लेखक : रवीन्द्र नाथ बहोरे, समीक्षक, रंगकर्मी, सम्पादक, ज्योतिष शास्त्री अद्यतन छोटी-बड़ी 127 पुस्तकों का लेखन सम्पादन । प्रमुख कृतियाँ : उपन्यासः वन्देमातरम् (पुरस्कृत), सूरज डूब गया, भूत। आत्मकथाः में और मेरी नियति । ज्योतिषः बावन पत्तों का रहस्य, सपने बोलते हैं, चीनी ज्योतिष और आप । सम्पादित ग्रन्थः पचास वर्ष पचास गीत, लोकनाट्य नोटंकी: कुछ प्रश्न, भारतीय संगीत के प्रमुख स्तम्भ, भारतीय संगीत-विमर्श, नाटककार दयाप्रकाश सिन्हाः समीक्षायन, 'बड़े हुजूर' तथा तीन अन्य नाटक। नाटककार रमेश मेहता रंग समग्र (दो भाग), संगीत संवाद। नाटकः डूबते सूरज का इंसाफ, फकीर, एक था राजा, हत्या या आत्महत्या । अनूदित कहानी संग्रहः ममी का पांव। सम्पादित नाटकः जमाना, ढोंग व रोटी और बेटी, बड़े आदमी दामाद, फेसला हमारा गांव, उलझन, पेसा बोलता है, अण्डर सेक्रेटरी । मोलिक ग्रन्थः दृष्टिकोण । अप्रकाशित अनूदित पुस्तकेंः राज पिछले जन्मों का। सम्प्रतिः पूर्व सम्पादकः संगीत, नृत्य व नाट्य त्रैमासिक 'छायानट' (उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का प्रकाशन)।
भूत" कोई 'हॉरर' उपन्यास नहीं बल्कि एक काल्पनिक औपन्यासिक रचना है। यह उपन्यास गाँव की बंजर जमीन पर जंगल उगाने, गाँव का विकास करने के एक नवयुवक के दृढसंकल्प को साकार करने की कहानी कहता है। पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर भी वह कृति महत्वपूर्ण सन्देश देती है। मैंने जीवन में कभी गाँव नहीं देखा, कभी खेत नहीं देखे और न जंगल ही देखा है। मैंने इसे अपनी कल्पना के आधार पर लिपिबद्ध किया है। उपन्यास में कुछ विचित्र अविश्वसनीय और रोमांचकारी घटनायें आपको मिलेंगी। ये घटनायें आपको अविश्वसनीय प्रतीत हो सकती हैं, किन्तु ऐसी अविश्वसनीय प्रतीत होनेवाली घटनाओं का मैं प्रत्यक्षदर्शी रहा हूँ।
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