पुस्तक परिचय
रमेश बतरा लघुकथा महल के एक कुशल चेजारा थे, उसने अपनी सूझबूझ के साथ खूबसूरती से उचित गारा एवं अनुपातिक दृष्टि से मजबूत ईंटों का इस्तेमाल करते हुए लघुकथा महल का निर्माण शुरू किया। साहित्यिक आकाश में लघुकथा के चमकते कंगूरे, आज जो दिखाई दे रहे हैं, इनकी नींव के पत्थर रखने वाले शुभचिंतक एवं समर्पित कारीगरों में से एक श्रीमान् रमेश बतरा थे। हमें लघुकथा के झिलमिलाते कंगूरों से उन नींव के पत्थरों की ओर भी देखते रहना है और उनके पीछे उन शख्सियतों की इच्छाशक्ति एवं समर्पित भावना को भी देखना है, जो अपने घर-मकान की डगमगाती नींव की बजाय लघुकथा-महल की नींव के पत्थर रखते चले गये।
रमेश बतरा ने उपन्यास, कहानी व लघुकथा साहित्य लेखन के साथ-साथ अनुवाद एवं सम्पादकीय दृष्टि से भी लाजवाब कार्य किया और रमेश, साहित्य के हर पहलू से गुजरा, उन्होंने अपनी मेहनत व लगन से साहित्यिक-सरोवर से असीम मोतियों को छुआ, इन्हीं प्रतिमाओं को देखते हुए अगर उन्हें साहित्य-सरोवर का राजहंस कह दिया जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उस राजहंस ने साहित्यिक आकाश में असीम ऊँचाइयों तक उड़ान भरी तथा हिन्दी-मिलाप, तारिका, साहित्य निर्झर, सारिका, नवभारत टाइम्स, सण्डेमेल, गंगा व करंट जैसे साहित्यिक सरोवरों के एक घाट से दूसरे घाट तक उड़ान भरते रहे, मोती तो मिले मगर न तो किसी सरोवर से स्थायित्व मिला न अपनों से अपनत्व। अन्ततः हताश, निराश, अवसाद भरे मुफलिसी क्षणों में कसमसाते उसने असमय इस सांसारिक सरोवर से उड़ारी ली।
लेखक परिचय
जन्म-02 दिसम्बर, 1951 गाँव- भैंसली, तहसील राजगढ़, चूरू (राज.) शिक्षा- एम.बी.बी.एस., एम.एस. (प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ) सम्प्रति- राजस्थान सरकार से सेवानिवृत्त, चिकित्सक प्रकाशित पुस्तकें - एकल-लघुकथा-संग्रह: 1. तिनके तिनके (1989), 2. प्रेरणा (1994), 3. क्रमशः (2002), 4. रूबरू (2006), 5. आधी दुनिया की लघुकथाएँ (2009), 6. मेरी श्रेष्ठ लघुकथाएँ (2009), 7. संसारनामा (2012), 8. रजत कण (2014), 9. दर्पण के उस पार (2015), 10. सामाजिक सरोकार की लघुकथाएँ (2017), 11. प्रजातंत्र के सारथी (2018), 12. मेरी चुनिंदा लघुकथाएँ (2019), 13. बुजुर्ग जीवन शैली की लघुकथाएँ (2019), 14. मेरी बीसवीं सदी की हिन्दी लघुकथाएँ (2021), 15.70 लघुकथाएँ (2022), 16. संवादात्मक लघुकथा (2023), लघुकथाएँ (2024), 19. नी-रत्नी लघुकथाएँ (2024) 17. नई सदी की मेरी लघुकथाएँ (2023), 18. बाल मन की दस्तावेजी सम्पादित लघुकथा संकलन : प्रतीकात्मक लघुकथाएँ (2006), पौराणिक संदर्भ की लघुकथाएँ (2006), अपठनीय लघुकथाएँ (2006), दलित समाज की लघुकथाएँ लघुक (2008), लघुकथा-विमर्श (2009), भारतीय हिन्दी लघुकथाएँ (2010), देश-विदेश की लघुकथाएँ (2010), राजस्थान के लघुकथाकार (2010), भारत का हिन्दी लघुकथा संसार (2011), कुखी पुकारे (2011), एक सौ इक्कीस लघुकथाएँ (2011), हिन्दी की समकालीन लघुकथाएँ (2012), किसको पुकारू (2012), आजाद भारत की लघुकथाएँ (2012), गुलाम भारत की लघुकथाएँ (2014), लघुकथा पड़ाव और पड़ताल खण्ड-12 (2015), हिन्दी की प्रतिनिधि लघुकथाएँ (2016), दलित जीवन की लघुकथाएँ (2017), स्मृति-शेष लघुकथाकार (2018), लघुकथा सप्तक (2018), प्रतिनिधि हिन्दी लघुकथाकार (2019), लघुकथा सप्तक-2 (2019), किन्नर समाज की लघुकथाएँ (2019), लघुकथा सप्तक-3 (2019), लघुकथा सप्तक-4 (2019), लघुकथा सप्तक-5 (2020), दलित सन्दर्भ की लघुकथाएँ (2020), लघुकथा सप्तक-6 (2020), आधुनिक हिन्दी लघुकथा का पूर्वार्द्ध-काल (1971-1990) (2020)
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