चन्द्रकला त्रिपाठी पिता स्व. पं. जनार्दन पाँडे माता: श्रीमती मोहनी देवी पाँडे पति: डॉ. श्याम सुन्दर त्रिपाठी शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी) साहित्य रत्न, आयुर्वेद रत्न। जन्म : 2 जनवरी 1944, जोशीमठ गढ़वाल। बचपन गढ़वाल एवं कुमायूँ के अनेक गाँवों और शहरों में बीता। वही शिक्षा-दीक्षा हुई। विवाहोपरान्त छत्तीसगढ़ के विभिन्न गांवों एवं शहरों में रहने का अनुभव। साहित्य सृजन लिखने का शौक बचपन से ही छिटपुट रचनाओं का प्रकाशन विद्यालयीन पत्रिकाओं में। बाल कहानियों का प्रकाशन नन्दन, पराग, मिलिन्द में सन् 1971 से लगातार आकाशवाणी रायपुर से विभिन्न विधाओं में रचनाओं का प्रसारण, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी व छत्तीसगढ़ी रचनाओं का प्रकाशन। साक्षरता अभियान में निरन्तर भागीदारी व लेखन। अभिरुचि: साहित्य रचना के अतिरिक्त लोकगीत, लोककलाओं एवं लोकनाट्य में अभिनय। स्वयं सेवी संस्थाओं से सम्पर्क एवं लोकहित कार्य। भारतीय स्त्री शक्ति की सदस्यता, भारतीय योग संस्थान की सदस्यता। राष्ट्र सेविका समीति में मेधावती मण्डल प्रमुख। कृतियाँ: 1. रामकोठी नवसाक्षरों के लिये लघु उपन्यास। 2. भीतर का दर्द (कहानी संकलन)। 3. संस्कार एवं अन्य कहानियाँ (कहानी संकलन)। 4. छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहार। 5. लगरे गोठ (छत्तीसगढ़ कहानी संग्रह)। 6. पर्यावरण संरक्षण। प्रकाशनाधीन : 1. छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह। 2. बाल कहानी संग्रह। 3. चिन्तन। सम्मान : सिलिगुड़ी में जापानी संस्था रेयुकाई द्वारा सम्मानित।
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