गणतंत्र की स्थापना से पूर्व राजतांत्रिक व्यवस्था थी। इस व्यवस्था का सिलसिलेवार इतिहास इस पुस्तक में दिया गया है। गणतंत्र की स्थापना की कालगणना विशुद्ध वैज्ञानिक तरीके से की गयी है। इस पुस्तक में स्थापित तिथि की पुष्टि वहाँ की खुदाइयों से भी हुई है।
जैनों के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्म भूमि भी वैशाली में थी। महावीर का काल निर्धारण भी वैज्ञानिक आधार पर किया गया है। वैशाली गौतमबुद्ध की प्रियस्थली थी। गौतमबुद्ध और महावीर समकालीन थे। इन दोनों संतों की मुलाकात कभी हुई थी अथवा नहीं? इस गुत्थी को बहुत ही रोचक ढंग से यहाँ सुलझाया गया है। कुल मिलाकर इस पुस्तक में वैशाली का राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास विस्तार से है।.......

 

 

लेखक परिचय


1937 में पटना विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित मैट्रिक की परीक्षा में बिहार.
नेपाल एवं उड़ीसा में डॉ० योगेन्द्र मिश्र (1920-93) प्रथम आये थे। वे 1947 से लंबी अवधि तक पटना विश्वविद्यालय में इतिहास के शिक्षक रहे। यहीं से वे 1980 में प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए।
वे मगध विश्वविद्यालय में भी प्राचीन भारतीय इतिहास एवं एशियाई अध्ययन विभाग के संस्थापक विभागाध्यक्ष थे।
उन्होंने वैशाली के इतिहास पर अनेक पुस्तकें लिखीं जिनमें प्रमुख है।
ऐन अर्ली हिस्ट्री ऑफ वैशाली। उन्होंने जैनों के 24वें तीर्थंकर भगवान् महावीर की जन्मभूमि वैशाली में होने के पक्ष में अकाट्य तर्क प्रस्तुत किया। उन्होंने वैशाली के गणतंत्र की जो तिथि स्थापित की वह हाल ही में हुई रेडियोकार्बन डेटिंग से मेल खाती है।
प्रो० मिश्र की एक दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि थी तीरभुक्ति की प्राचीन राजधानी श्वेतपुर की खोज। यह उन्होंने मुख्यतः चीनी स्रोतों के अध्ययन के आधार पर किया। गंगा के किनारे बसे चेचर ग्राम की पहचान उन्होंने प्राचीन श्वेतपुर के रूप में की।
उनकी अन्य प्रमुख रचनायें हैं ए हिस्ट्री ऑफ विदेह, श्वेतपुर की खोज और उसका इतिहास, द हिन्दू शाहीज़ ऑफ अफगानिस्तान एण्ड द पंजाब, अशोक, भारत का ऐतिहासिक एटलस, मेगास्थनीज का भारत विवरण आदि।

 

 

प्राक्कथन


डा० योगेन्द्र मिश्र द्वारा विरचित 'ऐन अर्ली हिस्ट्री ऑफ वैशाली (फ्रॉम दि अर्लिएस्ट टाइम्स टू दि फॉल दि वज्जियन रिपब्लिक, लगभग 484 बी०सी०)' का प्रकाशन 26 जनवरी 1962 को पहली बार मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली द्वारा हुआ था। एर्राटा (गलत मुद्रित कुछ शब्दों की एक पृष्ठीय सूची सहित) कुल तीन सौ पृष्ठों की यह पुस्तक प्राचीन भारतीय इतिहास लेखन में क्षेत्रीय इतिहास की मानक बन गयी। इस पुस्तक के अंत में सहायक ग्रंथों की सूची और अनुक्रमणिका के प्राकार दशकों तक युवा पीढ़ी के शोधकर्ताओं और क्षेत्रीय इतिहास के लेखकों के लिए आदर्श, प्रेरक तथा दिशाबोधक बने रहे। इस पुस्तक की दुर्लभता ऐसी हो गयी कि कालांतर में इसकी छायाप्रति कराते कराते प्रथम संस्करण की पुस्तक पटना के तमाम ग्रंथागारों में जर्जर होती गयी। इसी क्रम में इस मानक पुस्तक की स्वर्णजयंती (1912) तक गुजरने की नौबत आ गयी। तब नयी पीढ़ी के जिज्ञासु, बुद्धिजीवियों में हिन्दी के प्रति विशेष अनुराग की जागृति हो गयी।
सौभाग्यवश डा० योगेन्द्र मिश्र (1920-1993) के निर्वाण के बाद उनके वंशज और शिष्य मण्डल ने लामबंद होकर उनकी पुण्य तिथि 21 अप्रैल के दिन अटूट क्रम में स्मृति व्याख्यानमाला का प्रबंधन किया है। इस अवसर पर देश-विदेश के लब्ध प्रतिष्ठ विद्वान् नवीन इतिहास-विषयों पर व्याख्यान देते हैं। इन व्याख्यानों की मुद्रित प्रतियाँ श्रोताओं के बीच वितरित की जाती हैं। इस बौद्धिक अभियान का श्रेय डा० मिश्र के वंशज (पुत्री डा० जयश्री मिश्र, जामाता राम नरेश शर्मा (अभियंता). पुत्र सिद्धहस्त चिकित्सक डा० प्रेमेन्द्र प्रियदर्शी तथा शैलेन्द्र शुभदर्शी) को जाता है।

 

 

भूमिका


प्राचीन भारत के इतिहास में वैशाली एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इस क्षेत्र, जो गंण्डक नदी (प्राचीन सदानीरा) से ठीक पूरब स्थित है, का आर्याकरण दक्षिण बिहार से पहले हुआ था। यह कृषि और व्यापार के केन्द्र के रूप में विकसित हुआ जबकि यहाँ के जंगलों ने तपस्वियों और धार्मिक उपदेशकों को आकर्षित किया। शासन के क्षेत्र में यहाँ एक महान् प्रयोग तब हुआ जब वैशाली में वृजियों (वज्जियों) अथवा लिच्छवियों के द्वारा प्राचीन भारत के सबसे अधिक सुविख्यात गणतंत्र की स्थापना हुई। छठी शताब्दी ई०पू० और पांचवीं शताब्दी ई०पू० के प्रारंभ में यहाँ अत्यंत महत्त्वपूर्ण और प्रभावी ध ार्मिक क्रांति हुई। वैशाली नगर के समीप बृहत्तर वैशाली के एक भाग में स्थित क्षत्रिय कुण्डपुर जैनों के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर वर्धमान महावीर की जन्मभूमि थी। लिच्छवि गणतंत्र की राजधानी गौतम बुद्ध तथा अन्य भ्रमणकारी संन्यासियों की प्रिय स्थली थी। इस क्षेत्र (मोटे तौर पर आधुनिक बिहार के मुजफ्फरपुर और चम्पारण जिले* तथा इनसे सटे नेपाल की तराई) का अबतक व्यवस्थित और विस्तृत इतिहास प्रकाशित नहीं है, इस कारण प्रस्तुत पुस्तक का प्रकाशन सर्वथा उचित है।

 

Frequently Asked Questions
  • Q. What locations do you deliver to ?
    A. Exotic India delivers orders to all countries having diplomatic relations with India.
  • Q. Do you offer free shipping ?
    A. Exotic India offers free shipping on all orders of value of $30 USD or more.
  • Q. Can I return the book?
    A. All returns must be postmarked within seven (7) days of the delivery date. All returned items must be in new and unused condition, with all original tags and labels attached. To know more please view our return policy
  • Q. Do you offer express shipping ?
    A. Yes, we do have a chargeable express shipping facility available. You can select express shipping while checking out on the website.
  • Q. I accidentally entered wrong delivery address, can I change the address ?
    A. Delivery addresses can only be changed only incase the order has not been shipped yet. Incase of an address change, you can reach us at help@exoticindia.com
  • Q. How do I track my order ?
    A. You can track your orders simply entering your order number through here or through your past orders if you are signed in on the website.
  • Q. How can I cancel an order ?
    A. An order can only be cancelled if it has not been shipped. To cancel an order, kindly reach out to us through help@exoticindia.com.
Add a review
Have A Question
By continuing, I agree to the Terms of Use and Privacy Policy
Book Categories