Kathamala -47
सुमति सक्सेना लाल व्यवसाय : लगभग चार दशकों तक लखनऊ के नारी शिक्षा निकेतन महाविध्यालय में दर्शन शास्त्र पढ़ाने के बाद फुरसत से हैं। लेखन-दो किश्तों में। पहली कहानी धर्मयुग में १९६९ में-तब से पाँच वर्षों तक साप्ताहिक हिंदुस्तान, धर्मयुग और सारिका आदि में छपते रहे। उसके बाद इक्कतीस दीर्घ वर्षों का मौन। २००५ से लेखन की दूसरी पारी-तब से निरंतर लेखन और प्रकाशन। लगभग दो ढाई दर्जन कहानियाँ पत्रिकाओं में। एक लघु उपन्यास, पाँच उपन्यास दो कहानी संग्रह। इतनी लम्बी जिंदगी का जमा हासिल बस इतना ही।
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