AYURVEDA BOOKS IN HINDI

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Ancient Wisdom of Ayurveda through These Must-Read Books

FAQs


Q1. What are the 3 major texts of Ayurveda?


आयुर्वेद के बारे में वर्तमान ज्ञान मुख्य रूप से ब्रहत्रयी नामक ग्रंथों के "महान त्रय" पर आधारित है, जिसमें- चरक संहिता, सुशुर्त संहिता और अष्टांग हृदय (वाग्भट) शामिल हैं। ये उन मूल सिद्धांतों का वर्णन करती हैं जिनसे आधुनिक आयुर्वेद विकसित हुआ है।


चरक में 8,400 से अधिक छंद हैं, जो आयुर्वेद के अधिकांश सैद्धांतिक ढांचे को प्रस्तुत करता है और कायाचिकित्स (आंतरिक चिकित्सा) नामक आयुर्वेद की शाखा पर ध्यान केंद्रित करता है। यह आंतरिक अग्नि-पाचन-या आंतरिक चिकित्सा का सिद्धांत है। सुश्रुत संहिता आयुर्वेदिक सर्जरी (शल्य) के अभ्यास और सिद्धांत से निपटने के  सूत्र का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।


Q2. How many books are there in Ayurveda?


आरोग्य पर प्रसिद्ध पुस्तकें

 

☛ अष्टांगहृदयम् (Ashtanghridayam)- एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रन्थ है जिसके रचयिता महर्षि वाग्भट हैं।

 

☛ चरक संहिता (Charak Samhita)- यह आयुर्वेद के सिद्धांत का प्राचीनतम और सम्पूर्ण ग्रन्थ है, जिसकी रचना आचार्य चरक द्वारा की गई थी।

 

☛ सुश्रुत संहिता- रचना धन्वंतरि और उनके शिष्य सुश्रुत द्वारा की गई थी।

 

☛ आयुर्वेद सार संग्रह  - सम्पादन बैद्यनाथ

 

☛ आयुर्वेदिक कुकिंग फॉर सेल्फ हीलिंग - लेखक उषा लैड और वसंत दत्तात्रेय लैड

 

☛ औषध दर्शन- लेखक बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण

 

☛ आरोग्य मंजरी - लेखक श्री वेद प्रकाश शास्त्री

 

☛ आयुर्वेद एंड पंचकर्म - लेखक डॉ सुनील वी.जोशी

 

☛ धन्वंतरि निघण्टु - लेखक डॉ अमृतपाल सिंह


Q3. What is the philosophy of Ayurveda?


भारतीय दर्शन के छह स्कूल सांख्य, न्याय, वैशेषिक, योग, मीमांसा और वेदांत हैं। इनकी उत्पत्ति वेदों में है। आयुर्वेद में यह माना जाता है कि ईश्वरीय ज्ञान के सिद्धांतों का पालन करके स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रकृति तत्वों और मानव शरीर के त्रिदोषों के बीच एक सही संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए।


माना जाता है कि शरीर सात प्रकार के ऊतकों से बना होता है जिन्हें "सप्त धातु" कहा जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा का मूल सिद्धांत आपके शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन और सामंजस्य बनाए रखते हुए - बीमारी को रोकना और उसका इलाज करना है।


Q4. When was Ayurveda transcribed?


आयुर्वेद को 5,000 साल पहले वेद नामक चार पवित्र ग्रंथों में स्वीकार किया गया है। ऋग्वेद (3000-2500 ईसा पूर्व), यजुर वेद, साम वेद और अथर्ववेद (1200-1000) ईसा पूर्व । चरक, सुश्रुत, काश्यप आदि मान्य ग्रन्थकार आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद मानते हैं। इससे आयुर्वेद की प्राचीनता सिद्ध होती है।

 

परम्परानुसार आयुर्वेद के आदि आचार्य अश्विनीकुमार माने जाते हैं। अश्विनी कुमारों से इन्द्र ने , इन्द्र से धन्वन्तरि ने यह विद्या प्राप्त की। आय़ुर्वेद के आचार्य ये हैं— अश्विनीकुमार, धन्वन्तरि, दिवोदास (काशिराज), नकुल, सहदेव, अर्कि, च्यवन, जनक, बुध, जावाल, जाजलि, पैल, करथ, अगस्त्य, अत्रि तथा उनके छः शिष्य (अग्निवेश, पराशर, आदि), सुश्रुत और चरक।


Q5. Who wrote the first Ayurveda?

 

आयुर्वेद का श्रेय हिंदू पौराणिक कथाओं में देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि को दिया जाता है, जिन्होंने इसे ब्रह्मा से प्राप्त किया था। इसकी प्रारंभिक अवधारणाओं को वेदों के हिस्से में अथर्ववेद के रूप में जाना जाता है।


धन्वंतरि को एक पौराणिक देवता माना जाता है जो सागर मंथन के अंत में एक हाथ में अमृत और दूसरे हाथ में आयुर्वेद लेकर पैदा हुए थे।

 

चरक मत के अनुसार, आयुर्वेद का ज्ञान सर्वप्रथम ब्रह्मा से प्रजापति ने, प्रजापति से अश्विनी कुमारों ने, उनसे इन्द्र ने और इन्द्र से भरद्वाज ने प्राप्त किया। आयुर्वेद के विकास मे ऋषि च्यवन का अतिमहत्त्वपूर्ण योगदान है।


Q6. What are the oldest known texts on Ayurveda?

 

भारत में प्राचीन काल में, मेडिकल साइंस एक ऐसा क्षेत्र था जहां आश्चर्यचकित और अग्रिम प्लास्टिक सर्जरी, आदि के क्षेत्र में विशेष रूप से प्रयास किए गए थे.

 

सुश्रुत संहिता: इस ग्रंथ में क्षार, अग्नि, जलौका का वर्णन है।

 

चरक संहिता: मूल नाम अग्निवेशतन्त्र था, इसका निर्माण अग्निवेश ने किया था। वर्तमान समय में उपलब्ध चरकसंहिता को यह स्वरूप प्रदान किया।

 

अष्टांग हृदय: इसमें दोनों- काय चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा के विषयों का वर्णन किया गया है। वाघत,  कश्यप संहिता,  भेला संहिता,  चिवारावस्तु, लघुत्रयी ।

 

लघुत्रयी के प्रमुख ग्रंथ है: माधव निदान, शाग्र्ड.धर संहिता, और भाव प्रकाश


Q7. What are the main classical reference books of Ayurveda?


शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथ, स्वास्थ्य और उपचार के विषय पर 1500 और 500 ईसा पूर्व के बीच लिखा गया था। सभी में छह शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथ हैं। उन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है: बृहत्त्रेय (तीन महान ग्रंथ), और लघुत्रेय, (तीन छोटे ग्रंथ)।

 

बृहत्त्रेय शास्त्रीय आयुर्वेद पुस्तकें - चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदयम हैं। शब्द "बृहत्" का अर्थ है "बड़ा या बड़ा।" लघुत्रेय तीन छोटी पुस्तकें हैं - अष्टांग समागम, माधव निदानम और सारंगधारा संहिता ।


"लघु" शब्द का अर्थ है "छोटा, हल्का या कम।" साथ में, ये पुस्तकें शास्त्रीय आयुर्वेदिक चिकित्सा में सबसे महत्वपूर्ण साहित्य बनाती हैं।