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हिंदी बाल साहित्य मील के पत्थर: Hindi Bal Sahitya Meel Ke Pathar

$27
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: LITTLE BIRD PUBLICATIONS, DELHI
Author Shakuntala Kalra
Language: Hindi
Pages: 164
Cover: PAPERBACK
8.5x5.5 Inch
Weight 220 gm
Edition: 2026
HCL065
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Book Description
भूमिका

हिंदी बाल साहित्य के अनन्य साधक की अगली कड़ी है 'हिंदी बाल साहित्य : मील के पत्थर' जिसमें बाल साहित्य के उन दिग्गज साहित्यकारों के रचनात्मक अवदान के किसी एक विशिष्ट पक्ष को उद्घाटित किया है। ये हमारे बाल साहित्य के वे मील के पत्थर हैं जिन पर बाल साहित्य का सुंदर भवन खड़ा है। इन साहित्यकारों पर कार्य करते हुए इनमें से कुछ समकालीन बाल साहित्यकारों के साथ कई आत्मीय मुलाकातें भी हुई थीं इसीलिए इन आलेखों में आपको संस्मरण-विधा के भी गुण मिलेंगे। कहीं उनसे लिए गए साक्षात्कारों में उनकी बात उन्हीं की जुबानी होगी जो उनके लिए अंतर्साक्ष्य से जुड़ा एक प्रामाणिक दस्तावेज होगा। इसमें सुभद्रा कुमारी चौहान, रामधारीसिंह दिनकर, कन्हैयालाल 'मत्त', दामोदर अग्रवाल, निरंकारदेव सेवक, डॉ. श्रीप्रसाद, शांति अग्रवाल, डॉ. जयप्रकाश भारती, डॉ. रत्नलाल शर्मा, डॉ. राष्ट्रबंधु, कृष्ण शलभ, योगेंद्र कुमार 'लल्ला', मनोहर वर्मा आदि के आलेख हैं।... हमारे ख्यातिनाम बाल साहित्यकारों ने अपने बहुआयामी सृजन के द्वारा बाल साहित्य की अनन्य सेवा की है। ऐसे अनन्य साधकों के अवदान का बाल साहित्य और उसके सहृदय पाठक सदा ऋणी रहेंगे। बाल साहित्य के ऐसे आधिकारिक चर्चित हस्ताक्षरों की साहित्यिक संपदा सदा हमारे साथ रहेगी और उन्हें अमरता प्रदान करेगी। बाल साहित्य के पुरोधा, जिन्होंने बच्चों को अनेक प्रेरक रचनाएँ दीं, का योगदान अकथ्य और अवर्णनीय है। विविध विधाओं में अपने मौलिक सर्जन और आलोचना के धरातल पर बाल साहित्य को ऊँचाइयाँ दीं, वे बेजोड़ हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों बाल साहित्य-उन्नयन को सपर्पित रहे। समय-समय पर विशिष्ट एवं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के अनुरोध पर ऐसे जिन बाल साहित्यकारों और उनके अवदान को आलेख के माध्यम से उद्भासित करने का विनम्र प्रयास किया, वे सभी भी इस पुस्तक में संकलित हैं। बाल साहित्य के मार्गदर्शक एवं ज्योति-स्तंभ इन प्रतिष्ठित रचनाकारों ने बाल साहित्य के विकास के लिए जो कार्य किया उसकी कोई मिसाल नहीं। बाल साहित्य की समृद्धि और उसके उन्नयन में यद्यपि उनका योगदान बहुत बड़ा और बहुमुखी है किंतु इन आलेखों में उनके किसी विशिष्ट पहलू का मात्र कुछ पृष्ठों की सीमा में ही आकलन हो पाया है। इन सभी साहित्यकारों का अवदान विस्तृत शोधपरक मूल्यांकन की अपेक्षा रखता है। इनके प्रदेय के आकलन की आवश्यकता एवं उपयोगिता को मैं अनिवार्य कार्य मानती हूँ और ऐसा विश्वास करती हूँ जिन्होंने हमें कुछ दिया है उसके योगदान को उजागर करना हमारा दायित्व है। कुछ कार्य हम करें कुछ भावी पीढ़ी सँभाले। प्रस्तुत पुस्तक के आलेखों में 'बाल साहित्य के मील के पत्थर' की साहित्य-साधना को कुछ अंशों तक उद्भासित करने का मैंने प्रयास किया है। उनके रचनात्मक सहयोग ने हिंदी बाल साहित्य को नई भंगिमा दी है। उनके कालजयी प्रदेय को प्रकाश में लाने का मेरा यह प्रयास कितना सार्थक हो पाया है इसका निर्णय सुधी पाठक ही करेंगे। हमारे वरिष्ठ बाल साहित्यकार जो दिवंगत हो चुके हैं, वे पार्थिव रूप में भले ही हमारे बीच नहीं हैं किंतु अपनी रचनाओं के रूप में सदा हमारे साथ रहेंगे। बाल सहित्य के क्षेत्र में उनका अवदान भविष्य की निधि के रूप में सुरक्षित रहेगा। इस पुस्तक में उन बाल साहित्यकारों के व्यक्तित्व-कृतित्व की कुछ छवियाँ हैं। बाल साहित्य से जुड़े ऐसे विचार-बिंदु हैं जो बाल साहित्यानुरागियों एवं बाल साहित्य के अध्येयताओं के साथ-साथ शोधार्थियों और अनुसंधित्सुओं के लिए अत्यंत लाभप्रद होंगे एवं भावी इतिहास-लेखकों के लिए भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

लेखक परिचय

डॉ. शकुंतला कालरा जन्मतिथि: 2 मार्च 1946, (शैक्षणिक प्रमाणपत्र में 11 सितम्बर) जन्मस्थान: बक्खर (अविभाजित भारत) शिक्षा: एम.ए. (प्रथम श्रेणी, प्रथम स्थान), एम.लिट्., पी-एच.डी, डी.लिट्. ज्योतिष प्रवीण, ज्योतिष विशारद्, ज्योतिष शोधकार्य, पंजाबी भाषा में डिप्लोमा, पत्रकारिता में डिप्लोमा। भाषा-ज्ञान : सिरायकी (मातृभाषा), हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और पंजाबी। सम्प्रति: मैत्रेयी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से एसोसिएट प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत होकर पूर्ववत् स्वतंत्र लेखन। प्रकाशित कुल 65 पुस्तकें 17 आलोचना पुस्तकें विनयपत्रिका कथ्य एवं शिल्प, मध्ययुगीन हिंदी कविता में निर्गुण-सगुण-तत्त्व-समन्वय, मैथिलीशरण गुप्त और तुलसीदास, (चिंतन एवं कलागत साम्य तथा प्रभाव), मैथिलीशरण गुप्त का राम और कृष्ण काव्य, हिंदी बालसाहित्य के अनन्य साधक, हिंदी बालसाहित्य: आधुनिक परिदृश्य, रामचरितमानस की प्रासंगिकता, विनयपत्रिका भाव एवं कलागत मूल्यांकन, भारतीय लोकसाहित्य विविध परिदृश्य, बालक और बालसाहित्य, विद्या-विविधा, भक्तिकाल : प्रतिनिधि कवियों की ब्रह्म-दृष्टि। साक्षात्कार हिन्दी बालसाहित्य विमर्श, हिन्दी बालसाहित्य : जिज्ञासाएँ और समाधान। संपादित हिन्दी बालसाहित्य विधा-विवेचन सहित 11 पुस्तकें। 2 कहानीसंग्रह, 3 कवितासंग्रह, यात्रावृत्तांत 'मेरी मॉरिशस यात्रा', बालसाहित्य 10 बालकहानी-संग्रह- मोती जोती, सुनाओ वही कथा, चमत्कार का रहस्य, रात में दिन, अपना घर, मेरी प्रिय बालकहानियाँ, मां का उपहार, नया सवेरा, मेरी चुनिंदा बालकहानियाँ, नई साइकिल, बालउपन्यास मिट्ठी की चिट्ठी चंदा के नाम, बालनाटक देर आए दुरुस्त आए, 8 बालकविता-संग्रह करे तमाशा प्यारी मुनिया, फुलवारी, हसते-महकते फूल, जय-जय भारत प्यारा ममता की छाँव में, क्यों रूठीं गौरैयों प्यारी, मेरी प्रिय इक्कतीस बाल कविताएं (भाग-1 और 2), निबंध-संग्रह बच्चों का व्यक्तित्व विकास कैसे हो?, बच्चे और आप। संकलित रचनाएं: विविध संकलनों एवं स्कूल के पाठ्यक्रमों में रचनाएं संकलित। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता एवं पत्रवाचन। अनूदित रचनाएं- बालकहानियों का पंजाबी, मराठी भाषा, में अनुवाद, आत्मकथा- 'मेरा बचपन उड़ान की चाह में' (मराठी भाषा, अंग्रेजी में अनुवाद)। पुरस्कार/सम्मान : राष्ट्रभाषा गौरवसम्मान संसदीय हिंदी भाषा परिषद, दिल्ली। बाल एवं किशोर साहित्य पुरस्कार एवं सम्मान- हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार। बालसाहित्य का सर्वोच्च बालसाहित्य भारती सम्मान, उ.प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ। अमृता प्रीतम नेशनल अवार्ड महात्माफुले रिसर्च अकादमी। बालसाहित्य का सर्वोच्च सम्मान बालसाहित्य श्री सम्मान, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड (यू.के.)। विधि भारती परिषद् का सर्वोच्च सम्मान- 'राष्ट्रभारती' सहित तीन दर्जन से अधिक पुरस्कार सम्मान। डॉ. शकुंतला कालरा के साहित्य पर छः शोधकार्य: चार एम. फिल्, दो पी-एच.डी.।

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