दो शब्द
हिन्दी भाषा में चिकित्सा शास्त्र के विषयों को लेकर अनेक ग्रन्य प्रकाशित हो चुके हैं। किन्तु वे सब डाक्टरों, वैद्यों तथा मैडिकल छात्रों तक ही उपयोगी हैं। या फिर बहुत सस्ते प्रकार का प्रकाशन कर प्रकाशक लोग भोलीभाली जनता को ठगते फिरते हैं। उसमें जो योग रोग के प्रति दिए गए होते हैं वे उपयोग करने पर रोग अनुसार उचित नहीं बैठते। विभिन्न ग्रन्थों के आधार पर उनके उत्कृष्ट अंशों का संग्रह करते हुए लेखक ने इस पुस्तक की रचना की है। जिस प्रकार मधुमक्खी विभिन्न पुष्पों से उनके रसों का संग्रह करती हुई सरस स्वादिष्ट मधु का निर्माण करती है उसी प्रकार का बहुत कुछ प्रयत्न लेखक ने किया है। इस पुस्तक में जितने भी योग दिए हैं वे सभी लेखक ने अपने जीवन में अपनाए हैं और उनसे जनता को बहुत लाभ हुआ है। इन योगों की विशेषता यह है कि ये इतने सरल हैं कि इन्हें सर्वसाधारण जनता भी आसानी से उपयोग में ला सकती है। लेखक की "चिकित्सा-भास्कर" पुस्तक भी बहुत उपयोगी है जिसके कई योगों का मैंने भी अपने मरीजों पर उपयोग किया है. जो रामबाण सिद्ध हुए हैं। इस पुस्तक में विशेषरूप से "स्त्री रोग चिकित्सा" विषय को लिया गया है। थोड़ी पढ़ी लिखी माताएं भी इसे अपनाकर रोगमुक्त हो सकती हैं। लेखक (वैद्य हरिसिंह चिड़ी निवासी) हरयाणा में ही नहीं अपितु पंजाब में भी प्रसिद्ध हैं। जिनके उपयोगी योगों ने रोगपीड़ित जनता का भला किया है।
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