पुस्तक परिचय
पली-पछाऊं का क्षेत्र अंतिम कत्यूरी शासकों की कर्मभूमि रहा है। इस इलाके में कत्यूरों के जागर, लोकगीत और लोकगाथाएं सुनने को मिल जाती हैं। रानी जिया को ईष्ट देवी और उनके पुत्र धामदेव की ईष्ट देवता के रुप में पूजा की जाती है। पाली-पछाऊं के बाहर कुमाऊं और गढ़वाल के कई दूसरे इलाकों में भी कत्यूरों के जागर लगते हैं। उन्हें ईष्ट देवता के रुप में पूजा जाता है। रानीबाग में उत्तरायणी के मौके पर मेला लगता है। जहां रानी जिया की शौर्यगाथा भी सुनने को मिल जाती है। कहते हैं तुगलकों से लड़ते हुए रानी जिया गौला के तट पर शहीद हो गई थी। तब से वहां मेला लग रहा है। श्रद्धालु गौला नदी में स्नान भी करते हैं। गौला के तट पर एक शिला भी है, जो विभिन्न रंगों के पत्थरों से बनी हुई है, जिसे चित्रशिला भी कहा जाता है। स्थानीय लोग उसे रानी जिया का घाघरा भी कहते हैं।
लेखक परिचय
नाम: मदन मोहन सती माता का नाम: श्रीमती पार्वती देवी पिता का नाम श्री शंकर दत्त सती जन्म स्थान : ग्रामः उगलिया, जिला- अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड शिक्षा: एम.कॉम, राजकीय महाविद्यालय, रामनगर, नैनीताल बैचलर ऑफ जर्नलिज्म, गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर सम्प्रति : समन्वयक सूचना, दिल्ली माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखण्ड कार्य अनुभव वरिष्ठ पत्रकार 18 वर्षों तक जी मीडिया में कार्य किया न्यूज़ 1 इंडिया में संपादक के पद पर कार्य किया स्वराज एक्सप्रेस न्यूज़ चैनल में 2 वर्ष तक वरिष्ठ पद पर कार्य किया प्रकाशित पुस्तकें : मालूसाही (उत्तरांचल की प्रसिद्ध लोककथा), 2003 जन्म से पहले (कहानी संग्रह), 2003 राजुला मालूसाही (एक अमर प्रेमगाथा), 2014 लखनपुर के कत्यूर (बैराठ-लखनपुर के कत्यूरों की अमर गाथा), 2021 पर्वत शिरोमणि भगत सिंह कोश्यारी, 2025 'नायक से जननायक पुष्कर सिंह धामी, (नाट्य प्रस्तुति), 2025 उत्तराखंड का कर्मयोगी पुष्कर सिंह धामी (भाषण के अंश), 2025 रानी जिया (उत्तराखंड की वीरांगना), नाटक, 2025
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