तारा दत्त जन्म : 01 जनवरी 1952 को उत्तराखण्ड के ग्राम मटेला नामक स्थान में एक किसान परिवार में हुआ । प्रकाशित कृतियाँ : कहानी संग्रह : अभिषेक, कुछ स्वेदश की कुछ विदेश की कहानियाँ। कविता संग्रह: साहित्यांजलि, शिखरो के बीच उगता सूर्य, कलियों को खिलने दो। सम्मान : विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट से राष्ट्रगौरव सम्मान, व साहित्य सेवा सम्मान ।
कब होगा सवेरा, मेरा एक अहम् उपन्यास है, जिसको परिवार के साथ एक ही टेबल पर पढ़ा जा सकता है, इस उपन्यास में हमें व्यक्तित्व और विचारों की झलक, ग्रामीणें की वास्तविकता, और यह अनछुए भावों से अवगत करता है। यह उपन्यास एक विवश ग्रामीण लड़की की मनोदशा की कहानी है, जो पाठकों को भाव विह्वल कर देगी, एक साधारण सी दिखने वाली लड़की कुर्की का जन्म उस दिन हुआ, जिस दिन उनके घर की कुर्की हो गई थी, तभी उसका नाम कुर्की रखा गया, इसीलिए कुर्की अशुभ मानी गई। परन्तु सवका दुख दर्द समझने वाली कुर्की ने अपनी एक अलग पहिचान गाँव में बना ली थी, इसीलिए कुर्की के पिता से एक सेठ ने ऋण वापस लेने से मना कर दिया था, और कहा था कि मैंने आपको ऋण नहीं दिया है, आपका सहयोग किया है, और सहयोग के बदले सहयोग होता है। यह कृति जीवन के अनसुने पहलुओं से अवगत करने के साथ-साथ प्रेरणा एवं पथ प्रर्दशक बनेगा ऐसा मेरा प्रयत्न है।
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