Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.

वेदाङ्ग ज्योतिष और विज्ञान परम्परा- Vedic Astrology and Science Tradition

₽2086
Includes any tariffs and taxes
Gokuldas Sanskrit Granthamala- 233
Express Shipping
Express Shipping
Express Shipping: Guaranteed Dispatch in 24 hours
Specifications
Publisher: CHAUKHAMBHA ORIENTALIA, Delhi
Author Professor Umashankar, Harshit Rai
Language: Hindi
Pages: 325
Cover: PAPERBACK
8.5x5.5 inch
Weight 420 gm
Edition: 2026
ISBN: 9789389329919
HCI891
Delivery and Return Policies
Ships in 1-3 days
Returns and Exchanges accepted within 7 days
Free Delivery
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.
Book Description

प्राक्कथन

अखिल जगत् के नियन्ता, कालस्वरूप परमेश्वर को सादर प्रणाम करते हुए, अपने स्वर्गीय पिताजी की पुण्य स्मृति में समर्पित करते हुए और श्रद्धेया माता जी के चरणों को नमन करता हूँ। साथ ही अपने गुरुजनों एवं आचार्य. परम्परा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए इस ग्रन्थ का प्रारम्भ करना लेखक के लिए परम सौभाग्य का विषय है। माता-पिता के संस्कार, गुरुजनों का मार्गदर्शन और शास्त्रों की अनुकम्पा - इन्हीं के समन्वय से किसी भी विद्या-साधना का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रस्तुत कृति भी उसी परम्परा का एक विनम्र प्रयास है और भारतीय ज्ञान-परम्परा में वेद, वेदाङ्ग, उपाङ्ग तथा शास्त्र केवल अतीत की बौद्धिक धरोहर नहीं हैं, अपितु वे मानव-चिन्तन की ऐसी सजीव एवं निरन्तर प्रवहमान परम्परा हैं, जिनमें विज्ञान, दर्शन और जीवन-व्यवहार का अद्भुत समन्वय दृष्टिगोचर होता है। इस परम्परा की विशिष्टता यह है कि यहाँ ज्ञान को न तो केवल आध्यात्मिक बनाया गया और न ही मात्र भौतिक-अपितु दोनों के समन्वय से जीवन को समझने का प्रयास किया गया। विशेषतः वेदाङ्ग-ज्योतिष भारतीय बौद्धिक परम्परा का वह आधार स्तम्भहै, जहाँ काल, गणित, खगोल और यज्ञ- ये चारों तत्त्व परस्पर सम्बद्ध होकर एक सुव्यवस्थित वैज्ञानिक दृष्टि के रूप में प्रकट होते हैं।

प्रस्तुत ग्रन्थ वेदाङ्ग ज्योतिष और विज्ञान परम्परा इसी समन्वयात्मक दृष्टि को केन्द्र में रखकर रचा गया है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि वेदाङ्ग-ज्योतिष केवल कर्मकाण्ड की सहायक विद्या नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक चिन्तन की एक सुदृढ़, तार्किक और गणनात्मक परम्परा का प्रतिनिधित्व करता है। काल गणना, तिथि-नक्षत्र-व्यवस्था, अयन-ऋतु-चक्र तथा ग्रह-गति की सूक्ष्म गणनाएँ इस तथ्य का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि प्राचीन भारतीय मनीषियों ने प्रकृति और ब्रह्माण्ड का अध्ययन अत्यन्त सूक्ष्म दृष्टि से किया था। वर्तमान समय में संस्कृत अध्ययन, विशेषतः विश्वविद्यालयी स्तर पर, प्रायः दो विपरीत चुनौतियों का सामना कर रहा है-एक ओर प्राचीन ग्रन्थों की गहनता और दूसरी ओर उनके समकालीन, सुव्यवस्थित एवं पाठ्यक्रमानुकूल अध्ययन-साधनों की अनुपलब्धता। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक संस्कृत पाठ्यक्रम (UGCF), सेमेस्टर-8 में वेदाङ्ग-ज्योतिष, भारतीय गणित तथा खगोल-परम्परा से सम्बद्ध विषयवस्तु को सम्मिलित किया गया है; इस पाठ्यक्रम की समस्त आवश्यकताओं को पूरी करने वाली छत्रोपयोगी सामग्री को प्रदान करना ही इस पुस्तक का उद्देश्य है। इसी अकादमिक आवश्यकता ने इस पुस्तक योजना को जन्म दिया, जो सतत् परिश्रम और अध्ययन के उपरान्त आज एक साकार रूप में पाठकों के समक्ष उपस्थित है।

प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम की औपचारिक पूर्ति करना नहीं, बल्कि छात्रों एवं अध्येताओं के समक्ष यह तथ्य स्थापित करना है कि वेदाङ्ग-ज्योतिष कोई अंधविश्वास-प्रधान विद्या नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित कालविधान-शास्त्र, गणितीय खगोलीय विज्ञान तथा वैदिक जीवन-दृष्टि का अभिन्न अंग है। इस ग्रन्थ में संस्कृत के तत्- तत् शास्त्रों की मूल कारिकाओं को देवनागरी लिपि में प्रस्तुत करते हुए, उनकी व्याख्या, सन्दर्भात्मक विवेचना और वैज्ञानिक पृष्ठभूमि को सरल, क्रमबद्ध एवं अकादमिक शैली में स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है, जिससे विद्यार्थी विषय को केवल कण्ठस्थ न करें, बल्कि उसे तर्क और विवेक के साथ समझ सकें।

इस पुस्तक को लिखने में मुझे अनेक विद्वानों द्वारा लिखित अनेक ग्रन्थों से सहायता भी लेनी पड़ी है। अतएव मैं उन सभी लेखकों के प्रति अपना हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ। विशेष रूप से प्रिय शोधार्थी और पुस्तक के सह-लेखक हर्षित राय की कर्मठता और जिज्ञासु प्रवृत्ति का ही सुपरिणाम है कि इस पुस्तक को अतिशीघ्र प्रकाशित करना सम्भव हो पाया। मैं सह-लेखक हर्षित राय के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

यह ग्रन्थ उन सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों को समर्पित है, जो भारतीय विज्ञान-परम्परा को उसके अपने शास्त्रीय स्रोतों के माध्यम से समझना चाहते हैं। यदि यह कृति संस्कृत-अध्ययन के प्रति नवीन रुचि उत्पन्न करने, ज्योतिष और गणित के विषय में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करने तथा भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति आत्मगौरव और विवेकपूर्ण दृष्टि विकसित करने में किंचित् भी सफल होती है, तो लेखक अपने इस प्रयास को पूर्णतः सार्थक मानेगा। ईश्वर की कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के मार्गदर्शन से यह ग्रन्थ पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो-इसी शुभकामना के साथ इसे विद्वज्जनों एवं विद्यार्थियों को समर्पित किया जाता है।

भूमिका

भारतीय सभ्यता की सबसे विशिष्ट और मौलिक विशेषता यह है कि उसने ज्ञान को कभी भी संकीर्ण, पृथक् अथवा असम्बद्ध खण्डों में विभाजित नहीं किया। भारतीय बौद्धिक परम्परा में दर्शन, विज्ञान, गणित, खगोल, धर्म और जीवन- ये सभी एक ही समग्र चिन्तन-प्रवाह के विविध, परस्पर पूरक आयाम हैं। यही कारण है कि यहाँ विज्ञान जीवन से कटा हुआ नहीं दिखाई देता और अध्यात्म तर्क-विवेक से रहित नहीं होता। वेदाङ्ग-ज्योतिष इस समग्र दृष्टि का उत्कृष्ट और सशक्त उदाहरण है, जिसमें दार्शनिक चिन्तन, गणितीय तर्क और खगोलीय निरीक्षण एक साथ समन्वित रूप में उपस्थित हैं। वेदाङ्ग-ज्योतिष को सामान्यतः ग्रह-नक्षत्रों की गणना तक सीमित मान लिया जाता है, परन्तु वस्तुतः यह विद्या उससे कहीं अधिक व्यापक है। यह काल की संरचना, यज्ञ-व्यवस्था का निर्धारण, ऋतु-चक्र की वैज्ञानिक समझ तथा मानवीय जीवन के लयात्मक अनुशासन का आधार प्रस्तुत करती है। तिथि, नक्षत्र, मास, ऋतु, अयन और संवत्सर- ये सभी अवधारणाएँ न केवल धार्मिक या कर्मकाण्डीय प्रयोजनों से जुड़ी हैं, बल्कि प्रकृति के आवर्ती चक्रों और खगोलीय गतियों पर आधारित एक सुव्यवस्थित वैज्ञानिक प्रणाली का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस दृष्टि से वेदाङ्ग-ज्योतिष भारतीय विज्ञान-परम्परा की एक केन्द्रीय कड़ी है।

प्रस्तुत पुस्तक को आठ इकाइयों में विभक्त किया गया है, जिससे विषय-वस्तु क्रमबद्ध, स्पष्ट और पाठ्यक्रमानुकूल रूप में प्रस्तुत हो सके। इसमें वैदिक ज्योतिष एवं वैदिक गणित की आधारभूत अवधारणाओं से आरम्भ करते हुए, फलित ज्योतिष, आर्यभटीयम् जैसे शास्त्रीय ग्रन्थों का विवेचन, भारतीय गणित एवं खगोल विद्या के ऐतिहासिक विकास की चर्चा तथा प्राचीन भारतीय खगोलीय यन्त्रों एवं वेधशालाओं का सम्यक् विवरण दिया गया है। यह संरचना इस उद्देश्य से निर्धारित की गई है कि विद्यार्थी केवल सैद्धान्तिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि ऐतिहासिक, गणितीय और प्रयोगात्मक-तीनों स्तरों पर विषय को समझ सकें।

इस ग्रन्थ की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें वेदाङ्ग-ज्योतिष को मात्र एक परम्परागत पाठ्य-विषय के रूप में न प्रस्तुत कर, उसे भारतीय वैज्ञानिक विरासत के व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थापित किया गया है। लगधाचार्य से आरम्भ होकर आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य, वराहमिहिर और जयसिंह तक की परम्परा को यह पुस्तक एक निरन्तर वैज्ञानिक विकास-श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत करती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय ज्योतिष और गणित किसी एक काल की उपलब्धि नहीं, बल्कि सतत् अवलोकन, गणना और सुधार की जीवंत परम्परा रहे हैं। साथ ही, वैदिक गणित के सूत्रों को आधुनिक गणितीय दृष्टि से समझाते हुए यह पुस्तक यह संकेत भी देती है कि भारतीय गणित-परम्परा की मौलिक विशेषता उसकी सूत्रात्मक, संक्षिप्त और बोधगम्य शैली है। कम शब्दों में अधिक अर्थ को समेटने की यह परम्परा न केवल बौद्धिक तीक्ष्णता का प्रमाण है, बल्कि शिक्षण की दृष्टि से भी अत्यन्त उपयोगी है।

Frequently Asked Questions
  • Q. What locations do you deliver to ?
    A. Exotic India delivers orders to all countries having diplomatic relations with India.
  • Q. Do you offer free shipping ?
    A. Exotic India offers free shipping on all orders of value of $30 USD or more.
  • Q. Can I return the book?
    A. All returns must be postmarked within seven (7) days of the delivery date. All returned items must be in new and unused condition, with all original tags and labels attached. To know more please view our return policy
  • Q. Do you offer express shipping ?
    A. Yes, we do have a chargeable express shipping facility available. You can select express shipping while checking out on the website.
  • Q. I accidentally entered wrong delivery address, can I change the address ?
    A. Delivery addresses can only be changed only incase the order has not been shipped yet. Incase of an address change, you can reach us at help@exoticindia.com
  • Q. How do I track my order ?
    A. You can track your orders simply entering your order number through here or through your past orders if you are signed in on the website.
  • Q. How can I cancel an order ?
    A. An order can only be cancelled if it has not been shipped. To cancel an order, kindly reach out to us through help@exoticindia.com.
Add a review
Have A Question
By continuing, I agree to the Terms of Use and Privacy Policy
Book Categories