कृश्न चन्दर जन्म 23-11-1913 मृत्यु 8-3-1977 अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकर स्वर्गीय श्री कृश्न चन्दर, कवीन्द्र रवीन्द्र नाथ टैगोर और मुंशी प्रेमचन्द के बाद तीसरे ऐसे भारतीय साहित्यकार है, जिनकी रचनाओं का 16 भारतीय और 65 से अधिक प्रमुख विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है, जिनकी पुस्तकें केवल भारत ही में नहीं, बल्कि अन्य यूरोपीय और एशियाई भाषाओं में लाखों की संख्या में बिकती हैं। कृश्न चन्द्र की कथा रचनाओं में ब्यंग, किस्सागोई और रोमानी यथार्थ का अद्भुत मिश्रण है। कृश्न चन्द्र के चाहने वाले ओर उनकी रचनाओं के प्रशंसक संसार के कोने-2 में फैले हुए हैं। भारत सरकार ने उन्हें "पद्म भूषण" की उपाधि से विभूषित किया तथा उन्हें 'सोवियत लेण्ड नेहरू पुरस्कार' भी मिला। उनके 55वें जन्म दिवस पर भाषण देते हुए श्रीमति इंदिरा गांधी ने मानवी सद्भावनाओं की दृष्टि से उन्हें गालिब के बराबर बताया था। स्व. कृश्न चन्दर ने लगभग सौ पुस्तकें लिखी और चार सौ से अधिक कहानियों के लेखक है।
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