जिस जाति का इतिहास नहीं होता, वह जाति मृतप्रायः है। किसी भी जाति की उन्नति उस जाति में उत्पन्न महापुरुषों द्वारा होती है। प्रत्येक जाति का जनसमूह प्राचीन गौरवपूर्ण गाथाओं को सुनकर या पढ़कर प्रभावित होता है। अपने महान् कार्यों द्वारा ही चरित्र निर्माण होता है। इतिहास शून्य जातियाँ न कभी उठी हैं, न उठ सकती हैं।
वैश्य जाति का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसने अनन्त विभूतियों को जन्म दिया है। उन अमर विभूतियों को, जो इतिहास ने उपेक्षित कर रखी हैं, को प्रकाश में लाना ही पुस्तक का मुख्य उद्देश्य रहा है। महाराजा अग्रसेन से प्रेरणा लेकर ही उनकी तरह ही शौर्य और बलिदान की परम्परा में आगे रहकर देश की स्वतन्त्रता और अखण्डता में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया है। स्वतन्त्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण योगदान आर्थिक सहयोग, स्वदेशी आन्दोलन तथा विदेशी वस्त्र बहिष्कार में विशेष रूप से रहा। गुलामी की जंजीरों को तोड़ने में वैश्य समाज के क्रान्तिकारियों ने सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
1857 की क्रान्ति में वैश्य वीरों ने भरपूर सहयोग दिया। अंग्रेजों को देश से उखाड़ने में वैश्यों में नेशनल कांग्रेस और महात्मा गांधी का भरपूर साथ दिया।
स्वतन्त्रता की आग को प्रज्जवलित करने के लिए गांधी जी, जमना लाल बजाज, राम मनोहर लोहिया व अन्य नेताओं के नाम कभी भुलाए नहीं जा सकते। 1857 के क्रान्तिकारियों और शहीदों में रामजीदास गुड़वाले, लाला झनकूमल सिंहल, सेठ मटोल दास अग्रवाल और लाला हुकम चन्द को कैसे भुलाया जा सकता है। लाला लाजपत राय और मन्मथ गुप्त का भी स्वतन्त्रता आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण योगदान है।
दिल्ली के क्रान्तिकारियों में मास्टर अमीर चन्द, अवध बिहारी, लाला हनुमन्त सहाय और लाला हरदयाल ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। स्वतन्त्रता व स्वतन्त्रता आन्दोलन में वैश्य वीरांगनाओं का योगदान भी कम नहीं है। उनमें सर्वाधिक प्रमुख हैं-पार्वती देवी, नीरजा रानी, श्रीदेवी मुसद्दी, राष्ट्रभक्त जानकी देवी बजाज और त्यागमूर्ति कस्तूरबा गांधी।
लौहपुरुष चन्द्रभानु गुप्त, दादा राधा रमण, सेठ गोविन्द दास, लाला देशबन्धु गुप्त, बनारसी दास गुप्त, रामकिशन गुप्ता, लाला मुरलीधर जैसे स्वतन्त्रता सेनानी भी हैं, जिनका भारत की आजादी में अविस्मरणीय योगदान रहा है।
इस पुस्तक को लिखने में जिन विद्वानों की पुस्तकों और पत्रिकाओं का सहारा लिया है, उन सभी के प्रति मैं हृदय से आभारी हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि वैश्य क्रान्तिकारी और स्वाधीनता सेनानी पुस्तक को आद्योपांत पढ़ने पर प्रत्येक पाठक के हृदय में देशभक्ति, साहस, वीरता और मानवता के प्रति समर्पण की भावना उत्पन्न होगी।
Hindu (हिंदू धर्म) (14094)
Tantra (तन्त्र) (1052)
Vedas (वेद) (732)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2142)
Chaukhamba | चौखंबा (3457)
Jyotish (ज्योतिष) (1635)
Yoga (योग) (1213)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (714)
Sahitya (साहित्य) (25538)
History (इतिहास) (9436)
Philosophy (दर्शन) (3739)
Santvani (सन्त वाणी) (2600)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist