पुस्तक परिचय
विकास का तात्पर्य है प्रतिपल प्रति-कदम वृद्धिः वृद्धि का सार है मंजिल लेकिन चलोगे नहीं तो पहुँचोगे कैसे ? चल पड़ो-अचानक चल पड़ो । तुम्हारे साथ पाथेय हो या न हो । अनायास ही तुम पाथेय भगवता और मंजिल को प्राप्त हो जाओगे।" न तो चलने का विकल्प है और न रास्ते का ।
लेखक परिचय
डॉ० किरण त्रिपाठी, वेदान्ती चेयर पर्सन: पाराविद्या अनुसंधान केन्द्र के विख्यात वास्तुविद्, ज्योतिषाचार्य एवं तंत्र साधिका। शिक्षा : एम० ए० (संस्कृत), पी एच० डी०, डी० पी० पी० एच०, पी० जी० डी० पी० सी० प्रकाशित कृतियाँ : ईशोपनिषद, अध्यात्म-चिन्तन, जीव, ब्रह्मज्ञान, जगत् और माया, क्या करूँ-किधर जाऊँ, वेद-परिचय। मुद्रणाधीन कृतियाँ: आत्मचिन्तन, गीता : एक अनुशीलन, बिहार : अतीत और वर्तमान, भारत की कुछ दिव्यात्माएँ, सांख्यकारिका : एक विवेचन अन्य उपलब्धियाँ: देश-विदेश की अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक तथा साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं अभिनंदित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से विविध वार्ताएँ प्रसारित एवं प्रदर्शित। विविध पत्र-पत्रिकाओं में अनेक विषयों पर शोधपरक गंभीर आलेखों का प्रकाशन।
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