सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी वाराणसी के निवासी, गोपाल कृष्ण श्रीवास्तव जीके ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र मे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। आप भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंधक हैं। बैकिंग दायित्वों के साथ-साथ साहित्य और पर्यावरण के प्रति आपकी सहज अनुरक्ति निरंतर बनी रही है। प्रयागराज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना को समग्रता में प्रतिबिंबित करती आपकी शोधपरक कृति "प्रयागराज- इतिहास के आईने में" विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह ग्रंथ न केवल तथ्यों का संकलन है, बल्कि शहर की आत्मा को समझने का एक गंभीर प्रयास भी है। इसके अतिरिक्त प्रकाशित 25 कहानियों का संग्रह "जीके की कहानियाँ" मानवीय संवेदनाओं और जीवन-संघर्षों का सजीव दस्तावेज़ है। आप अपने पिताश्री की पुण्य स्मृति में "वृक्षारोपणः एक ज़िम्मेदारी सृष्टि के बचाव हेतु" अभियान का संचालन कर रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आपकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। जीके का मानना है कि साहित्य मात्र अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदना का सृजन और समाज का दर्पण है। आपकी रचनाएँ जीवन के यथार्थ, मानवीय रिश्तों की जटिलताओं तथा सामाजिक सरोकारों की सूक्ष्म पड़ताल करते हुए पाठकों के अंतर्मन को स्पर्श करती हैं।
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