पुस्तक परिचय
आर्थिक विचारों का इतिहास अर्थशास्त्र के बौद्धिक विकास की एक क्रमबद्ध प्रस्तुति है, जिसमें भारतीय और पाश्चात्य दोनों आर्थिक विचारकों के सिद्धांतों को समग्र रूप से समाहित किया गया है। यह पुस्तक प्राचीन दार्शनिक चिंतन से लेकर शास्त्रीय, समाजवादी, नव-शास्त्रीय तथा सीमांतवादी विचारधाराओं तक आर्थिक सोच की यात्रा को विश्लेषणात्मक एवं सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें प्रमुख सिद्धांतों, ऐतिहासिक संदभाँ और आधुनिक अर्थव्यवस्था में उनकी प्रासंगिकता को स्पष्ट किया गया है। यह कृति विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक विश्वसनीय एवं उपयोगी संदर्भ-पुस्तक सिद्ध होती है।
लेखक परिचय
डॉ. विवेक कुमार पाण्डेय एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी, समर्पित एवं अनुभवी शिक्षाविद् हैं, जिनका शैक्षिक जीवन अत्यंत उज्ज्वल और प्रेरणादायक रहा है। अर्थशास्त्र विषय में उनकी गहरी पकड़ तथा ग्रामीण अनुसंधान के क्षेत्र में उनका विशेष योगदान उन्हें अपने क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित अध्येता बनाता है। उन्होंने अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास से संबंधित विविध विषयों पर अनेक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं, अकादमिक सम्मेलनों एवं संगोष्ठियों में प्रस्तुत किया जा चुका है, जहाँ उनके विचारों को व्यापक सराहना मिली है। उनके अध्ययन का प्रमुख केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विकास की चुनौतियाँ तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ रही हैं। डॉ. पाण्डेय शिक्षण और अनुसंधान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय हैं। वे विद्यार्थियों को विषय की गहरी समझ देने के साथ-साथ समकालीन आर्थिक मुद्दों से जोड़ने पर विशेष बल देते हैं। वर्तमान में वे असिस्टेंट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, राजीव गांधी डी ए वी डिग्री कॉलेज, बांदा (उ. प्र.) में कार्यरत हैं, जहाँ वे शिक्षण, शोध तथा अकादमिक गतिविधियों में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
भूमिका
अर्थशास्त्र मानव जीवन की उन मूलभूत गतिविधियों का व्यवस्थित अध्ययन है, जिनके माध्यम से मनुष्य अपनी सीमित साधनों के भीतर असीमित आवश्यकताओं की पूर्ति करने का प्रयास करता है। यह केवल उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि समाज की संरचना, सत्ता-संबंधों, वर्ग-व्यवस्था, नैतिक मूल्यों और ऐतिहासिक परिस्थितियों से गहराई से जुड़ा हुआ अनुशासन है। किसी भी समाज की आर्थिक व्यवस्था उसके सामाजिक और राजनीतिक ढाँचे का दर्पण होती है। इसलिए आर्थिक सिद्धांतों को केवल तकनीकी या गणितीय नियमों के रूप में देखना अधूरा दृष्टिकोण होगा। उनके पीछे मनुष्य का श्रम, उसकी पीड़ा, उसकी आकांक्षाएँ और उसके संघर्ष निहित रहते हैं। प्रस्तुत पुस्तक "आर्थिक विचारों का इतिहास" इसी व्यापक और समग्र दृष्टिकोण को अपनाते हुए आर्थिक चिंतन के विकास की कहानी प्रस्तुत करती है।
Hindu (हिंदू धर्म) (14032)
Tantra (तन्त्र) (1043)
Vedas (वेद) (733)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2135)
Chaukhamba | चौखंबा (3455)
Jyotish (ज्योतिष) (1632)
Yoga (योग) (1209)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (714)
Sahitya (साहित्य) (25415)
History (इतिहास) (9379)
Philosophy (दर्शन) (3706)
Santvani (सन्त वाणी) (2598)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist