लेखक परिचय
श्री जगदीश चन्द्र कन्नौजिया का जन्म एक साधारण परिवार में दिनाँक 7 फरवरी 1946 को हुआ था। उनके पिता स्व. कन्हैया लाल इत्र नगरी कन्नौज के एक प्रसिद्ध सुगन्ध व्यवसायी थे। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा कन्नौज में प्राप्त की और स्नातक की डिग्री मेरठ के एन. ए. एस. पोस्ट ग्रेजुएट कालेज से सरकारी सेवा में रहते हुए प्राप्त की। तत्पश्चात लोक सेवा आयोग, उ. प्र. की प्रतियोगी परीक्षा में सफल होकर कई पदों पर सेवा करते हुए वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए। राजकीय सेवा की बन्दिशों के कारण युवावस्था में साहित्य सेवा में सक्रिय योगदान देना सम्भव न हो सका किन्तु सेवा निवृति के पश्चात लेखक मन स्वान्तायः सुखाय की भावना से ओत-प्रोत हो बन्धन की केंचुल से निकल पड़ा और अनुभूतियों के मोतियों से साहित्य की माला पिरोना प्रारम्भ कर दिया, एक के बाद एक अब तक पाँच उपन्यास और एक कहानी संग्रह साहित्य जगत को समर्पित कर चुके हैं और लेखन सेवा निरन्तर प्रवाह मान है। उनकी सभी कृतियाँ रोचक, प्रेरणास्पद तथा भावनात्मक गुत्थियों को सुलझाने वाली होने के साथ-साथ आदर्शोन्मुखी भी है जो निश्चित ही पाठकों को प्रभावित करेंगी । कृतियाँ:- उपन्यासः 1. अभयदान (प्रकाशित 2019) 2. मृत्युंजय (प्रकाशित 2020) 3. नील कण्ठ (प्रकाशित 2021) 4. मृगतृष्णा (प्रकाशित 2022) 5. क्षित्तिज (प्रकाशित 2023) कहानी संग्रह: झूठे अनुबन्ध (प्रकाशित 2019) गीत निबंध :- फुटकर
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