नाम- डॉ. ज्योत्स्ना मोहन शिक्षा-एम.ए. (हिन्दी), एम.ए. (संस्कृत), पी.एच.डी., डी.लिट्. प्रकाशित ग्रन्थ- काव्यप्रदीप विमर्श 1. काव्यप्रकाश सोलह टीकाओं सहित 2. (छः भागों में प्रकाशित) 3. स्मृतियों का वातायन 4. वृक्षविज्ञानम् 5. यात्रा के सोपान 6. मानस के राजहंस 7. पर्यावरण एवं भारतीय नारी 8. रामचरितमानस में पर्यावरण 9. श्रीमद्भगवद्गीता में पर्यावरण
संस्कृत वाङ्मय के वैदिक साहित्य से लेकर लौकिक साहित्य तक 'पर्यावरण' किसी न किसी रूप में उपलब्ध है। श्रीमद्भभगवद्गीता में आध्यात्मिक, साँस्कृतिक, प्राकृतिक और राजनैतिक परम्परा का निर्माण किया है और पर्यावरण का निर्माण किया है। गीता का प्रत्येक श्लोक किसी न किसी 'पर्यावरण' से प्रभावित है। विविध आदर्शों की स्थापना कर समन्वयवाद की प्रतिष्ठा द्वारा लोकनायक का कार्य किया और गीता में आध्यात्मिक और साँस्कृतिक पर्यावरण का दर्शन कराया गया है।
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